बैअतो खिलाफत
हज़रत शैख़ निज़ामुद्दीन शीराज़ी चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ज़ाहिरो बातिन के ऐतिबार से उम्दा सिफ़ात और बुलंद औसाफ़ के मालिक थे, और राहे सुलूक और सूफ़ियत का अच्छा इल्म रखते थे, अगर कोई आलिमाना बाहिस होती तो निहायत उम्दगी से इस मसले को सुलझाते थे, तक़रीर करने और दलील में आप दूसरों से मुमताज़ थे, आप हरमैन शरीफ़ैन ज़ादा हल्लाहु शरफऊं व तअज़ीमाकी ज़ियारत से भी शरफ़ हासिल किया था, हज़रत शैख़ निज़ामुद्दीन शीराज़ी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, सुल्तानुल मशाइख सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के आला मुरीदों और बड़े दोस्तों में होता था और हज़रत! की बारगाह में आप रहमतुल्लाह अलैह बेहद मकबूल और नज़रों में मलहूज़ो महफूज़ थे,
वफ़ात
आप रहमतुल्लाह अलैह ने अलाउद्दीन खिलजी के दौरे हुकूमत में 718/ हिजरी मुताबिक 1318/ ईसवी में वफ़ात पाई।
मज़ार शरीफ
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक,खरेड़ा गाऊं जिस को अब खेल गाऊं बोलते हैं, मालविये नगर दिल्ली 17/ में था, मगर अफ़सोस हम को नहीं मिला।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

