विलादत शरीफ
यगानए रोज़गार, साहिबे असरार, मआदने अनवार, कुदवतुस सालिकीन, क़ुत्बुल इरशाद, मशाइखे किबार, हज़रत अक़दस, हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! 13/ शआबनुल मुअज़्ज़म 419// हिजरी बरोज़ जुमा बाद नमाज़े मगरिब आप की विलादत हुई,
इस्म मुबारक
आप अलैहिर रहमा का लक़ब कुतबुद्दीन! है, और आप अलैहिर रहमा, हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! के नाम से ज़ियादा मशहूर हैं।
वालिद माजिद
आप रहमतुल्लाह अलैह के वालिद माजिद का नाम मुबारक, हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती अलैहिर रहमा था।
आप की नज़रे विलायत
हज़रत ख्वाजा मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! का कौलो फेल शरीअत के ऐन मुताबिक था, आप अलैहिर रहमा उलूमे ज़ाहिरी व बातनी के पैकर थे, आप अलैहिर रहमा परवाज़ में मशहूर थे, आप अलैहिर रहमा अपने ज़माने के बड़े बड़े नामवर शीयूख आरिफो सालिको के सरदार और बारगाहे इलाही के मुकर्रब थे, आप अलैहिर रहमा अल्लाह पाक के गैर से हमेशा बेज़ार रहते थे, और आप अलैहिर रहमा के सीने में इश्के रसूल सलल्लाहु अलैहि वसल्लम कूट कूट कर भरा हुआ था, आप अलैहिर रहमा ने तीस साल तक सारी सारी रात जागते और ज़िक्रे खुदा, इबादतों रियाज़त करते रहते, बड़ी मशक्कतों के बाद अपने मकसद में कामयाब हुए जो शख्स आप अलैहिर रहमा के पास किसी भी हाजत के लिए आता वो अपने मकसद को पाकर जाता, आप अलैहिर रहमा साहिबे नेमत थे, जिस तरफ भी नज़ारे करम कर देते उस को साहिबे नेमत बना देते, आप अलैहिर रहमा की खानकाह में जो शख्स तीन रोज़ रहता उस की तमाम मुश्किलात ख़त्म हो जाती और वो वलिए कामिल बन जाता, उसे क़ुर्बे इलाही हासिल हो जाता जो शख्स आप का मुरीद होता पहले ही रोज़ उस की नज़र से हिजाब दूर हो जाता और अर्श से ले कर तह्तुस सरा, तक हर चीज़ देख लेता, इस लिए आप अलैहिर रहमा का हर मुरीद साहिबे नेमत अहले करामत होता था।
मकामो मनसब
हज़रत ख्वाजा मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! अज़ीम जय्यद आलिमे दीन थे, शरीअतो तरीकत, के उसूलों के पैकर थे, आप अलैहिर रहमा से कभी कोई कौल या फेल शरीअत के खिलाफ ज़हूर में नहीं आया, आप अगर कोई काम करना चाहते तो बारगाहे खुदा में अर्ज़ करते जो आवाज़ गैब से आती और जो जवाब मिलता, उसी पर अमल करते आप अलैहिर रहमा अपने वक़्त के तमाम दुरवेशों के सरदार थे, आप अलैहिर रहमा अपने ज़माने में ला सानी थे, आप अलैहिर रहमा का सानी दूर दूर तक नहीं था, तमाम दुर्वेश उस वक़्त इस अहिद से मुत्तफिक थे,
खिलाफ़तो इजाज़त
जब हज़रत ख्वाजा मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! के मुरीद हुए तो, हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! ने फ़रमाया के ऐ कुतबुद्दीन मौदूद! तुम को लाज़िम है के फक्र को इख़्तियार करो क्यों के दुरवेशी का काम फक्र ही से कुशादा होता है क्यों के दुर्वेश में जिस कद्र फक्र ज़ियादा होगा उसी क़द्र उसका रुतबा बुलंद होगा, आप अलैहिर रहमा, के पीरो मुर्शिद हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! ने 467/ हिजरी बा वक़्ते अस्र आप अलैहिर रहमा को खिरकए खिलाफत पहनाया, और फ़रमाया के ऐ कुतबुद्दीन चिश्ती! दुरवेशी का खिरका वो पहिनता है जो अहले रियाज़त हो उस का दिल हसद से पाक हो और तारीफो निदामत उस के नज़दीक बराबर हो, किसी की तारीफ करने से खुश ना हो, और किसी की मलामत करने से खफा न हो, हमेशा औरादो वज़ाइफ़ ज़िक्रे खुदा, इबादतों रियाज़त में मशगूल रहे, इस के बाद हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! ने आप को वो इस्मे आज़म! जो अपने मुर्शिद, हज़रत ख्वाजा मुहम्मद चिश्ती अलैहिर रहमा से आप ने सीखा था, वो आप को अता फ़रमाया, जैसे ही आप ने वो इस्मे आज़म! हिफ़्ज़ किया, इल्मे लदुन्नी के असरार आप पर खुल गए और जहाँ भर के इल्म आप को याद हो गए।
