हज़रत ख्वाजा सूफी हमीदुद्दीन नागोरी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह

हज़रत ख्वाजा सूफी हमीदुद्दीन नागोरी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह

नामो नसब

आप रहमतुल्लाह अलैह! नाम “मुहम्मद इबने अहमद इबने मुहम्मद” अलैहिमुर रहमा, है, कुदवतुस सालिकीन, बुरहानुल आशिक़ीन, इमामुल वासलीन, महबूबे ज़ाते इलाह, पनाहे अहले यकीन, सुल्तानुत तारीक़ीन, हाफिज़े कुरआन, आलिमे दीन, सुआली, सूफी, सईदी, नागोरी, “मुसन्निफ़ इन्साइक्लोपीडिया औलियाए किराम” ने आप का इसमें गिरामी “हमीदुद्दीन” है, और आप रहमतुल्लाह अलैह! “सुल्तानुत तारीक़ीन सूफी हमीदुद्दीन नागोरी” के नाम से मश्हूरो मअरूफ़ हैं,

विलादत शरीफ

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! सईद बिन उमर कुरैशी की औलाद में से हैं, जो अमीरुल मोमिनीन ख़लीफ़तुल मुस्लिमीन हज़रते सय्यदना उमर फ़ारूके आज़म रदियल्लाहु अन्हु के चचा ज़ाद भाई और बहनोई थे, और अशरए मुबश्शाराह (अशरए मुबश्शाराह ये वो 10/ सहाबए किराम रदियल्लाहु अन्हुम हैं जिन को हमारे प्यारे आका हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम ने दुनिया ही में जन्नती होने की बशारत खुशखबरी दी थी) में से थे, आप रहमतुल्लाह अलैह! का शुमार हिंदुस्तान के मुताक़द्दिमीन औलियाए किराम बुज़ुर्गाने दीन में होता है, हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! के वालिद माजिद! सुल्तान मुइज़्ज़ुद्दीन उर्फ़, सुल्तान शहाबुद्दीन गोरी के साथ हिंदुस्तान तशरीफ़ लाए, हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! फरमाते हैं के सब से पहला बच्चा जो दिल्ली फ़तेह होने के बाद एक मुस्लमान के घर में पैदा हुआ वो में ही हूँ, क्यों के नाइबुन नबी फिल हिन्द, अताये रसूल। सुल्तानुल हिन्द, हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की बशारत पर सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद गोरी ने 1129/ ईसवी में राजा पिरथवी राज को शिकस्त देकर जब दिल्ली पर अपनी फ़तेह का परचम लहराया उस के बाद मुस्लिम घरानो में जो बच्चा सब से पहले पैदा हुआ वो “सूफी हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह थे, आप रहमतुल्लाह अलैह! की विलादत 570/ या 589/ हिजरी मुताबिक 1174/ ईसवी में हुई।

तालीमों तरबियत

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! अपनी अय्यामे तफूलियत (बचपन) के सातवें साल में “हाफिज़े कुरआन मजीद” बन गए थे, आप रहमतुल्लाह अलैह! के वालिदैन ने ज़ेवरे इल्म से मुज़य्यन करने और रूहानियत के हुसूल के लिए एक ऐसी हस्ती को चुना, जो शहंशाहे विलायत नाइबुन नबी फिल हिन्द, सुल्तानुल हिन्द, ख्वाजाए, ख्वाजगान, हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह के नाम से जाने जाते हैं, जिस दिन आप ने अजमेर शरीफ का सफर किया हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह ने इरशाद फ़रमाया के आज मेरा एक दोस्त दिल्ली से आ रहा है, और आप खुद हाज़रीन के साथ इस्तकबाल के लिए तशरीफ़ ले गए, हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! ने हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह को देखते ही पहचान लिया घोड़े से उतर कर बा अदब सलाम अर्ज़ किया, फिर क्या था रूहानी उस्ताज़ ने अपने शागिर्द को गले लगा लिया और खानकाह शरीफ में ला कर इबादतों रियाज़त में मशगूल कर दिया, फिर विलायत का ये दुर्रे नायाब (ख्वाजा सूफी हमीदुद्दीन नागोरी) अपनी रूहानियत में आला मकाम को पंहुचा, अल्हासिल ये आप की ज़ात को परवान चढ़ाने और रूहानियत में बा कमाल बनाने वाली शख़्सीयत, हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, की है।

