कशफो करामात
खानए काबा का तवाफ़
क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं के सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहुअन्हु! हर साल अजमेर शरीफ से बा क़ुव्वते रूहानी मक्का शरीफ खानए काबा की ज़ियारत के लिए तशरीफ़ ले जाते थे, जब आप रदियल्लाहु अन्हु दरजए कमाल को पहुंच गए तो आप रदियल्लाहु अन्हु बा एक वक़्त अजमेर मुक़द्दस से अपने हुजरे में भी होते और मक्का मुअज़्ज़मा में हज्जो ज़ियारत भी अदा कर रहे होते थे, इस लिए के जो हाजी साहिबान हज को जाते थे और जो आप को पहचानने वाले होते थे वो वापस आ कर बताते थे के हम ने सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! को मक्का शरीफ में खानए काबा का तवाफ़ करते हुए देखा है, यानि अय्यामे हज में हर रोज़ सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! मक्का शरीफ में भी होते और अजमेर शरीफ में भी, एक साथ दोनों जगह आप का मौजूद होना सिवाए रूहानी तसर्रुफ़ के और क्या हो सकता है।
वो घोड़े से गिरकर मर गया
एक मर्तबा एक मुरीद ने सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की खिदमत में हाज़िर होकर अपनी परेशानी का इज़हार करते हुए कहा वालिए शहर मुझे शहर से बाहर निकालना चाहता है, उस हाकिम ने मखलूके खुदा को बहुत परेशान कर रखा है, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने पूछा इस वक़्त वो ज़ालिम कहाँ है? मुरीद ने अर्ज़ किया, अभी अभी सवार हो कर शिकार खेलने गया है, आप रदियल्लाहु अन्हु ने इरशाद फ़रमाया: वो घोड़े से गिरकर मर गया और खल्के खुदा को उससे निजात मिल गई, मुरीद मालूमात के लिए मैदान की तरफ गया, तो उस ने देखा के वालिए शहर वाकई घोड़े से गिर कर मरचुका है और मखलूके खुदा उस की लाश को चारों तरफ से घेरे हुए है।
मोत से रिहाई
एक शख्स को हाकिमे वक़्त ने बेकुसूर फांसी की सज़ा दिलवादी सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! वुज़ू कर रहे थे, के इस की माँ गिरया ओज़ारी करती हुई आप की खिदमत में हाज़िर हुई और अपने बेटे को बेकुसूर बताते हुए इंसाफ और रहम की भीक मांगने लगी, आप अपना असा मुबारक लेकर इस औरत के साथ चल दिए, सूफियों खादिमो और अहले शहर की एक जमात आप के साथ हो गई, मुल्ज़िम को फांसी दी जा चुकी थी, आप मकतूल के करीब पहुंचे और असा से उस की तरफ इशारा कर के फ़रमाया: ऐ मज़लूम! अगर तू बेकुसूर क़त्ल किया गया है, तो खुदा के हुक्म से ज़िंदह हो जा और दार से नीचे उतर आ, आप का ये फरमाना था के मकतूल ज़िंदा हो गया, और फांसी के फंदे से उतर कर आप के कदमो पर झुक गया और अपनी माँ के साथ अपने घर चला गया।
आग ना जला सकी
शहर बाग्दाद् शरीफ में सात आतिश परस्त मजूसी इबादतों रियाज़त मुजाहिदा में मशहूर थे, छेह छेह महीने बाद एक लुक्मा खाते थे इस लिए मखलूक उन की मोतक़िद थी, एक दिन सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की नज़र मुबारक उन पर पड़ी तो उन पर इस क़द्र हैबत तारी हुई के बैद की तरह कांपने लगे और आप के कदमो पर गिर गए, आप ने फ़रमाया के तुम लोग आग क्यों पूजते हो अल्लाह पाक को क्यों नहीं पूजते के तुम्हे तुम्हारी मंज़िले मक़सूद मिल जाती? उन्होंने कहा हम इस लिए आतिश परस्ती करते हैं के क़यामत के दिन आग हमे नहीं जलाए, आप ने फ़रमाया के आग की क्या मजाल के ख़ालिको मालिक की मर्ज़ी और उस के हुक्म के खिलाफ कुछ भी कर सके, ये फरमा कर आप ने अपनी पापोश यानि जूता आग में डाल दिया, जलना तो दरकिनार उस में दाग तक नहीं आया, ये करामात देख कर वो लोग सिद्क़ सच्चे दिल से ईमान ले आए, और आप की सुहबतो खिदमत में रहकर औलियाए कमिलीन में से हो गए।
