नामो नसब
हज़रत ख्वाजा हुज़ैफ़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! का इस्मेगिरमी: हुफ़ैज़ा, मरअशी, लक़ब सदीदुद्दीन, रुक्नुल काअबा, क़ुत्बुल मुहक़्क़िक़ीन, इमामुल फुकरा, असरारे हदीस, वगेरा अल्काबात से याद करते हैं,
तहसीले इल्म
हज़रत ख्वाजा हुज़ैफ़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! को उलूमे बातनी के साथ उलूमे ज़ाहिरी में भी महारत हासिल थी, आप रहमतुल्लाह अलैह अज़ीम आलिमे दीन, फ़ाज़िले जलील और फकीहे ज़माना थे, सात 7/ साल की उमर में आप रहमतुल्लाह अलैह ने कुरआन शरीफ हिफ़्ज़ कर लिया था, हज़रत ख्वाजा फ़ुज़ैल बिन अयाज़ रहमतुल्लाह अलैह, और इमामे तरीकत हज़रत ख्वाजा सुल्तान इबराहीम इबने अदहम रहमतुल्लाह अलैह! की सुहबत में कामिलो अकमल हुए, आप रहमतुल्लाह अलैह अपने वक़्त के सब से बड़े आलिम, और फकीहे बे बद्ल थे, इल्मे फ़िक्हो तसव्वुफ़ में आप रहमतुल्लाह अलैह ने कसीर मुफीद क़ुतुब भी तसनीफ़ फ़रमाई है, तीस साल तक हज़रत ख्वाजा हुफ़ैज़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! बा वुज़ू रहे, तीन तीन चार चार पांच या छेह छेह दिन बाद इफ्तार करते थे,
और उस वक़्त भी तीन लुक़मे से ज़ियादा नहीं खाते थे, के दुरवेशों की ग़िज़ा अल्लाह पाक का ज़िक्र है, हज़रत ख्वाजा हुफ़ैज़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! का कौल है के अगर तुम किसी दुर्वेश की तहवील में रूपया देखो तो हर गिज़ उस के पास न बैठो जो दुर्वेश शिकम सेर हो कर खाए वो पेटू खुद परस्त कच्चा फ़कीर है, अगर लोग उस को अपना मुक्तदा भी समझें फिर भी उस की सुहबत से दूर भागना चाहिए।
खिलाफ़तो इजाज़त
एक दिन हज़रत ख़िज़्र अलैहिस्सलाम हज़रत ख्वाजा हुज़ैफ़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! के पास आए और फ़रमाया के हर मुसाफिर के लिए रहबर की ज़रूरत होती है, जाओ हज़रत ख्वाजा सुल्तान इबराहीम इबने अदहम रहमतुल्लाह अलैह! की सुहबत इख़्तियार करो, आप रहमतुल्लाह अलैह हज़रत ख्वाजा सुल्तान इबराहीम इबने अदहम रहमतुल्लाह अलैह! की खिदमत में हाज़िर हुए, और इन के कदमो पर गिर पड़े, आप रहमतुल्लाह अलैह के मुर्शिद ने बड़ी शफकत और मुहब्बत से उन को सीने से लगा लिया, और इरशाद फ़रमाया: के ऐ हुज़ैफ़ा! मुत्मइन रहो कामयाबी मिलेगी, फिर हज़रत ख्वाजा सुल्तान इबराहीम इबने अदहम रहमतुल्लाह अलैह! ने मुरीद किया और खिलाफ़तो इजाज़त से नवाज़ा और आप ज़िक्रे खुदा में मशगूल हो गए।
हज़रत ख्वाजा इबराहीम इबने अदहम रहमतुल्लाह अलैह की नसीहत
खिलाफ़तो इजाज़त के वक़्त हज़रत ख्वाजा सुल्तान इबराहीम इबने अदहम रहमतुल्लाह अलैह! ने आप को नसीहत फ़रमाई, के दुनिया को हरगिज़ कबूल ना करना, अपने मुर्शिद के बताये हुए रास्ते पर चलना, और उस पर यकीन रखना के दुनिया दुर्वेश की रहज़न है जब कोई खुदा के रस्ते पर चलता है, तो दुनिया उस की राह में बड़ी बड़ी रुकावटे डालती है, के वो इस रास्ते से मुन्हरिफ़ हो जाए, और अल्लाह पाक की इताअत से बाज़ आये, लेकिन मर्द वही है जो अपनी हिफाज़त करे, दुनिया वाले अगर तुम से मिलने आएं, तो तुम खुदा से तौबा अस्गातफर करना, अपने पीराने तरीकत से मदद मांगों, तुम दुनिया वालों से इस तरह भागो जैसे तीर कमान से भागता है।
हज़रत बायज़ीद बस्तामी अलैहिर रहमा की राए
