हज़रत सय्यदी मौला देहलवी रहमतुल्लाह अलैह
आप ईरानियुन नस्ल थे, और जुर्जान में में रहते थे, गियासुद्दीन बलबन के दौरे हुकूमत में हिंदुस्तान में तशरीफ़ लाए, पहले पाकपटन में शैखुल इस्लाम हज़रत बाबा फरीदुद्दीन मसऊद गंजे शकर रहमतुल्लाह अलैह की सुहबत इख़्तियार की और इन से फैज़ ले कर दिल्ली रवाना हुए, रुखसत होते वक़्त शैखुल इस्लाम हज़रत बाबा फरीदुद्दीन मसऊद गंजे शकर रहमतुल्लाह अलैह ने हज़रत सय्यदी मौला देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से फ़रमाया के तुम दिल्ली जा कर लोगों से मेलजोल रखो, उससे में तुम को नहीं रोकता अलबत्ता बादशाह और उस के अमीरों से दूर रहना क्यों के इन का क़ुर्ब फकीरों के लिए ठीक नहीं,दिल्ली पहुंच कर हज़रत सय्यदी मौला देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने एक बहुत बड़ी खानकाह तामीर कराइ और भारी लंगर जारी किया, हज़ारों लोग आप की खानकाह में खाना खाते और दूसरी ज़रूरियात के लिए आते और कोई महरूम नहीं जाता, आप रहमतुल्लाह अलैह के और अकीदतमंदों की बहुत बड़ी तादाद थी, आप साहिबे करामात बुज़रुग थे,
कुछ लोगों से हज़रत सय्यदी मौला देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ये इज़्ज़त देखि ना गई, उन्होंने बादशाह के कान भरने शुरू कर दिए के हज़रत सय्यदी मौला देहलवी रहमतुल्लाह अलैह इस तरीके से हुकूमत पर कब्ज़ा करना चाहते हैं, बादशाह ने आप को बेदर्दी से शहीद करा दिया, जिस दिन आप शहीद हुए उस दिन आसमान पर बे इंतहा गरदो गुबार और अँधेरा छा गया था, और बादशाह जलालुद्दीन की हुकूमत दरहम बरहम हो गई और उस ज़माने में ऐसा कहित पड़ा के बहुत से लोगों ने भूक से बेताब हो कर अपने और अपने बच्चों को दरियाए जमना में डाल कर खुद कुशी करली, ये वबाल एक अल्लाह के वली के बे गुनाह क़त्ल की वजह से हुआ।
मज़ार
आप रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार मुबारक, की तहक़ीक़ ना हो सकी।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

