हज़रत मलिक वज़ीरूद्दीन देहलवी रहमतुल्लाह अलैह

हज़रत मलिक वज़ीरूद्दीन देहलवी रहमतुल्लाह अलैह

आप हज़रत मलिक ज़ैनुद्दीन देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के बड़े भाई हैं, आप निहायत नेक खसलत और सालेह अल्लाह वाले थे, आप ने हुकूमत का कोई उहदा कबूल नहीं किया बल्कि अपने बड़े भाई, की किफ़ालत में रहे और सारी उमर बगैर शादी के ही रहे, अक्सरो बेश्तर औलियाए किराम बुज़रुगाने दीन के मज़ार मुबारक की ज़ियारत को तशरीफ़ ले जाते थे,

शहादत

आप रहमतुल्लाह अलैह हर बुद्ध को बाद खत्मे कुरआन शरीफ शहादत की दुआ मांगा करते थे, चुनांचे बड़े भाई की तरह आप की भी दुआ कबूल हुई और सुल्तान इब्राहीम के साथ जंग में शहीद हुए,

मज़ार शरीफ

आप का मज़ार मुबारक महरोली शरीफ दिल्ली 30/ शम्शी तालाब के पास था, मगर अब निशान भी नहीं है, मुजद्दिदे वक़्त हज़रत शैख़ अब्दुल हक मुहद्दिसे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह अपनी किताब “अख़बारूल अखियार” में तहरीर फरमाते हैं के, के आप की “खानकाह चबूतरा और मज़ार शरीफ की जगह पुर असर और बेनज़ीर है” और तालाब शम्शी की दूसरी इमारतों से ज़ियादा मशहूर और मुमताज़ और पुर रौनक है, इस वक़्त भी आप के मकबरे से आसारे रहमत ज़ाहिर हैं, लेकिन अफ़सोस आज आप के मज़ार मुबारक और खानकाह का निशान तक नहीं है।

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

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