भूके पर रहम
दमिश्क की जामा मस्जिद में हज़रत ख्वाजा उस्मान हारूनी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत शैख़ औहदुद्दीन किरमानी रहमतुल्लाह अलैह, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! और बहुत से दुर्वेश तशरीफ़ फरमा थे, तय ये हुआ के हर एक कोई ना कोई करामत दिखाए, हज़रत ख्वाजा उस्मान हारूनी रहमतुल्लाह अलैह ने अपने मुसल्ले के नीचे हाथ डाला और मुठी भर सोने के टुकड़े निकाल कर एक दुर्वेश को दिए के जा कर हलवा ले आओ, तमाम लोगों को खिलाया जाए, हज़रत शैख़ औहदुद्दीन किरमानी रहमतुल्लाह अलैह ने एक लकड़ी पर हाथ रखा तो वो सोना बन गई, हज़रत ख्वाजा उस्मान हारूनी रहमतुल्लाह अलैह, के बहुत इसरार पर सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने भी अपनी करामात दिखाई और वो ये के आप ने इल्मे कश्फ़ से मालूम कर लिया के इन तमाम दुरवेशों में एक बहुत ज़ियादा भूके हैं लेकिन शर्मो हया की वजह से वो किसी से इज़हार नहीं कर रहे हैं, चुनांचे आप ने अपने मुसल्ले के नीचे हाथ डाला और चार गरम गरम रोटियां निकाल कर इन की खिदमत में पेश कर दीं, इस पर सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने कहा: के जब तक दुर्वेश में इतनी कुव्वत न हो उसे दुर्वेश न कहना चाहिए।
छेह रोटियां
एक शख्स ने शैखुल इस्लाम हज़रत बाबा फरीदुद्दीन मसऊद गंजे शकर रहमतुल्लाह अलैह की खिदमत में अर्ज़ किया के हुज़ूर! में ने एक वक़्त ख्वाब देखा था के सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने मुझे छेह रोटियां इनायत फ़रमाई हैं, उस वक़्त से आज तक तकरीबन साठ साल का ज़माना हो गया मुझे वो वज़ीफ़ा बिला नागा मिलता रहा, हज़रत बाबा फरीदुद्दीन मसऊद गंजे शकर रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया के वो ख्वाब न था बल्के अल्लाह पाक का करम था के सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने तुझ पर महिर्बान फ़रमाई ताके तू गरीबी में मुब्तला न हो।
माँ के शिकम (पेट) से बच्चा बोलने लगा
क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह सुल्तान शमशुद्दीन अल्तमश अलैहिर रहमा के हाथ में हाथ डाले शाही किले की सेर फरमा रहे थे, वहां बहुत से उमरा अराकीने सल्तनत भी मौजूद थे के इतने में एक फाहिशा बदकार हामिला औरत ने हाज़िर हो कर बादशाह से फ़रमाया की खुदारा आप मेरा निकाह करा दीजिये में बड़े बड़े आज़ाब में हूँ, सुल्तान शमशुद्दीन अल्तमश! ने कहा के तेरा निकाह किस के साथ करा दूँ और तू क्यों अज़ाब में है? उसने निहायत गुस्ताखाना अंदाज़ में हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की तरफ इशारा करते हुए कहा, मेरे पेट में जो हमल है वो इन का बच्चा है, हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह शर्म से पसीना पसीना हो गए सुल्तान शमशुद्दीन अल्तमश और तमाम मुसाहिबीन पर सकता तारी हो गया, हज़रत कुतब अलैहिर रहमा! ने फ़ौरन अपने पीरो मुर्शिद हुज़ूर ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु की तरफ तवज्जुह की, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! उस वक़्त अजमेर शरीफ में रौनक अफ़रोज़ थे, क्या देखते हैं के सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! बा नफ़्से नफीस वहां मौजूद हैं और दीगर हाज़रीन ने बढ़कर कदम बोसी की,
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने हज़रत कुतब अलैहिर रहमा से पूछा के तुमने मुझे क्यों याद किया? आप कुछ नहीं बोल सके बल्के आँखों से आंसूं जारी हो गए, हज़रत कुतब अलैहिर रहमा सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! फरते मुहब्बत से तड़प उठे और फ़रमाया: ऐ बदकार हामिला तू खुद ही सुन, फिर औरत के शिकम की तरफ मुतवज्जेह हो कर फ़रमाया, ऐ पेट के बच्चे तू ही बता, तेरी माँ हज़रत कुतब अलैहिर रहमा को तेरा बाप बताती है क्या ये सच है? पेट से बच्चा बोलने लगा, बच्चे ने जवाब दिया हुज़ूर! ये बिलकुल गलत है, ये औरत बड़ी मक्कार और फाहिशा है में हर गिज़ हज़रत कुतब अलैहिर रहमा का बेटा नहीं हूँ, तब उस फाहिशा औरत ने ऐतिराफ़ किया के हज़रत कुतब अलैहिर रहमा के दुश्मनो ने उन पर इलज़ाम लगाने के लिए तय्यार कर के उसे भेजा था,
पत्थर का हाथी
अजमेर शरीफ में सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के क़याम के इब्तिदाई अय्याम में राजा पिरथवी राज या उस के कारिंदों ने एक दफा शरारत का मुज़ाहिरा करते हुए एक मस्त हाथी आप की तरफ दौड़ाया जूंही वो मस्त हाथी आप के करीब पंहुचा आप ने ज़मीन से थोड़ी सी ख़ाक उस हाथी की तरफ फेंकी अल्लाह पाक की कुदरत से वो हाथी पत्थर का हो गया।
काबा शरीफ दिखा दिया
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! जिस ज़माने में शहर समरकंद में मुकीम थे एक दिन हज़रत ख्वाजा अबुल लैस समरकंदी रहमतुल्लाह अलैह के मकान से मुत्तसिल मस्जिद पर एक शख्स ने ऐतिराज़ किया, के इस मस्जिद के क़िबला की समत सही नहीं है, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! भी उस मस्जिद में नमाज़ अदा फरमाते थे आप ने पहले तो उस शख्स को समझाया के इस की समत बिलकुल सही है, मगर वो इंकार करता रहा और अपनी बात पर अड़ा रहा फिर यकायक सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने उस की गर्दन पकड़ कर कहा देख सामने देख! उसने देखा तो काबा शरीफ उस की निगाहों के सामने था जिससे उसे यकीन हो गया के इस मस्जिद की समत क़िबला बिलकुल ठीक है,
दिल्ली का बादशाह
एक रोज़ सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! तशरीफ़ फरमा थे हज़रत शैख़ औहदुद्दीन किरमानी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत शैख़ शहाबुद्दीन सोहरवर्दी रहमतुल्लाह अलैह भी आप की खिदमत में हाज़िर थे, सुल्तान शमशुद्दीन अल्तमश का बचपन था वो आप के सामने से गुज़रा सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने सुल्तान शमशुद्दीन अल्तमश को देख कर फ़रमाया के ये लड़का “दिल्ली का बादशाह होगा” चुनांचे हज़रत! की पेशन गोई के मुताबिक सुल्तान शमशुद्दीन अल्तमश दिल्ली का बादशाह बना, और ये बादशाह फ़कीर सिफ़त दुर्वेश दोस्त, आलिम फ़ाज़िल, आदिल थे।
