हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह

हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह

विलादत शरीफ

हज़रत अक़दस, साहिबे असरारो रुमूज़, पेशवाए औलिया, आली मकाम, फ़रीदे यगाना, वासिले बिल्लाह, सिराजुस सलीक़ीन, मशाइखे किबार में बे नज़ीर, हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! 21/ शआबनुल मुअज़्ज़म 453// हिजरी बरोज़ जुमेरात बा वक़्ते मगरिब आप की विलादत मुल्के उज़्बेकिस्तान, के शहर बुखारा, के क़स्बा “ज़न्दना” में हुई, और इसी क़स्बा “ज़न्दना” की मुनासिबत से ज़न्दनी कहलाते हैं।

इस्म शरीफ

आप अलैहिर रहमा का लक़ब नईयरुद्दीन! है, और आप अलैहिर रहमा,हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! के नाम से ज़ियादा मशहूर हैं।

कैफ़ियते नमाज़

हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी रहमतुल्लाह अलैह जब नमाज़ पढ़ते तो आप को हुज़ूरी हासिल होती थी, अगर कोई शख्स नमाज़ के दौरान आप को तकलीफ पहुँचाता, तो आप को मुतलक़ खबर नहीं होती एक रोज़ आप इसी तरह ज़िक्र में मशगूल थे के आप बिलकुल बेखुद हो गए लोगों ने पूछा या शैख़! आप नमाज़ के वक़्त बेखुद क्यों हो जाते हैं, आप ने फ़रमाया के आशिक ऐसा होना चाहिए के माशूक का नाम लिया जाए तो इसी किस्म का ज़ोक होना चाहिए वल्लाह आशिक माशूक का नाम लेते हुए, ऐसा मस्त व खुश होता के अगर सारे जहाँ की शराब इसे पिलाई जाए तो भी वैसा मस्त और खुश न होगा।

इबादतो रियाज़त

हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी रहमतुल्लाह अलैह इबादतो रियाज़त मुजाहिदा के उस्ताज़े कामिल थे, दुर्वेश हज़रात आप ही से मुजाहिदे की सनद लेते थे, आप साहिबे खुलको तवाज़ोह थे, और फ़क्ऱो फाका को दोस्त रखते थे, और दुनियादारों से नहीं मिलते थे, आप के घर में जिस दिन फाका होता उस दिन आप बहुत खुश होते, और इस के शुक्राने में सौ 100/ रकअत निफ़्ल नमाज़ अदा करते जब आप से इस का सबब पूछा गया, तो आप अलैहिर रहमा ने फ़रमाया के बेचारा हाजी शरीफ ज़नदनि! उस बारगाह से शर्मिंदा हैं, अगर मेरे बदन का हर एक बाल ज़बान बन जाए और सारी मखलूक की तादाद के मुवाफिक नमाज़ अदा करे, फिर भी इस दिन का शुक्रिया अदा नहीं हो सकता मेरी बड़ी खुशकिस्मती है के मुझे अल्लाह पाक फकीरों के ज़ुमरे में याद करता है, और दुरवेशी अता फरमाता है, मेरे घर में अगर फाका होता है, तो कोई ऐसी बात नहीं क्यों के में फाके ही के लाइक हूँ, जैसा के गुज़िश्ता अम्बिया अलैहिमुस्सलाम औलियाए किराम फ़क्ऱो फाका रखते थे, इसी लिए जब मेरे घर में फाका होता है तो में ख़ुशी में फूला नहीं समाता, आप अलैहिर रहमा बारगाहे इलाही में अर्ज़ करते के ऐ अल्लाह पाक मेरी मोत हालते फकीरी में हो, और मेरा हश्र भी फकीरों में हो।

फुकरा की इज़्ज़त

हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी रहमतुल्लाह अलैह के पास जब कोई आता तो आप इस कद्र उस की तअज़ीमों तक़रीम करते लोग हैरान रह जाते फकीरों, गरीबों, मिस्कीनों, की ख़ाक को अपने चेहरे और आँखों पर मलते और बारगाहे इलाही में अर्ज़ करते के परवरदिगार मुझको! फकीरों मिस्कीनों की खिदमत पर और फ़क्ऱो फाका पर साबित कदम रख।

गरीब की मदद करना

एक रोज़ एक फ़कीर जिस की सात बेटियां थीं, और उनकी अभी तक शादी नहीं नहीं हुई थी, आप अलैहिर रहमा की खिदमत में हाज़िर हुआ और तमाम हाल आप को बताया और आप अलैहिर रहमा, से मिन्नत समाजत की और अपनी मुफलिसी का हाल सुनाया, आप अलैहिर रहमा इस फ़कीर का हाल सुनकर रूए और फ़रमाया अल्लाह पाक ने तुझे फक्र की दौलत दी है, तुझे औलियाए किराम के ज़ुमरे में जगह मिल गई है, दुनिया में तो रंजो गम बर्दाश्त करना है, लेकिन क़यामत के दिन इंशा अल्लाह आराम पाओगे, और अपना मकसद पाओगे, और उस को खुशखबरी दी के क़यामत के रोज़ हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम के साथ जन्नतुल फिरदौस में जाओगे, उस ने अर्ज़ की या शैख़! में जिस मकसद से हाज़िर हुआ हूँ, आप इस पर भी नज़रे करम करें, ताके में अपनी सातों बेटियों की अच्छी तरह शादी कर दूँ, आप अलैहिर रहमा ने फ़रमाया तसल्ली रखो तू अब कल आना, वो फ़कीर जब चला गया तो रास्ते में उसे एक यहूदी मिला और उसने फ़कीर से पूछा के तू कहा गया था?

