हज़रत शाह अबुल गैस देहलवी रहमतुल्लाह अलैह
आप रहमतुल्लाह अलैह हज़रत हाजी अब्दुल वहाब बुखारी रहमतुल्लाह अलैह के शहज़ादे थे, हर वक़्त मस्ती और जज़्बों हाल में रहते थे, तालिबे इल्मी के ज़माने में दूसरे तालिबे इल्मो से सबक में आगे बढ़ने की ख्वाइश करते और कहते आप हमेशा पढ़ते रहेंगें और मुझे फुर्सते वक़्त पर भरोसा नहीं, खुदा ही जाने क्या हालत हो? गर्ज़ के बहुत जल्द आप ने तमाम मुरव्वजा किताबों पर उबूर हासिल कर लिया, फिर आप पर ऐसा जज़्बा तारी हुआ, के सब कामो से हाथ उठा लिया,
करामत
हज़रत शाह अबुल गैस देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के घर में पूरे दिन रोटियां पक्ति रहती थीं और चूलह जलता रहता था, आप ने एक मर्तबा अपने दोनों पाऊँ उस में रख दिए और बहुत देर तक उस में खड़े रहे लेकिन आप के पाऊँ को आग ने नहीं जलाया,
एक बार हज़रत शाह अबुल गैस देहलवी रहमतुल्लाह अलैह अपने पीरो मुर्शिद के पास गए और अर्ज़ किया अगर किस्मत में है तो कल भी हाज़िर हूँगा, वहां से घर लोट कर वालिदा मुहतरमा की बारगाह में हाज़िर हुए और अर्ज़ किया, अम्मा जान! आप जानती के में सय्यद हूँ? आप की वालिदा माजिदा ने फ़रमाया तुम सय्यद तुम्हारे बाप सय्यद, दादा सय्यद, इस पर आप ने अर्ज़ किया में ने बाप दादा को कब पूछा ये बताओ के में सय्यद हूँ या नहीं? इस के बाद आप ने खादिम को बुला कर फ़रमाया के तुम अपने आका पर किस तरह रोओगे? रोकर दिखाओ, चुनांचे उसी रोज़ या दूसरे दिन वफ़ात पाई।
मज़ार शरीफ
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, मालविये नगर दिल्ली 17/ में शैख़ सराए में वालिद माजिद के पास था, मगर अफ़सोस हम को नहीं मिला।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