एक छोटी सी बछिया ने दूध देने का वाक़िआ
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने अनासागर के किनारे एक सायादार पेड़ के नीचे क़याम फ़रमाया और वहां एक गोवाला (मवेशियों को पलने वाला दूध दूने वाला) राजा की गाएं चरा रहा था, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने गोवाला से फ़रमाया “हमे दूध पिलाओ” गोवाला ने अर्ज़ किया महाराज ये राजा के गायों की बछिया है, इन में से कोई भी दूध नहीं देती, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने एक बछिया की तरफ इशारा करते हुए फ़रमाया, जा इस बछिया का दूध दूला, गोवाला बछिया के पास गया, बछिया के थानों पर हाथ फेरा, थन दूध से भर गया, आप रदियल्लाहु अन्हु! की बरकत से उस बछिया ने बहुत ज़ियादा दूध दिया, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने और आप के साथियों ने सेर होकर दूध पिया इस करामात को देख कर उस गोवाला ने उसी वक़्त इस्लाम कबूल कर लिया।
गाए ज़िंदा हो गई
आनासागर के करीब एक गरीब औरत रहा करती थी उस के पास एक गाए थी जिस का दूध बेच कर वो अपना गुज़ारा करती थी, इत्तिफाक से वो गाए मर गई औरत को बहुत अफ़सोस हुआ और वो रोने लगी, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! से इसकी अश्क बारी और आहोज़ारी ना देखि गई और अल्लाह पाक से दुआ की, आप की दुआ की बरकत से और अल्लाह पाक के फ़ज़्लो करम से अल्लाह पाक ने उस गाए को ज़िंदा कर दिया।
दरबारे ख्वाजा गरीब नवाज़ और एक वहाबी
मन्क़ूल: है के भागलपुर बिहार से एक साहब हर साल अजमेर शरीफ हाज़िर हुआ करते थे उन की एक वहाबी रईस से मुलाकात हो गई, उस ने कहा मियां हर साल कहाँ जाते हो बेकार इतना रूपया सर्फ़ (खर्च) करते हो, उन्होंने कहा चलो इंसाफ की आँख से खुद देख लो फिर तुम को इख़्तियार है, खेर एक साल वो साथ आया देखा के एक फ़कीर सोटा लिए हुए रोज़ाए मुबारक का तवाफ़ कर रहा है, और ये बार बार सदा लगा रहा है, ख्वाजा पांच रुपया लूँगा, एक घंटे के अंदर लूँगा और एक ही शख्स से लूँगा, इस वहाबी ने सोचा के अब बहुत वक़्त गुज़र गया और एक घंटा हो गया होगा, और अब तक उसे किसी ने कुछ भी नहीं दिया, जेब से पांच रूपये निकाल कर इन के हाथ पर रखे और कहा लो मियां! तुम ख्वाजा से मांग रहे हो भला ख्वाजा क्या देंगें लो हम देते हैं फ़कीर ने वो रूपये तो जेब में रखे और चक्कर लगा कर ज़ोर से कहा ख्वाजा तोरे बलहारी जाऊं दिलवाए भी तो कैसे खबीस मुनकिर से।
पान अता फरमाना
