हज़रत शैख़ अहमद सोहरवर्दी खनदा बदायूनी रहमतुल्लाह अलैह

नाम व लक़ब

आप का नाम मुबारक “शैख़ अहमद” था, मुस्कुरा कर बात करने की वजह से शैख़ अहमद खनदा! के नाम से मश्हूरो मारूफ थे, इंतिहाई शीरीं गुफ्तुगू करने की वजह से शकर दहां! कहे जाते थे।

बैअतो खिलाफत

आप शैख़ुश शीयूख हज़रत अल्लामा शैख़ शहाबुद्दीन अबू हफ्स उमर सोहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह! के मुरीद व खलीफा थे, मुअज़्ज़ असफिया व औलियाए किराम में शुमार होते हैं, कामलाते ज़ाहिरी व बातनी से आरास्ता व पैरास्ता थे, अब्वाबे सूरी व मानवी आप के चेहरे पर रोशन व दरख्शां रहते थे, मुजद्दिदे वक़्त हज़रत शैख़ अब्दुल हक मुहद्दिसे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह! फरमाते हैं: शैख़ अहमद सोहरवर्दी खनदा बदायूनी रहमतुल्लाह अलैह! बहुत कामिल और अहले मनाज़िल थे, आप का आस्ताना मरजए खलाइक है, हफ्त अहमद बदायूं में शामिल हैं,

इन्तिक़ाले पुरमलाल

28/ रमज़ानुल मुबारक 633/ हिजरी को आप का इन्तिकाल हुआ।

मज़ार शरीफ

आप का मज़ार मुबारक यूपी के ज़िला बदायूं शरीफ के मुहल्लाह सोथा में शैख़ मममदू वाली मस्जिद! के सेहन में मरजए खलाइक है।

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

(1) मरदाने खुदा
(2) तज़किरतुल वासिलीन

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