विलादत
आप की पैदाइश 897/ हिजरी में हुई।
बैअतो खिलाफत
आप रहमतुल्लाह अलैह हज़रत आगा मुहम्मद तुर्क बुखारी की औलाद में से शैख़ सअदुल्लाह के साहबज़ादे हैं, यानि मुजद्दिदे वक़्त हज़रत शैख़ अब्दुल हक मुहद्दिसे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के बड़े चचा जान हैं, आप के पीरो मुर्शिद का नाम हज़रत शैख़ मुहम्मद मलावा रहमतुल्लाह अलैह हैं, हज़रत शैख़ रिज़्क़ुल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के मुर्शिद आप पर ख़ास तवज्जुह फरमाते थे,
सीरतो ख़ासाइल
हज़रत शैख़ रिज़्क़ुल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह मर्दे कामिल, फ़ाज़िल, नवादिरे रोज़गार सूफ़ियाए किराम बुज़ुर्गाने दीन के नक़्शे कदम पर थे, उलूमे ज़ाहिरी व बातनी के जामे थे, इसी तरह सब्रो शुक्र अक्लो हिम्मत और इश्के इलाही के मालिक थे, और मुस्तकिल मिजाज़ी में भी यकताए रोज़गार थे, 92/ साल की उमर होने के वजूद भी ज़ोको शोक और मामूलात ज़ियादा थे।
सीरतो ख़ासाइल
हज़रत शैख़ रिज़्क़ुल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से जब कोई मुलाकात करता उससे मुहब्बत से और मारफअत भरे नुक्ते बयांन फरमाते थे, जिन को अहले दिल सुनकर तड़प जाया करते थे, बुज़ुर्गाने दीन के हालात और हिंदुस्तान के बादशाहों की तारीख बहुत अच्छे अंदाज़ में बयान फरमाते थे, आप की गुफ्तुगू बेनज़ीर होती थी, आप हज़रत शैख़ रिज़्क़ुल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने सियाहत बहुत की थी और इससे बड़े तजुर्बात हासिल किए, हज़रत शैख़ रिज़्क़ुल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह हमेशा फकीरों , दुरवेशों, और मशाइखे उज़्ज़ाम के पास बैठा करते थे, फ़ारसी के अलावा हिंदी में अशआर कहते थे, आप ने एक मुद्दत तक हिंदी ज़बान में अशआर कहे, आप की नज़्मों का एक मजमूआ था, जिस का नाम, “पैमाने जूत तरंजन” था जो बहुत मकबूल था, जब आप हिंदी ज़बान में अशआर कहते तो उस में अपना तखल्लुस राजन! और फ़ारसी ज़बान में मुश्ताक! रखते थे।
वफ़ात
आप रहमतुल्लाह अलैह ने बादशा अकबर के दौरे हुकूमत में 989/ हिजरी मुताबिक 1566/ ईसवी में पाई।
मज़ार शरीफ
आप का मज़ार मुबारक, महरूली दिल्ली 30/ में दरगाह हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैह के आसपास था, मगर हमको नहीं मिला।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

