हज़रत शाह अब्दुल्लाह कुरैशी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह
आप रहमतुल्लाह अलैह हज़रत शैख़ बहाउद्दीन ज़करिया मुल्तानी रहमतुल्लाह अलैह की औलादे पाक से हैं, जिस दौर में आप के आबाओ अजदाद शहर मुल्तान से दिल्ली तशरीफ़ लाए तो सुल्तान बहलूल ने अपनी लड़की की शादी आप से कर दी, आप एक मजज़ूब बुज़रुग थे, शुरू में आप ने बहुत सख्त मुजाहिदा व रियाज़त किए थे, जो एक ताकते बशरी से बहुत ज़ियादा थे, आप कहते थे के में शुरू में रोज़ाना कम अज़ कम एक हज़ार रकअत नमाज़ पढ़ता था और तीन कुरआन शरीफ ख़त्म करता था।
करामत
एक दिन हज़रत शाह अब्दुल्लाह कुरैशी रहमतुल्लाह अलैह अपने दो मंज़िला मकान की छत पर खड़े थे के अचानक आप पर वज्द की हालत तारी हो गई और उसी हालत में मकान की छत से गिर गए लेकिन इस के बावजूद के मकान दो मंज़िला था, आप के कोई चोट वगेरा नहीं लगी।
एक दफा हज़रत शाह अब्दुल्लाह कुरैशी रहमतुल्लाह अलैह ने हालते जज़्ब में एक बकरी को उठा कर ज़मीन पर दे मारा जिससे वो मर गई, लोगों ने आप से कहा के गरीब बकरी को आप ने बिला वजह मार दिया, इस के बाद आप ने इस मुर्दा बकरी पर लात मार कर फ़रमाया के खड़ी हो जा और किसी को बदनाम ना कर, अल्लाह तआला की कुदरत से वो बकरी ज़िंदा कर खड़ी हो गई।
एक मर्तबा आप ने वज्द की हालत में अपने खादिमो से फ़रमाया के घर के अंदर जितना सामान है सब बाहर निकाल कर फेंक दो और घर को आग लगा दो, उस वक़्त आप के छोटे बेटे हज़रत अहमद शाह आप के पास मौजूद थे, उन्होंने अर्ज़ किया अब्बा जान! सामान निकालने में लोगों को तकलीफ होगी, बेहतर ये होगा, के सामान मकान के अंदर ही रहने दें और इस को आग लगा दें ताके तमाम चींजें एक दम जल जाएं और किस्सा तमाम हो जाए, आप को बेटे की ये बात पसंद आई।
वफ़ात
आप रहमतुल्लाह अलैह ने सुल्तान सिकंदर के दौरे हुकूमत में 1499/ ईसवी में वफ़ात पाई।
मज़ार शरीफ
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, दिल्ली मालविये नगर दिल्ली 17/ में था, मगर अफ़सोस हम को नहीं मिला।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