सय्यदुल औलिया हज़रत मीर सय्यद मुहम्मद तिर्मिज़ी सुम्मा कालपवी रहमतुल्लाह अलैह कादरी सिलसिले के मश्हूरो माअरूफ़ बुज़रुग हैं जिन का मज़ार शरीफ शहर कानपुर यूपी में है, हज़रत अल्लामा मीर गुलाम अली आज़ाद चिश्ती बिलगिरामी अलैहिर रहमा लिखते हैं के: हज़रत मीर सय्यद मुहम्मद तिर्मिज़ी सुम्मा कालपवी रहमतुल्लाह अलैह का मामूल था के हर साल नाइबुन नबी फिल हिन्द, अताये रसूल, सुल्तानुल हिन्द, ख्वाजाए ख्वाजगान, हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार शरीफ की ज़ियारत के लिए अजमेर शरीफ हाज़िर होते थे, एक बार आप आठ रोज़ तक अजमेर शरीफ में मुकीम रहे, एक रोज़ आप मज़ार शरीफ के रूबरू मुराकिबे में थे, यकायक आप पर कैफियत हुई और आप पर गुनूदगी ऊंग छा गई इसी आलम में सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! तशरीफ़ ले आए और आप को एक पान अता फ़रमाया, थोड़ी देर बाद जब ये कैफियत जाती रही तो आप ने देखा के पान आप के हाथ में मौजूद था, बारगाहे सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! में आप की महबूबियत का ये आलम था के जिस जगह भी आप चाहते रूहानी मुलाकात से मुशर्रफ हो जाते और फीयूज़ो बरकात से मुस्तफ़ीज़ होते।
ऊँट बैठे रह ग
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! जब अजमेर शरीफ पहुंचे तो आप ने आबादी से दूर एक दरख्त के नीचे क़याम फ़रमाया उस जगह पर अजमेर और दिल्ली के हुक्मरान राजा पिथोरा के ऊँट बांधे जाते थे राजा के मुलाज़िम जब रात के वक़्त ऊँट लेकर आए और एक दुर्वेश को उस जगह बैठे हुए देखा तो कहने लगे के ये जगह राजा के ऊँट बाँध के लिए है इस लिए आप यहाँ से उठ जाएं, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने फ़रमाया अच्छा हम यहाँ से उठ जाते हैं तुम शोक से ऊंटों को यहाँ पर बिठालो, चुनांचे आप ये फरमाने के बाद वहां से उठे और तालाब आनासागर के किनारे उस पहाड़ी पर तशरीफ़ ले गए जहाँ पर आज आप का चिल्ला मुबारक बना हुआ है, इस जगह पर बहुत से मंदिर भी थे, राजा के मुलज़िमींन से उस जगह पर ऊंटों को बिठा दिया सुबह के वक़्त जब सारबानो ने उन ऊंटों को वहां से उठाना चाहा तो वो ये देख कर हैरान हो गए के ऊँट तो वहां से उठने का नाम ही नहीं ले रहे हैं, उन्होंने काफी कोशिश की के ऊँट किसी तरह भी वहां से उठ जाएं मगर ऊंटों को मारा पीटा भी लेकिन फिर भी ऊँट वहीँ बैठे रहे, इधर उधर से राहगीर भी वहां इकठ्ठे हो गए थे और वो भी ये सारा मंज़र देख रहे थे, इन सारबानो में से किसी ने जा कर राजा से ये बात कह दी ये बात सुनकर राजा भी हैरान हुआ, और कुछ देर सोचने के बाद कहने लगा के अब इस का हल एक ही है के तुम लोग उस दुर्वेश की खिदमत में हाज़िर हो कर उन के कदमो में गिर कर माफ़ी मांगो, सारबान इस हुक्म की तामील में आप की खिदमत में हाज़िर हुए और आप के कदमो में गिरकर माफ़ी मांगी, आप ने उन की तरफ देखा और इरशाद फ़रमाया जाओ तुम्हारे ऊँट खड़े हो गए ये सुनते ही सारबान ने वापस आ कर मैदान में देखा के राजा के ऊँट खड़े हैं, इस बात की खबर पिरथवी राज को पहुंच गई, तो वो मज़ीद हैरान हो गया उस के बाद सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की शुहरत हर तरफ फ़ैल गई गया।
आनासागर का पानी खुश्क हो गया
