नूरे जानो नूरे इमां नूरो कब्रों हश्र दे
बुल हुसैने अहमदे नूरी लिका के वास्ते
विलादत शरीफ
आप की पैदाइश मुबारक माहे शव्वालुल मुकर्रम 1255, हिजरी मुताबिक़ 27, दिसंबर 1839, ईसवी बरोज़ जुमेरात को मारहरा शरीफ ज़िला एटा यूपी मुल्के हिन्द में हुई।
इस्म शरीफ
आप का नामे नामी व इस्मे गिरामी “सय्यद अबुल हुसैन अहमदे नूरी” है, और तारीखी नाम “मज़हर अली” है, और अल मुलक्कब “मियां साहब” है, आप को “मियां साहब” के नाम से आप के दादा जान हज़रत ख़ातिमुल अकाबिर सय्यद शाह आले रसूल अहमदी मारहरवी रदियल्लाहु अन्हु इस लक़ब से पुकारा करते थे, और आप को खानदाने बरकात में “ख़ातिमे अकाबिरे हिन्द” व “मियां साहब” के नाम से याद किया जाता है।
आप के वालिद माजिद
हज़रत “सय्यद शाह ज़हूर हसन” मारहरवी कुद्दीसा सिररुहुन नूरानी है, और आप के वालिद माजिद ख़ातिमुल अकाबिर सय्यद शाह आले रसूल अहमदी मारहरवी रदियल्लाहु अन्हु, हैं और आप के वालिद माजिद हज़रत सय्यद शाह आले बरकात सुथरे मियां रदियल्लाहु अन्हु, हैं और आप के वालिद माजिद असादुल आरफीन हज़रत सय्यद शाह हमज़ाह ऐनी रहमतुल्लाह अलैह हैं, और आप के वालिद माजिद बुरहानुल मवाहिदीन हज़रत सय्यद शाह आले मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैह हैं, और आप के वालिद माजिद सुल्तानुल आशिक़ीन साहिबुल बरकात हज़रत सय्यद शाह बरकतुल्लाह इश्की रहमतुल्लाह अलैह हैं, और आप के वालिद माजिद हज़रत सय्यद शाह ओवैस बिलगिरामि रहमतुल्लाह अलैह हैं, (जद्दे सादाते मारहरा मुक़द्दसा) और आप के वालिद माजिद मुक़दामुल आरफीन हज़रत मीर सय्यद शाह अब्दुल जलील बिलगिरामि सुम्मा मारहरवी रहमतुल्लाह अलैह हैं, और आप के वालिद माजिद सनादुल मुहक़्क़िक़ीन हज़रत मीर सय्यद शाह अब्दुल वाहिद बिलगिरामि रहमतुल्लाह अलैह हैं, (मुसन्निफ़ सबे सनाबिल शरीफ) । और हज़रत सय्यद शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मारहरवी रदियल्लाहु अन्हु के वालिद माजिद सय्यद शाह ज़हूर हसन उर्फ़ बड़े मियां साहब मारहरवी कुद्दीसा सिररुहुन नूरानी है आप के बचपन में ही वालिद माजिद का विसाल हो गया, और सारी तालीमों तरबियत आप के दादा जान ख़ातिमुल अकाबिर सय्यद शाह आले रसूल अहमदी मारहरवी रदियल्लाहु अन्हु के आगोश में हुई।
मुख़्तसर खानदानी हालात
आप हज़रत सय्यद शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मारहरवी रहमतुल्लाह अलैह सादाते हुसैनी ज़ैदी वास्ती बिलगिरामि वालिद माजिद की जानिब से हैं , नीज़ वालीदह माजिदह हज़रत सय्यद मुहम्मद सुगरा मारहरवी कुद्दीसा सिररुहुन नूरानी बीसवीं पुश्त में हैं जैसा के हम इस की तफ्सील “सय्यद शाह बरकतुल्लाह के मज़मून में लिख चुके हैं” आप के आबाओ अजदाद हर