हज़रत सय्यद कबीर चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ज़िन्दगी

हज़रत सय्यद कबीर चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ज़िन्दगी

हज़रत सय्यद कबीर चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह

आप रहमतुल्लाह अलैह शैखुल इस्लाम हज़रत बाबा फरीदुद्दीन मसऊद गंजे शकर रहमतुल्लाह अलैह के नवासे और हज़रत अज़ीज़ुद्दीन सूफी रहमतुल्लाह अलैह के छोटे भाई थे, आप ने सारी उमर सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ज़ेरे निगरानी तरबियत पाई थी, आप ने खानकाहे हज़रत महबूबे इलाही रहमतुल्लाह अलैह की दीवार के नीचे रहते थे, अगर किसी वक़्त आप दस्तरख्वान पर नहीं होते तो सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के हुक्म से आप का खाना आप के घर पंहुचा दिया जाता था, हज़रत सय्यद कबीर चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने एक मौका पर तीन मर्तबा इरशाद फ़रमाया के अगर कोई सूफी, ज़ाहिद, मुत्तक़ी, है तो मखदूम ज़ादा कबीरुद्दीन है, हज़रत सय्यद कबीर चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से बे इंतहा मुहब्बत फरमाते थे, यहाँ तक के अपने बड़े भाई की मुहब्बत को आप की मुहब्बत कुरबान कर दिया था, तमाम उमर इस मकाम पर रहे,

मज़ार

आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीनऔलिया में था।

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

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