अजमेर शरीफ में जब सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने आनासागर के किनारे डेरा लगाया तो हिंदूंओ ने बहुत न पसंद किया, आप रहमतुल्लाह अलैह के कुछ साथियों ने तालाब में नहाना चाहा य इस्तेमाल के लिए पानी लेना चाहा तो हिंदूंओ ने इनको पानी देने से मना कर दिया, इन लोगों ने आप रहमतुल्लाह अलैह से इन लोगों ने पूरा वाकिया अर्ज़ किया, आप रहमतुल्लाह अलैह ने एक मुरीद को अपना कूज़ा प्याला दे कर फ़रमाया के इसे आनासागर से भर लाओ, कहते हैं के जब उस ने प्याला तालाब में डाला तो आनासागर का सारा पानी उस प्याले में आ गया और तालाब खुश्क हो गया, बाज़ रिवायतों के मुताबिक अजमेर शरीफ के तमाम कुएं और तालाब खुश्क हो गए, और तमाम शहर में कुहराम मच गया, बिला आखिर कुछ लोग सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की खिदमत में हाज़िर हुए और आप से दुआ के लिए कहा के पानी के बगैर खल्के खुदा तड़प रही है, आप उसे जारी कर दें, आइंदा आप के साथियों पे कोई ज़ियादती नहीं की जाएगी, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने अपने मुरीद को हुक्म दिया के पानी का प्याला आनासागर में डाल दो, उस ने जूंही वो प्याला तालाब में डाला तालाब पहले की तरह लबालब बहने लगा और सारे शहर में पानी की फ़रावानी हो गई।
अज़्दवाजी ज़िन्दगी निकाह
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने दो निकाह किए एक बीवी का नाम असमतुल्लाह बीवी! था, और दूसरी का नाम बीवी उम्मतुल्लाह था, इन में कोन सी बीवी आप के निकाह में पहले आईं, इस के मुतअल्लिक़ भी मुअर्रिख़ीन के बयानात मुख्तलिफ हैं, बीबी असमतुल्लाह! हाकिमे अजमेर ख्वाजा वजीहुद्दीन मशहदी रहमतुल्लाह अलैह की साहबज़ादी थीं, कहा जाता है के ख्वाजा वजीहुद्दीन मशहदी रहमतुल्लाह अलैह के क़ुराबतदार और एक बा कमाल बुज़रुग थे उन्होंने ख्वाब में हज़रते सय्यदना इमाम जफ़र सादिक रदियल्लाहु अन्हु को देखा था के आप फरमाते हैं वजीहुद्दीन! हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम का मंशा है के तुम अपनी दुख्तर नेक अख्तर का अक़्द (निकाह) मुईनुद्दीन हसन! से कर दो, चुनांचे आप ने ख्वाब से बेदार हो कर अपनी साहबज़ादी का निकाह हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ से कर दिया,
हज़रत बीबी उम्मतुल्लाह! किसी हिन्दू राजा की लड़की थीं मुसलमानो ने एक किला फ़तेह किया तो असीराने जंग में ये भी थीं इन्हें सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के सुपुर्द कर दिया गया उन्होंने अपनी ख़ुशी से मज़हबे इस्लाम कबूल कर लिया तो सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने इन से निकाह कर लिया।
औलादे अमजाद
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की तीन औलादें हज़रत ख्वाजा फखरुद्दीन अबुल खेर, हज़रत ख्वाजा हुस्सामुद्दीन अबुल सालेह, और हज़रत बीबी हाफिज़ जमाल ताजुल मस्तूरात अलैहिमुर रहमा, तवल्लुद हुईं, और दूसरी ज़ौजाह (बीवी), बीबी असमतुल्लाह! से एक साहब ज़ादे हज़रत ख्वाजा ज़ियाउद्दीन अबू सईद अलैहिर रहमा तवल्लुद हुए।
हज़रत ख्वाजा फखरुद्दीन अलैहिर रहमा
हज़रत ख्वाजा फखरुद्दीन अलैहिर रहमा सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के खलफ़े अकबर हैं, आप की विलादत 591/ हिजरी में हुई, आप ने मौज़ा मांडल (जो अजमेर शरीफ से तीन मज़िल के फासले पर है) में बू दो बाश इख़्तियार फ़रमाई ज़राअत खेती कर के अकले हलाल से गुज़र औकात फरमाते थे, आप आली मरतबत बुज़रुग और साहिबे मक़ामे आलिया हैं उलूमे ज़ाहिरी व बातनी और कमालात से आरास्ता थे, आप की तारीखे शहादत 5/ शाबान है, मज़ार मुबारक क़स्बा सरवाड़ शरीफ में है, ये क़स्बा अजमेर शरीफ से तकरीबन 34/ मील के फासले पर इलाका किशन गढ़ में मौजूद है, आप के पांच साहब ज़ादे हुए, उन में से (1) हज़रत शैख़ हुसामुद्दीन सोख्ता, हर साल आप का उर्स 3/ शाबान से 6/ शाबान तक सरवाड़ शरीफ में होता है,