अहिद में सरदार व मुक्तदा रहे हैं, ये खानदान आप का 614, हिजरी मुताबिक 1217, ईस्वी में बिलगिराम शरीफ को फतह कर के इस मकाम पर रौनक अफ़रोज़ हुआ और जागीर व ख़िताबात शाही से मुअज़्ज़ज़ हुआ 1017, हिजरी मुताबिक 1689, ईसवी में हज़रत सय्यद शाह मीर अब्दुल जलील कुद्दीसा सिररुहुन नूरानी यानि आप के जद्दे अमजद गौसो क़ुतुब मारहरा मुकर्रर होकर रौनक अफ़रोज़ मारहरा हुए।
आप का हुलिया मुबारक
हज़रत सय्यद शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मारहरवी रहमतुल्लाह अलैह सरापा इस तरह थे:
कद: मियाना लेकिन बावजूद मियाना कदो कामत होने के मजमे में सब से बुलंद नज़र आते,
रंग: मुबारक गंदुमी गेहूँ जैसा था,
सर: सर मुबारक बड़ा और ऊंचा,
पेशानी : खूब बड़ी,
भाऊ यें: बारीक और ये हज़राते सादाते बिलगिराम में उमूमन है,
पलके: दराज़,
आंखें: बड़ी और रोशन सफेदी और सियाही तेज़ सुर्खी के डोरे पड़े, शुगले महमूदा में सियाही मुतलक़ नज़र ना आती और शुगल बरोज़ में दोनों पुतलियां एक बराबर थीं,
बीनी: बुलंद थी,
दन्दान मुबारक: निहायत साफ़ चमकदार और मज़बूत जो गालिबन वक़्ते वफ़ात शरीफ तक सब मौजूद थे कोई नहीं गिरा था,
रेश: रेश मुबारक दाढ़ी भरी हुई,
सीना: मुबारक चौड़ा,
हाथे: लम्बे,
उँगलियाँ: बारीक दराज़,
रफ़्तार: तेज़, हसीं आप की सिर्फ: तबस्सुम थी, अक्सर अमामा रंगीन, कुरता सफ़ेद नक्शबंदी टोपी दो पल्ली पहिनते,
तालीमों तरबियत
हज़रत सय्यद शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मारहरवी रहमतुल्लाह अलैह की उमर शरीफ जब ढाई साल की हुई तो वालिद माजिद का विसाल हो गया, इस लिए आप की तालीमों तरबीयत की तमाम तर ज़िम्मेदारी आप के दादा जान ख़ातिमुल अकाबिर सय्यद शाह आले रसूल अहमदी मारहरवी रदियल्लाहु अन्हु की आग़ोशे मुबारक में हुई, आप के दर्स का आगाज़ हज़रत सय्यद शाह अले रसूल मारहरवी ने हस्बे कायदा इकरा शरीफ की चंद आयात से फ़रमाया: इस के बाद सीने मुबारक से लगाया और खास दुआएं दीं और दरगाह शरीफ के मकतब फ़ारसी में दाखिल फरमा दिया, मकतब में कायदा दाखिला के बाद आप ने फ़ारसी, अरबी, इल्मे फ़िक़्ह, इल्मे तफ़्सीर, हदीस व लुगत, मंतिक व दीगर उलूमो फुनून को हासिल फ़रमाया, आप के असातिज़ाए किराम की फहरिस्त हस्बे ज़ैल है:
(1) हज़रत अमानत अली मारहरवी (2) हज़रत इमाम बख्श मारहरवी (3) हज़रत सय्यद औलादे रसूल मारहरवी (4) हज़रत अहमद खान जलेसरी, (5) हज़रत मौलवी मुहम्मद सईद उस्मानी बदायूनी, (6) हज़रत हाफिज़ अब्दुल करीम पंजाबी, (7) हज़रत हाफिजों कारी मुहम्मद फ़य्याज़ रामपुरी, (8) हज़रत मौलवी फ़ज़्लुल्लाह जलेसरी, (9) हज़रत मौलाना नूर अहमद उस्मानी बदायूनी, (10) हज़रत मौलाना मुफ़्ती हसन खान उस्मानी बरेलवी, (11) हज़रत हकीम मुहम्मद सईद बिन हकीम इमदाद हुसैन मारहरवी, (12) हज़रत मौलाना हिदायत अली बरेलवी, (13) हज़रत मौलाना मुहम्मद तुराब अली अमरोहा, (14) हज़रत मौलाना शाह विलायती, (15) हज़रत मौलाना मुहम्मद हुसैन बुखारी कश्मीरी, (16) हज़रत मौलाना मुहम्मद अब्दुल कादिर उस्मानी बदायूनी रिद्वानुल्लाही तआला अलैहिम अजमईन।
