हज़रत ख्वाजा शैख़ मुहम्मद चिश्ती साबरी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह

बैअतो खिलाफत

आप हज़रत शैख़ इब्राहीम रामपुरी चिश्ती सबरी रहमतुल्लाह अलैह के मुरीदो खलीफा हैं, और आप साहिबे करामात बुज़रुग थे, ज़ी इल्म और इल्मे हदीस में आला महारत रखते थे, क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से आप बड़ी अक़ीदतों मुहब्बत रखते थे, और आपके मज़ार शरीफ पर रोज़ाना हाज़री देते थे,

हज़रत ख्वाजा शैख़ मुहम्मद चिश्ती साबरी रहमतुल्लाह अलैह! ने 12/ बारह साल तक इबादतों रियाज़त में मशगूल रहे, दुनियावी लालच नफ़्सानी ख्वाइश से हमेशा दूर रहते थे, और साहिबे ज़ुहदो, वरअ, तकवाओ तदय्युन, परहेज़गार, थे, आप ने सदा ज़िन्दगी बसर की, जिस जगह पर आप का मज़ार शरीफ है, वहां मस्जिद की तामीर आप ने खुद अपने पैसे से करवाई थी, मस्जिद और मदरसा की तामीर के लिए आप के पास पैसे की बहुत कमी थी, लेकिन आप दिन में पांच रूपये एक थैले में डालते देते थे, और शाम को अपने हाथ से निकाल कर मज़दूरी देते थे और थैली खाली नहीं होती थी, सब की मज़दूरी आसानी से देते थे,

वफ़ात :
बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र के ज़माने में 1120/ हिजरी मुताबिक 1708/ ईसवी में आप का इन्तिकाल हुआ,

मज़ार शरीफ :
डी, डी, ऐ, 21/ मंज़िला बिडिंग के पीछे है, जिस पर गुंबद बना हुआ है, पच्छिम की जानिब मस्जिद है, विकास मीनार रिंग रोड इन्दर परिस्त स्टरीट दिल्ली 2/ में मरजए खलाइक है।

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला :-
(6) रहनुमाए माज़राते दिल्ली
(3) औलियाए दिल्ली की दरगाहें

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