हज़रत ख्वाजा हुसामुद्दीन
हज़रत ख्वाजा हुसामुद्दीन अबू सालेह रहमतुल्लाह अलैह सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के दूसरे साहबज़ादे हैं, आप के मुतअल्लिक़ मुख्तलिफ रिवायात हैं बाज़ हज़रात कहते हैं के आप ने बा उम्र 45/ साल में खुर्द साली ही में अब्दालों की जमात में शामिल हो गए, आप का मज़ार मुबारक दरगाह हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ में लबे झालरा में वाके है।
हज़रत बीबी हाफ़िज़ा जमाल
ताजुल मस्तूरात हज़रत बीबी हाफ़िज़ा जमाल रहमतुल्लाह अलैहा का निकाह, हज़रत शैख़ रज़ियुद्दीन उर्फ़ अब्दुल्लाह रहमतुल्लाह अलैह, आप हज़रत शैख़ सूफी हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह के साहबज़ादे हैं, मौज़ा मंडल ज़िला नागौर शरीफ के साथ हुआ, आप के दो साहबज़ादे हुए मगर दोनों का बा हालते तिफ्ली इन्तिकाल हो गया, आप का मज़ार मुबारक सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के पाएं की जानिब मरजए खलाइक है, आप का उर्स शरीफ बा तारीख 17/ रजब को उर्स होता है, हज़रत बीबी हाफ़िज़ा जमाल रहमतुल्लाह अलैहा बड़ी आबिदा ज़ाहिदा खातून थीं,
हज़रत ख्वाजा ज़ियाउद्दीन
हज़रत ख्वाजा ज़ियाउद्दीन अबू सईद रहमतुल्लाह अलैह सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के छोटे साहब ज़ादे हैं, आप की पचास साल की उमर हुई आप के दो साहबज़ादे थे, आप का मज़ार शरीफ दरगाह हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ के इहाते में है, आप का उर्स शरीफ 13/ ज़िल हिज्जा को होता है।
आप के खुलफाए किराम
- क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी
- हज़रत ख्वाजा सूफी हमीदुद्दीन नागोरी
- हज़रत अब्दुल्लाह शाह
- हज़रत शैख़ अहमद काबुली
- हज़रत शैख़ मारूफ
- हज़रत शैख़ याकूब खान
- हज़रत शैख़ अहमद कहर
- हज़रत शैख़ सुफियान अहमद
- हज़रत शैख़ अब्दुल गफ्फार
- हज़रत शैख़ अज़ीज़ अहमद शाह
- हज़रत शैख़ फ़कीर मुहम्मद
- हज़रत शैख़ निज़ामुद्दीन खान तुर्क
- हज़रत शैख़ अकबर शाह
- हज़रत शैख़ अहमद कीवान असगर कंधारी
- हज़रत शैख़ अज़हर खान तुर्क रिदवानुल्लाही तआला अलैहिम अजमईन।
वफ़ात
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की उमर शरीफ और साले विसाल के मुतअल्लिक़ तज़किरा निगारों में ज़बरदस्त इख्तिलाफ पाया जाता है, उमर शरीफ किसी ने 104/ साल, किसी ने 100/ साल और किसी ने 97/ साल लिखी है, साले विसाल अक्सर तज़किरा निगारों 633/ हिजरी मुताबिक / 1235/ ईसवी को हुआ।
मज़ार मुबारक
आप का मज़ार शरीफ, सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह के अहाते में मरजए दस खलाइक है।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
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