इस्नादे उलूम व बातिनिया
हज़रत सय्यद शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मारहरवी रहमतुल्लाह अलैह ने जिन से उलूमे बातिन हासिल किया था इस में सिरे फहरिस्त ख़ातिमुल अकाबिर सय्यद शाह आले रसूल अहमदी मारहरवी रदियल्लाहु अन्हु हैं, जिन की बारगाहे आली वकार में आप ने दर्जाए अतम यानि मुकम्मल फैज़े रूहानी व इसनादे रूहानी हासिल फ़रमाया, हज़रत के अलावा जिन असातिज़ाए किराम से अज़कार व औराद व सुलूक को पाए तकमील तक पहुंचाया उन के असमाए गिरामी मुनदर्जाए ज़ैल है:
(1) हज़रत सय्यद गुलाम मुहीयुद्दीन, (2) हज़रत मुफ़्ती सय्यद ऐनुल हसन बिलगिरामी, (3) हज़रत शाह शम्सुल हक उर्फ़ तिनका शाह, (4) हज़रत मौलाना अहमद हसन मुरादाबादी, (5) हज़रत हाफ़िज़ शाह अली हुसैन मुरादाबादी, रिद्वानुल्लाही तआला अलैहिम अजमईन।
इजज़तो खिलाफत
आप को खिलाफत व इजाज़त ख़ातिमुल अकाबिर सय्यद शाह आले रसूल अहमदी मारहरवी रदियल्लाहु अन्हु से थी, चुनांचे राहे मारफत की पूरी तकमील के बाद आप को इजाज़ते आम अता फ़रमाई और जिस सनद को आप के शैख़े तरीकत ने अता फ़रमाया था वो ये है: और हुज़ूर ख़ातिमुल अकाबिर सय्यद शाह आले रसूल अहमदी मारहरवी रदियल्लाहु अन्हु ने आप को इजाज़त कुरआन मजीद व सिहा सित्ता व मुसन्निफ़ात हज़रत शाह वलीउल्लाह मुहद्दिसे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह व हिसने हसीन, दलाईलुल खैरात शरीफ, व हिज़्बुल बहर, व हदीस मुसलसल बिल अव्वलिया, व हदीस मुसलसल बिल बिल इज़ाफ़ा, मुसाफ़हात अरबआ, व मुसाफ़हा व मुशाबिका और तमाम उलूम की सनादें जो आप को अपने असातिज़ा से पहुंचीं थीं वो सब अता फ़रमाई जिस में से अक्सर इस्नाद छप चुकी हैं।
फ़ज़ाइलो कमालात
सिराजुस सालिकीन, नुरुल आरफीन, शैख़े तरीकत, आलिमे शरीअत, पीरे तरीकत, हज़रत सय्यद शाह अबुल हुसैन अहमदे नूरी मारहरवी रहमतुल्लाह अलैह आप सिलसिलए आलिया कादिरिया रज़विया के अड़तीसवें 38, वे इमाम व शैख़े तरीकत हैं, आप अपने वक़्त के नामी गिरामी शैख़े तरीकत हैं, आप के फ़ज़ाइल व मनाक़िब पर मुजद्दिदे आज़म इमाम अहमद रज़ा फाज़ले बरेलवी कुद्दीसा सिररुहुन नूरानी ने एक तवील नज़्म तहरीर फ़रमाई है जिस का पहला मिसरा इस तरह है जो हदाईके बख्शिश हिस्सा अव्व्वल में मौजूद है:
बर तर कयास से है मक़ामे अबुल हुसैन
सिदरह से पूछो रिफ़अते बामे अबुल हुसैन
