हज़रत शैख़ हसन बूदला देहलवी रहमतुल्लाह अलैह
आप रहमतुल्लाह अलैह दिल्ली के एक पुराने मालदार के बेटे थे, बचपन ही से मजज़ूब थे, दुनिया के तौर तरीके रंगीनी का कोई होश नहीं था, आप की जीबो गरीब हालत थी, आप अक्सर औकात बिलकुल नग्गे रहते, रूपया पैसा, और कपड़े और जो कुछ आप को नज़र में मिलता वो सब हाज़रीन में तकसीम फरमा दिया करते थे, इस हालत के बावजूद आप की ज़ाहिरी सूरत ये थी के महफ़िलों में शरीक होते और लोगों से गुफ्तुगू करते, बाज़ उल्माए किराम ने ख्वाब में देखा के हज़रत शैख़ हसन बूदला देहलवी रहमतुल्लाह अलैह दरबारे रिसालते मआब हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम में हाज़िर हैं, और वुज़ू करा रहे हैं और बाज़ लोगों ने बयान किया के हम ने ज़रत शैख़ हसन बूदला देहलवी रहमतुल्लाह अलैह को मक्का मुकर्रमा में देखा, हालांके वो दिल्ली में मौजूद थे।
वफ़ात
आप रहमतुल्लाह अलैह ने तकरीबन 964/ हिजरी में वफ़ात पाई।
मज़ार
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, पुराने किला के पास था, हज़रत शैख़ अब्दुल हक मुहद्दिसे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह तहरीर फरमाते हैं के आप का मज़ार दिल्ली बाज़ार में ख्वास खान, के मकबरे के पास है, मगर हम को वो जगह नहीं मिली।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