फ़कीर ने कहा में हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी रहमतुल्लाह अलैह के पास गया था, इस लिए के मेरी सात लड़कियां हैं, जिन की शादी करने के लिए मेरे पास रकम नहीं है, में शैख़! के पास गया था, ताके वो मुझे कुछ इनायत कर दें, तो में लड़कियों की शादी कर दूँ, उस यहूदी ने कहा हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी रहमतुल्लाह अलैह! तारिकुद दुनिया हैं, उन के पास तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा, फ़कीर आदमी हैं कोई दुनिया की चीज़ उन के पास नहीं है, शैख़! से कहो के वो मेरे उजरती गुलाम बन जाएं तो में तुम को सात हज़ार दीनार दूंगा, इस शर्त पर के वो सात साल तक मेरी इसी तरह खिदमत करें, जिस तरह में कहूँ, और सात साल बाद आज़ाद कर दूंगा, इस तरीके से तुम्हारी बेटियों की शादी हो सकती है, इस फ़कीर ने वापस जा कर पूरा माजरा आप अलैहिर रहमा की खिदमत में अर्ज़ किया, शैख़! ने इस बात को कबूल कर लिया, और फ़रमाया के सुब्हानल्लाह मेरी सात साल की मेहनत से तुम्हारा काम निकलता है, और तुम्हे आराम मिलता है, तो मुझे और क्या चाहिए, आप अलैहिर रहमा और वो फ़कीर दोनों इस यहूदी के घर गए और आप अलैहिर रहमा उस के उजरती गुलाम बन गए, और सात साल के लिए उस की खिदमत कबूल करली, और गुलामी का कागज़ लिखवा कर काज़िए वक़्त को दे दिया,

इस कागज़ में ये शर्त लिखी के अगर में ज़िंदह रहूँ तो सात साल तक तेरी खिदमत करूंगा, अगर क़ज़ाए इलाही से फौत हो गया, तो यही सात हज़ार दीनार मेरी खिदमत का मुआविज़ा होगा, यहूदी ने ये शर्त मंज़ूर करली, और आप अलैहिर रहमा सात हज़ार दीनार ले कर उस फ़कीर को दे दिए, उस फ़कीर ने ख़ुशी ख़ुशी अपनी बेटियों की शादी कर दी, यहूदी ने कहा के शैख़! तुम मेरे उजरती गुलाम हो और सात साल तक के लिए आप अलैहिर रहमा ने कागज़ लिखवा लिया है, जो काम तुम्हारे सुपुर्द करूँ वो आप को करना होगा, आप अलैहिर रहमा ने फ़रमाया के में आप की रज़ा मंदी के मुताबिक ही काम करूंगा, इस यहूदी ने कहा के तुम मेरे घर के दरवाज़े पर चौकीदारी करो, और पूरी रात जागते रहा करो ताके कोई चोर मेरे घर के नज़दीक नहीं आए, आप अलैहिर रहमा ने इस यहूदी के दरवाज़े की चौकीदारी कबूल करली,

ये खबर सारे शहर में मशहूर हो गई के हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी रहमतुल्लाह अलैह! फकीरों के ज़ुमरे से निकल कर एक यहूदी के चौकीदार बन गए, और सारी रात जागकर गुज़ारते हैं, जब ख़लीफ़ए वक़्त ने ये बात सुनी तो सात हज़ार दीनार सोने के और सात हज़ार दीनार चांदी के आप अलैहिर रहमा के पास भेजे और कहा के आप अलैहिर रहमा ये दीनार यहूदी को दे कर आज़ादी हासिल करो, आप ने वो तमाम दीनार फकीरों में तकसीम कर दिए और अपने आप को आज़ाद नहीं कराया तो यहूदी ने आप की खिदमत में अर्ज़ की के या शैख़! आप ने जो ये ज़िल्लत इख़्तियार की के फकीरों के ज़ूमरे से निकल कर तुम मेरे चौकीदार बने और रंजो मुसीबत में गिरफ्तार हो गए, आप को क्या मिला, आप अलैहिर रहमा ने फ़रमाया के तुम्हे क्या मालूम के आशिकों और अरिफों की इज़्ज़त तो ख्वारी ही में है, और वासिलों के मर्तबे में ज़ियादती गम उठाने से होती है, ऐ यहूदी सुन हम अल्लाह पाक को दोस्त रखते हैं, अल्लाह पाक फकीरों को दोस्त रखता है,