हज़रत ख्वाजा हुज़ैफ़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! सात साल की उमर में हाफिज़े कुरआन और सातों किरात के कारी भी हो गए थे, और रात और दिन में दो मर्तबा कुरआन शरीफ ख़त्म करते थे, जिस दुर्वेश से मिलते उस की इज़्ज़त करते और दुआ की दरख्वास्त करते, तकरीबन हर शख्स आप के बारे में अच्छी राए रखता था, हज़रत ख्वाजा फ़ुज़ैल बिन अयाज़ रहमतुल्लाह अलैह के अलावा सुल्तानुल आरफीन हज़रत ख्वाजा बायज़ीद बस्तामी रहमतुल्लाह अलैह ने भी आप को देख था, और देख कर फ़रमाया था, के हुज़ैफ़ा! मर्दे खुदा और शैख़ होने वाले हैं, जो बहुत से लोगों को मंज़िले मक़सूद तक पहुंचाएंगे, सोला साल की उमर में इल्मे लदुन्नी के आलिम बन गए थे, और शरीअतो तरीकत हकीकतों मारफअत में हम आहंगी पैदा कर दी थी।
गिर्योज़ारी रोने का सबब
हज़रत ख्वाजा हुज़ैफ़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! हमेशा कंबल का लिबास पहने रहते थे, खल्वतो तन्हाई में हर वक़्त ख़ौफ़े खुदा के बाइस रोते रहते, लोग इस रोने का सबब मालूम करते तो आप फरमाते के अल्लाह के रसूल सलल्लाहु अलैही वसल्लम ने फ़रमाया है “एक गिरोह जन्नत में है और एक गिरोह दोज़ख में” मालूम नहीं मेरा तअल्लुक किस गिरोह से है, इसी खौफ से रोता हूँ, एक शख्स ने कहा जब आप को खुद ही नहीं मालूम के आप किस गिरोह से हैं, तो फिर बैअत क्यों करते हैं, आप रहमतुल्लाह अलैह! ने एक नारा मार कर बेहोश हो गए, जब होश में आए तो ग़ैब से आवाज़ आई, के ऐ हुज़ैफ़ा! में तुम को दोस्त रखता हूँ, और हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम के साथ बहिश्त में दाखिल करूंगा, उस वक़्त आप की मालिज के तीस कुफ्फार भी बैठे थे, जिन्होंने हातिफ़ की आवाज़ अपने कानो से सुनी और ये सुनकर फ़ौरन मुस्लमान हो गए।
जन्नत की बशारत
हज़रत ख्वाजा हुज़ैफ़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! एक बार हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम की कब्र शरीफ पर हाज़िर थे, वहां आप को हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम का दीदार नसीब हुआ तो आप ने फ़रमाया के ऐ अल्लाह के रसूल! सलल्लाहु अलैही वसल्लम, खौफ मालूम होता है, कहीं कहरे इलाही में गिरफ्तार न हो जाऊं, आप ने जवाब दिया के बुलंद हिम्मत रखो तुम जन्नत में मेरे साथ साथ रहोगे, और जो तुम्हारी सुहबत में रहेगा, उसे भी जन्नत नसीब होगी।
शरपसंदों का अंजाम
हज़रत ख्वाजा हुज़ैफ़ा मरअशी रहमतुल्लाह अलैह! की ज़बान मुबारक से जो निकलता वो पूरा हो जाता, चुनांचे एक दिन बहुत से लोग आप की खिदमत में हाज़िर हो कर बतौरे इस्तहज़ा (हांसी मज़ाक) आप से कहने लगे, ऐ हुज़ैफ़ा! अगर आप खुदा रसीदा हैं, तो हम लोगों को बद्द दुआ कीजिए के हम लोगों पर मुसीबत नाज़िल हो, आप खामोश रहे और इस तरफ धियान नहीं दिया, फिर मज़ीद छेड़ने के लिए उन में से एक ने आप का दस्ते मुबारक ऐठना शुरू कर दिया आप ने तीन मर्तबा आह की, और फिर इन सभी के बदन में आग लग गई, और वो सब पालक मारने में खाकिस्तर हो गए।
वफ़ात
आप रहमतुल्लाह अलैह ने कई साल तक सफ़रो हज़र में अपने पीरो मुर्शिद के साथ रहे, और आप ने शादी नहीं की थी, आप का विसाल 24/ शव्वालुल मुकर्रम 252/ हिजरी में हुआ।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
- मिरातुल असरार
- कशफ़ुल महजूब
- ख़ज़ीनतुल असफिया
- मशाइखे इज़ाम जिल्द अव्वल
- सीयरुल अक्ताब
- तज़किरतुल औलिया