आप के असातिज़ाए किराम

हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती
हज़रत शैख़ हमीदुद्दीन खुई
हज़रत शमशुद्दीन हलवाई रिदवानुल्लह तआला अलैहिम अजमईन।

आप का इल्मी मकाम

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! अपने ज़माने के फ़ाज़िले अजल, और आलिमे बे बद्ल थे, आप रहमतुल्लाह अलैह! को अरबी, फ़ारसी, हिंदी, तीनो ज़बानो पर बड़ी कुदरत हासिल थी, कुरआन शरीफ और अहादीस पर बड़ी गहरी नज़र रखते थे औलियाए किराम बुज़ुर्गाने दीन की तसानीफ़ पर पूरी दस्तरस महारत हासिल थी, आप रहमतुल्लाह अलैह! खुद अपनी तसानीफ़ में जगह जगह आयाते क़ुरआनी, अहादीसे रसूल, और अक़्वाले मशाइखींन नक़ल किए हैं, आप रहमतुल्लाह अलैह! अपने मुरीदीन को हज़रते इमाम ग़ज़ाली रदियल्लाहु अन्हु की किताब “कीमियाए सआदत” मुताले के लिए ख़ास तौर पर हुक्म देते थे, हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! ने इल्मे हदीस को इल्मे तसव्वुफ़ पर हमेशा मुकद्दम समझा और इस की तब्लीग में अपनी ज़िन्दगी का बेश्तर हिस्सा को सर्फ़ किया, आप ने अपने मुरीदीन से यूं फ़रमाया: मुझे यहाँ मशग़ूलियत है के आज कल नागौर के लोग मुझ से इल्मे हदीस सुनते हैं मुझे फुर्सत नहीं के इस दौरान तुझे इल्मे तसव्वुफ़ सिखाऊं।

आप की सीरतो ख़ासाइल

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! के पास आने वाला किसी भी मज़हबो मिल्लत व नस्ल से तअल्लुक़ रखता हो आप की ज़ात से अपनी हस्बे मंशा तसकीनो तसल्ली हासिल करता था, ये तालीम आप की ज़ात का जुज़्वे लायनफ़क थी, जो के मसावात का बेहतरीन नमूना है आप हर एक इंसान के साथ बड़े अख़लाक़ से पेश आया करते थे और फरमाते थे के जिस शख्स के जितने बुलंद अख़लाक़ होंगे वो इतना ही अल्लाह पाक के नज़दीन पाए का सूफी होगा, अदमे तशद्दुद! ये भी आप की ज़िन्दगी का ख़ास हिस्सा रहा है,