सीरतो ख़ासाइल
हज़रत ख्वाजा मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! का हर कौलो फेल शरीअते मुस्तफा सलल्लाहु अलैहि वसल्लम के ऐन मुताबिक था, आप अलैहिर रहमा इल्मे ज़ाहिरियो बातनी मुरस्सा और रूहानी परवाज़ में यदे तूला रखते थे, आप अलैहिर रहमा ने सात साल की उमर में कुरआन शरीफ हिफ़्ज़ कर लिया था, हमेशा फुकरा और मसाकीन के साथ प्यारो मुहब्बत से पेश आते तमाम उमर कभी नया कपड़ा नहीं पहना, आप अलैहिर रहमा को कशफ़ुल कुबूर कशफ़ुल क़ुलूब और कशफ़ुल अरवाह पर काफी उबूर हासिल था, जिस शख्स की कब्र से गुज़रते उसका पूरा हाल बयान कर देते थे, आप अलैहिर रहमा के इल्म की ये कैफियत थी के पंदिरा 15/ साल की उमर में आप अलैहिर रहमा ने किताब मिनहाजुल आबिदीन, लिख दी थी, जिस में आप अलैहिर रहमा ने मशाइख़ीने इज़ाम का मसलक बयान फ़रमाया है, इसके अलावा भी आप अलैहिर रहमा ने किताबें लिखीं हैं, आप अलैहिर रहमा के मुजाहिदे का ये हाल था के पांच या छेह रोज़ के बाद इफ्तार करते थे, शब् बेदारी का ये आलम था के आप अलैहिर रहमा ने मुसलसल तीस साल तक नहीं सोये, आप की खसलतो आदत इतनी अज़ीम थी के बयान से बाहर है, जो शख्स आप अलैहिर रहमा की खिदमत में हाज़िर होता था जिस चीज़ से वो खुश होता था, आप अता फरमा देते थे, आप की खिदमत में जो शख्स हाज़िर होता ख़्वाह वो छोटा हो या बड़ा आप पहले उस को सलाम करते थे, और खड़े हो कर उस की तअज़ीम करते थे, हत्ता के अपने खादिमो और गुलामो से भी इसी तरह से पेश आते थे, तमाम उमर एक ही लिबास ज़ेबेतन किए रहते थे, जब कपड़ा कहीं से फट जाता तो आप उस पर पेबंद लगा लेते थे।
ज़ियारते खाना काबा
हज़रत ख्वाजा मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! के दिल में जब कभी काबा शरीफ की ज़ियारत और तवाफ़ की ख्वाइश पैदा होती तो आप अलैहिर रहमा आने वाहिद में पहुंच जाते थे, और हज के मौके पर हज अदा फरमा कर वापस तशरीफ़ ले आते थे, बाज़ औकात जब आप के दिल में मलाल पैदा होता तो अल्लाह पाक के हुक्म से फ़रिश्ते खानए काबा को आप के सामने कर देते और आप अलैहिर रहमा तवाफ़ और मनासिके हज अदा करते थे, उस के बाद वो काबातुल्लाह को अपने मक़ाम पर वापस ले जाते थे।
दरिया पार कर गए
हज़रत ख्वाजा मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! के बचपन और तालीम का ज़माना था, के आप अलैहिर रहमा अपने वालिद माजिद के मदरसे की जानिब तशरीफ़ ले जा रहे थे बहार का मौसम था और दरिया में भी सैलाब आया हुआ था, और पानी इस क़द्र बह रहा था के पत्थर भी उड़ उड़ कर दूर गिर रहे थे, पानी की तेज़ी की वजह से किसी भी शख्स को हिम्मत नहीं हो रही थी, के पानी में से गुज़र सके या इस के अंदर पाओ रख सके, आप अलैहिर रहमा ने जैसा की बच्चों की आदत होती है मज़ाक से फ़रमाया के में इस पानी से गुज़र जाऊँगा, लोगों ने कहा के अगर आप इस तूफानी पानी से गुज़र जाएं तो हम सब आप के मुरीद हो जाएंगे, और आप की विलायत का इकरार करलेंगें, आप अलैहिर रहमा ने जूता भी नहीं उतारा, और बिजली की तरह आने वाहिद में पानी से गुज़र गए और फिर वापस आ गए लेकिन आप का जूता भी पानी में नहीं उतारा, ये देख कर उसी वक़्त दो सौ आदमी आप के हाथ पर बैअत हो गए।
ग़ैब से मिठाई अता करना