बस जो शख्स अल्लाह पाक को दोस्त रखता है वो पहले उस के दोस्तों को दोस्त रखता है, और उस की खिदमत बजा लाता है ताके अल्लाह पाक उस पर लुत्फ़ो करम की नज़रे करम करे और हमेशा उसे नेमत अता फरमाए इस लिए हम ने अपने फकीरों के साथ हैं, हम फकीरों के सदके अपना मतलूब हासिल करेंगे और महबूब का जमाल देखेंगे जिसे कोई नेमत हासिल हुई, उस की बदौलत हासिल हुई, जो बे नेमत हुआ, वो दिलों की शामत से हुआ जो किसी के दिल को दुखाता है वो अल्लाह पाक की नेमत से महरूम हो जाता है, यहूदी ने जब देखा के शैख़! अल्लाह पाक की मुहब्बत में मस्त हैं,और सब बेज़ार हैं, और फकीरों के गिरोह से निकल कर अपने रंजो गम और मुसीबत में डाला है, तो उस ने कहा या शैख़! आप जाईये आप मेरी तरफ से आज़ाद हैं, में ने आप को सात हज़ार दीनार अता किए, आप अलैहिर रहमा ने फ़रमाया के तूने हमे आज़ाद क्या है और अपनी खिदमत से खुलासी दी है, अल्लाह पाक तुझे दोज़ख की आग से बचाए, वो यहूदी फ़ौरन हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम पर ईमान ले आया और मुस्लमान हो गया, शैख़! ने आप अलैहिर रहमा की सुहबत इख़्तियार करली और मशहूर दुर्वेश हो गया और उस का दिल दुनिया से बेज़ार हो गया और अर्श से ले कर तह्तुस सरा, तक देखने लगा और साहिबे रियाज़तों मुजाहिदा और साहिबे मुशाहिदा हो गया।

खिलाफ़तो इजाज़त

आप अलैहिर रहमा हज़रत ख्वाजा शैख़ कुतबुद्दीन मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के दस्ते हक परस्त पर शरफ़े बैअत से मुशर्रफ हुए, और मुजाहिदे की तकमील के बाद, हज़रत ख्वाजा शैख़ कुतबुद्दीन मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह ने खिरकए खिलाफत अता किया, और आपने उस को ज़ेबेतन किया तो गैब से निदा आई के ऐ हाजी शरीफ! तुम्हे दुरवेशी का खिरका पहिनना मुबारक हो हमने तुम को बख्शा और अपनी बारगाह का महबूब बनाया, आप दुनियादार लोगों से बहुत कम मिलते थे, आप ने कभी किसी गनी को फ़कीर से ज़ियादा बुलंद मर्तबा नहीं दिया, और किसी दुनियादार को मजलिसे सदर में जगह नहीं देते अगर फ़कीर और गनी आप की मजलिस में आते तो आप फकीरों की तअज़ीम इस कद्र बजा लाते के तहरीर से बहार है,

नज़र कबूल नहीं की

एक दफा एक शख्स ने आप की खिदमत में कुछ नज़राना पेश किया आप अलैहिर रहमा ने फ़रमाया ऐ शख्स तुझे दुरवेशों के साथ क्या अदावत है, के दुश्मने खुदा हमारे पास लाया है, जब उस ने ज़ियादा इसरार किया तो आप अलैहिर रहमा ने फ़रमाया के हमे इस की ज़रुरत नहीं है, ये सहरा जंगल तुझे नज़र आ रहा है, ये सब ख़ज़ानाए गैब से भरा हुआ है, जब उस ने सहरा की तरफ नज़र की तो क्या देखता है के सोने की एक नहर चल रही है, ये देख कर वो बहुत शर्मिंदा हुआ उससे आप के मकसद ये था के वो फिर कभी दुरवेशों के हाल में दखल नहीं दे।

कदम बोसी की वजह से बख्शिश हो गई

सुल्तान संजर सल्जूकी को वफ़ात के बाद किसी ने ख्वाब में देखा के बताओ अल्लाह पाक ने तुम्हारे साथ क्या मुआमला किया, उसने कहा के में ने दुनिया में जो नेकी और बदी की थी वो मेरे सामने लाइ गई और दोज़ख के फरिश्तों को हुक्म दिया, के इसे दोज़ख में ले जाओ, इसी इसना में ये हुक्म मिला के फुला वक़्त जामा मस्जिद दमिश्क में इस ने हमारे बंदे हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी रहमतुल्लाह अलैह की कदम बोसी की थी इस वजह से हमने उसे बख्श दिया है।

विसाल

आप रहमतुल्लाह अलैह! का विसाल 3/ या 10/ रजाबुल मुरज्जब 612/ हिजरी को हुआ।

मज़ार

आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक: मुल्के उज़्बेकिस्तान, के शहर बुखारा, के क़स्बा “ज़न्दना” में मरजए खलाइक है, और कुछ लोग मुल्के हिंदुस्तान के सूबा उत्तरप्रदेश के शहर कन्नौज में भी बताते हैं, वल्लाहु आलम।

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

मिरातुल असरार
सीयरुल अक्ताब
ख़ज़ीनतुल असफिया
सवानेह शैखुल आलम
सफ़िनतुल औलिया,
सीयरुल औलिया
साबरी इंसाइकिलोपीडिया

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