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! सादा रिहाइश और आला अफ़कार के मिस्दाक़ थे, आप गुदड़ी पहना करते थे, फुतूह नज़राना वगेरा कबूल नहीं करते थे, आप रहमतुल्लाह अलैह! ने सिफ़ाते बशरी तर्क कर के आला रूहानी मर्तबा हासिल किया था, आप रहमतुल्लाह अलैह! के पीरो मुर्शिद सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! आप से बहुत खुश थे, हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह ने आप को “सुल्तानुत तारीक़ीन” के गिरां क़द्र लक़ब से सरफ़र्ज़ किया था, आप को फना फिल्लाह का दर्जा हासिल था, आप हमा वक़्त इबादतों रियाज़त और मुजाहिदए नफ़्स में गुरता था, बेश्तर वक़्त आप हालते इस्तग राक में गुज़ारते और ऑंखें बंद रखते थे, आप हमेशा ख़ौफ़े खुदा से कांपते रहते थे, और रोते रहते थे, अपना ज़्यादातर वक़्त जंगलों बयबानो और गैर आबाद मकाम में गुज़ारते थे, आप को नामो नमूद शुहरत से बहुत दूर रहते थे, आप मुतहम्मिल मिजाज़ संजीदा तबअ खुश अख़लाक़ कलीलुत ताआम और साईमुद दहर कयामुल लेल थे, आप रहमतुल्लाह अलैह! अपने मुर्शिदे करीम की खिदमत में रह कर हमा वक़्त ज़िक्रे इलाही में मशगूल रहते और एक लम्हा भी ज़ाए नहीं करते थे।

आप की तसनीफ़ात

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! ने अपनी हयाते तय्यबा में मुतअद्दिद किताबें लिखीं, चंद क़ुतुब के अस्मा ये हैं: “उसूलुत तरीकत” ये आप रहमतुल्लाह अलैह! की सब से मशहूर तसनीफ है इस में एक जगह आप लिखते हैं मरातिबे राह का पहला मर्तबा इल्म, है और दूसरा मर्तबा अमल, तीसरा मर्तबा नियत, चौथा मर्तबा सिद्क़, है, पांचवा मर्तबा इश्क, है, और छटा मर्तबा तवज्जुह है, सातवां मर्तबा राहे सुलूक है, अथवा मर्तबा हुज़ूरी है, “रिसालतुल इश्क” इस रिसाले में इश्क की नकाब कुशाई की गई है बगैर इश्क के तमाम अमल बेसूद ला हासिल है, “रिसालतुस सुलूक” रिसालतुस सिमआ” रिसालए चार मंज़िल” वगेरा आप की तसनीफ़ात हैं।

मुजाहिदए नफ़्स

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! की मजलिस में दुनिया का बिलकुल ज़िक्र नहीं होता था आप खुदा और रसूल का ज़िक्र फ़रमाया करते थे, हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! उसरतो तंगी में बसर करते मगर इस फ़क्ऱो फाका को अपने लिए बाइसे फख्र समझते थे आप की मजलिस में जाहो चश्म मालो मताआ दुनिया का ज़िक्र तक नहीं होता था, अल्लाह पाक ने ये तौफीक आप को अता फ़रमाई थी के आप ऐसे फारिग मनद दुनिया हो गए थे।

आप का शजरए तरीकत

(2) सय्यदुल मुरसलीन हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम
(3) हज़रते सय्यदना अमीरुल मोमिनीन ख़लीफ़ए चहारुम मौलाना अली शेरे खुदा
1. हज़रत सय्यदना ख्वाजा हसन बसरी
2. हज़रत शैख़ अब्दुल वाहिद बिन ज़ैद
3. हज़रत अल्लामा ख्वाजा फ़ुज़ैल बिन अयाज़
4. हज़रत ख्वाजा सुल्तान इबराहीम इबने अदहम
5. हज़रत ख्वाजा हुज़ैफ़ा मरअशी
6. हज़रत ख्वाजा हुबैरा बसरी
7. हज़रत ख्वाजा शैख़ मुम्शाद उलू दिनोरी चिश्ती
8. हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू इसहाक शामी चिश्ती
9. हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू अहमद अब्दाल चिश्ती
10. हज़रत ख्वाजा अबू मुहम्मद चिश्ती
11. हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती
12. हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन मौदूद चिश्ती
13. हज़रत ख्वाजा हाजी शरीफ ज़न्दनी चिश्ती
14. हज़रत ख्वाजा उस्मान हारूनी चिश्ती
15. हज़रत सय्यदना ख्वाजा गरीब नवाज़ मोईनुद्दीन चिश्ती
16. सुल्तानुत तारीक़ीन हज़रत ख्वाजा सूफी हमीदुद्दीन नागोरी रिदवानुल्लह तआला अलैहिम अजमईन।