एक दिन आप अलैहिर रहमा मदरसे में ही थे कहित साली सूखा का ज़माना था अवाम सख्त मुसीबत में गिरफ्तार थी, मदरसे के लड़कों और असतिज़ा ने मिल कर आप की खिदमत में इल्तिजा की खुदा वनदे करीम से दुआ मांगी गुरबा मसाकीन को नेमत से नवाज़ें आपने अपनी जेब में हाथ डाला और लोगो की तरफ इस क़द्र मिठाई फेकि के उठाने वाले आजिज़ आ गए, लेकिन इस में कोई कमी नहीं आई, लोगों के अंदर मिठाई की वाफिर मिक़्दार पर इतना जोशो खरोश पैदा हुआ के फसाद पैदा हो गया, जिस की वजह से आप ने मिठाई लुटाना बंद कर दिया, ये देख कर बहुत से हाज़रीन आप के दस्ते हक परस्त पर शरफ़े बैअत से मुशर्रफ हो गए, जब आप के वालिद माजिद रहमतुल्लाह अलैह को इस वाकिए की इत्तिला मिली तो उन्होंने आप को तलब फरमा कर आगाह किया, के इन बातों से परहेज़ करो, इस लिए के हमे मशाइख की करामात ज़ाहिर नहीं करते बल्कि पोशीदह रखते हैं तुम क्यों शुहरत दे रहे हो, ऐसा ना हो कल क़यामत के दिन ख्वाजगान के सामने शर्मिंदाह होना पड़े, आप अलैहिर रहमा के वालिद माजिद फरमाते थे के ये बच्चा एक दिन कमालात का मालिक और क़ुत्बुल अक्ताब बन जाएगा बिला आखिर वही हुआ, जो वालिद माजिद ने फ़रमाया था।
दरिया पार कर गए
इल्मे दीन हासिल करने के लिए जब हज़रत ख्वाजा मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! शहर बुखारा! तशरीफ़ ले जा रहे थे, जब दरिया के उस किनारे पहुंचे जो बल्ख, शहर बुखारा के दरमियान है तो आप ने देखा के मल्लाह लोगों से उजरत वुसूल कर रहे हैं, आप अलैहिर रहमा ने अपने मुरीदीन आशिक़ीन से कुछ देर कश्ती का इन्तिज़ार किया जब कश्ती नहीं आई तो बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़ कर घोड़े पर सवार हुए और अपने साथियों को इशारा किया के मेरे पीछे चले आओ, ये कहकर घोडा दरिया में डाल दिया, और थोड़ी ही देर में दरिया से पार हो कर किनारे पर पहुंच गए, आप अलैहिर रहमा के मुरीदीन मुहिब्बीन दरिया के पानी पर इस तरह चल रहे थे के गोया ज़मीन पर चल रहे हैं, इस सफर में किसी का पाओ तक नहीं भीगा, ये देख कर तमाम लोग आप की खिदमत में हाज़िर हो कर आदाब बजा लाए।
मोमिन की फिरासत से बचो
नक्शबंदियों के अज़ीम रूहानी पेशवा हज़रत ख्वाजा अब्दुल खालिक गुजदवानी रहमतुल्लाह अलैह! से नकल है के एक मर्तबा आप के यहाँ आशूरा यानि दस मुहर्रमुल हराम के दिन खलकत (लोगों) का हुजूम था, और आप रहमतुल्लाह अलैह! मारफअतो सुलूक के राज़ो रुमूज़ बता रहे थे, के अचानक एक नो जवान परहेज़गारों जैसी सूरत बनाए खिरका पहने मुसल्ला कंधे पर रखे हुआ आया और एक कोने में बैठ गया, आप रहमतुल्लाह अलैह ने उससे पूछा क्या पूछना चाहते हो, वो जवान उठ कर खड़ा हुआ और कहने लगा के हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम की हदीस शरीफ है, “मोमिन की फिरासत से डरो इस लिए के वो अल्लाह के नूर से देखता है, इस हदीस पाक का मतलब क्या है, आप अलैहिर रहमा ने फ़रमाया के इस हदीस पाक का मतलब ये है के तुम ज़ुन्नार उतार कर फेंक दो और अल्लाह पाक की वहदानियत पर ईमान ले आओ, और मुस्लमान हो जाओ, उस ने कहा नऊजू बिल्लाह में कोई ज़ुन्नार नहीं पहिनता, आप अलैहिर रहमा ने अपने खादिम से कहा इस का कुरता उतारो, जब कुरता उतरा गया, तो अंदर से ज़ुन्नार निकला जिससे वो बहुत शर्मिंदाह हुआ और हाए हाए कर के रोने लगा उस के बाद वो उठ कर आप अलैहिर रहमा के कदमो पर गिर गया और कलमा शरीफ पढ़ कर मुस्लमान हो गया।
विसाल
जब आप रहमतुल्लाह अलैह! का विसाल 1/ रजाबुल मुरज्जब 537/ हिजरी या बा इख्तिलाफ रिवायत 527/ हिजरी बरोज़ जुमा सुल्तान मुइज़्ज़ुद्दीन संजर बिन, सुल्तान मालिक शाह सल्जूकी बिन, सुल्तान अलिप अरसलान जो अरतुगरल बेग का भतीजा था, इस के दौरे हुकूमत में हुआ,
मज़ार
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक: मुल्के अफगानिस्तान के सूबा हिरात, के क़स्बा चिश्त में मरजए खलाइक है,
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
मिरातुल असरार
सीयरुल अक्ताब
ख़ज़ीनतुल असफिया
सवानेह शैखुल आलम
सफ़िनतुल औलिया,
सीयरुल औलिया
साबरी इंसाइकिलोपीडिया

