हज़रत हाजी अब्दुल वहाब सोहरवर्दी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ज़िन्दगी

हज़रत हाजी अब्दुल वहाब सोहरवर्दी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ज़िन्दगी

बैअतो खिलाफत

हज़रत हाजी अब्दुल वहाब सोहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह! के वालिद माजिद का इस्मे गिरामी “सय्यद अहमद बुज़रुंग” और दादा का नाम “सय्यद जलालुद्दीन” बुखारी था, हज़रत सय्यद जलालुद्दीन बुखारी रहमतुल्लाह अलैह के दो बेटे थे, एक का नाम सय्यद महमूद! जिन के बेटे हज़रत सय्यद जलालुद्दीन बुखारी मखदूम जहानियाँ जहाँ गश्त रहमतुल्लाह अलैह हैं, दूसरे आप हज़रत हाजी अब्दुल वहाब सोहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह! के वालिद माजिद हैं, और आप के पीरो मुर्शिद हज़रत शाह अब्दुल्लाह कुरैशी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह हैं, और इन से आप इतनी मुहब्बत करते थे, के देखने वाले ये समझते थे के गोया आप फना फिश शैख़! हैं, हज़रत अल्लामा जलालुद्दीन रूमी रहमतुल्लाह अलैह को जितनी मुहब्बतों अकीदत अपने मुर्शिद हज़रत शाह शमश तबरेज़ रहमतुल्लाह अलैह से थी, इतनी ही आप को अपने पीरो मुर्शिद से थी, आप ने हज़रत ख्वाजा सदरुद्दीन बुखारी रहमतुल्लाह अलैह से तालीम हासिल की थी, जो आप के खुस्र (ससुर) भी थे।

एक मर्तबा आप इन की मजलिस में बैठे हुए थे, के उन्होंने फ़रमाया इस वक़्त दुनिया में दो नेमतें हैं जो तमाम नेमतों से अफ्ज़लो आला हैं, लेकिन लोग इन की क़द्रो मन्ज़िलत नहीं जानते, अव्वल नेमत तो ये है के, हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम मदीना मुनव्वरा ज़ादा हल्लाहू शरफऊं व तअज़ीमा में बा सिफ़त हयात मौजूद हैं, और लोग इस सआदत से फायदा नहीं उठाते, दूसरी नेमत कुरआन पाक की है जो अल्लाह पाक का कलाम है और अल्लाह पाक इस के ज़रिए बगैर किसी वास्ते के अपनी मखलूक से कलाम फरमाता है लेकिन लोग इस नेमत से भी महरूम हैं, जब हज़रत हाजी अब्दुल वहाब सोहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह! ने अपने शैख़ से ये बात सुनी तो आप ने अपने शैख़ से मदीना शरीफ जाने की इजाज़त मांगी और इजाज़त मिलते ही खुश्की के रास्ते मदीना मुनव्वरा ज़ादा हल्लाहू शरफऊं व तअज़ीमा रवाना हो गए, मदीना शरीफ पहुंच कर हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम के रौज़ाए मुबारक पर हाज़री दी, और फ़ौरन अपने वतन मुल्तान वापस आ गए, उस वक़्त मुल्तान के हालात बहुत ख़राब थे, इस लिए आप सिकंदर लोधी के ज़माने में दिल्ली तशरीफ़ लेर आए, सिकंदर लोधी आप का बहुत मोतक़िद था, इस लिए आप की बे इंतिहा इज़्ज़तो खातिर करता था, हज़रत हाजी अब्दुल वहाब सोहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह! ने कुरआन शरीफ की एक तफ़्सीर भी लिखी थी जिस में पूरे कुरआन की तफ़्सीर हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम की तारीफों तौसीफ नात मुबारक थी।

वफ़ात

आप रहमतुल्लाह अलैह ने दूसरी बार हरमैन शरीफ़ैन की ज़ियारत के लिए तशरीफ़ ले गए फिर हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम के हुक्म से दिल्ली तशरीफ़ लाए, आप ने बाबर के दौरे हुकूमत में 932/ हिजरी मुताबिक 1525/ ईसवी को वफ़ात पाई।

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

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