बैअतो खिलाफत

हज़रत सय्यदना ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह! ने 22/ शअबान को हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! को बैअतो खिलाफत मुरीदी से नवाज़ा, हज़रत सय्यदना ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैह का इरशाद है के मेरे मुरीदीन में से खासुल ख़ास तीन मुरीद हैं, (1) हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह!, क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत शैख़ अब्दुल्लाह बयाबानी रहमतुल्लाह अलैह हैं।

ज़ौजाह मुहतरमा (बीवी)

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! की ज़ौजाह मुहतरमा (बीवी) का इस्म खदीजा था, शैख़ जमालुद्दीन फरमाते हैं के हज़रत बीबी खदीजा हुसैनी सय्यदह थीं, अपने ज़माने की निहायत बुज़ुर्गवार, सालेह, नेक और पाक बाज़ खातून थीं, हज़रत बीबी खदीजा के बतन से दो साहब ज़ादे और एक साहबज़ादी तवल्लुद हुए, साहबज़ादी का नाम मालूम नहीं हो सका, साहबज़ादे का नाम ये है, (1) शैख़ अज़ीज़ुद्दीन, (2) शैख़ नजीबुद्दीन,

करामत

मन्क़ूल: है के शहर नागौर में एक ताजिर था जो हर साल तेल लेकर शहर मुल्तान की मंडी में जाता और वहां से रोटी ले कर नागौर आता था, वो हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! के खुतूत हज़रत शैख़ बहाउद्दीन ज़करिया मुल्तानी रहमतुल्लाह अलैह के नाम से ले जाता और उन के जवाब ला कर आप रहमतुल्लाह अलैह! को दिया करता था, एक मर्तबा हज़रत शैख़ बहाउद्दीन ज़करिया मुल्तानी रहमतुल्लाह अलैह ने किसी ताजिर के साथ दो थैले सोने चांदी से पुर कर के आप की खिदमत में भेजे और उसे कबूल करने के दरखस्त भी की आप ने उस ताजिर से फ़रमाया के ये ज़र व जवाहर गेनादी तालाब में डाल दो ताके गरीबों और मिस्कीनों के काम आ जाए और हमारी तरफ से इसी मैदान के संगरेज़े भर कर ले जाओ और शैखुल इस्लाम! की खिदमत में तोहफा पेश कर दो, मुल्तान पहुंचने पर वो संगरेज़े हीरे जवाहिरात बन गए ये देख कर ताजिर रह गया।

आप के खुलफाए किराम

हज़रत ख्वाजा हमीदुद्दीन नागोरी रहमतुल्लाह अलैह! के साहबज़ादे हज़रत शैख़ अब्दुल अज़ीज़ रहमतुल्लाह अलैह के पोते हज़रत शैख़ फरीदुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, को अपना जानशीन बनाया, और आप के मुरीदो खलीफा हैं, हज़रत शैख़ ज़ियाउद्दीन नख्शबी बदायूनी रहमतुल्लाह अलैह।

वफ़ात

29/ रबीउल आखिर 673/ हिजरी मुताबिक 1274/ ईसवी को सुल्तान गियासुद्दीन बलबन के अहिदे हुकूमत में हुआ :

मज़ार शरीफ

आप रहमतुल्लाह अलैह! का मज़ार शरीफ सूबा राजिस्थान के शहर नागौर शरीफ इंडिया में मरजए खलाइक है।

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

  • मिरातुल असरार
  • सूफ़ियाए किराम और दावते दीन
  • तज़किराए औलियाए हिंदो पाक
  • इनसाइक्लोपीडिया औलियाए किराम
  • चिश्ती खानकाहें और सरबराहाने बर्रै सगीर
  • ख़ज़ीनतुल असफिया

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