हज़रत ख्वाजा शैख़ नजीबुद्दीन फिरदौसी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ज़िन्दगी

हज़रत ख्वाजा शैख़ नजीबुद्दीन फिरदौसी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह

बैअतो खिलाफत

मर्दाने खुदा के सर चश्मा, शैख़े कामिल, हज़रत ख्वाजा शैख़ नजीबुद्दीन फिरदौसी रहमतुल्लाह अलैह! आप हज़रत ख्वाजा इमादुद्दीन देहलवी रहमतुल्लाह अलैह, के फ़रज़न्द और “हज़रत ख्वाजा शैख़ रुकनुद्दीन फिरदौसी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह” के मुरीदो खलीफा हैं, पीरो मुर्शिद की वफ़ात के बाद आप मसनदे सज्जादगी खिलाफत पर जलवा अफ़रोज़ हुए, बेशुमार लोगों ने आप से फ़ैज़ो बरकात हासिल किए,

आप के खलीफा

आप के खुल्फाओँ मुरीदीन में सब से ज़ियादा मश्हूरो मारूफ खलीफा मख़्दूमे जहाँ “हज़रत शैख़ शरफुद्दीन याहया मनीरी रहमतुल्लाह हैं” एक मर्तबा हज़रत शैख़ शरफुद्दीन याहया मनीरी रहमतुल्लाह हैं ने अक्सीर पेश की, आप ने हज़रत शैख़ शरफुद्दीन याहया मनीरी रहमतुल्लाह हैं की हिम्मत को देख ने के लिए उस को पानी में फेंक दिया, ये देख कर, हज़रत शैख़ शरफुद्दीन याहया मनीरी रहमतुल्लाह अलैह बहुत खुश हुए और अर्ज़ किया के अगरचे इस खाक से तांबा सोना बन जाता था लेकिन इससे दिल पर एक वज़न रहता था, अल हम्दुलिल्लाह! दुनियावी वज़न से दिल को राहत मिल गई,
हज़रत ख्वाजा शैख़ नजीबुद्दीन फिरदौसी रहमतुल्लाह अलैह! अपने मुरीद की ये बात सुन कर बहुत खुश हुए और एक पर्चे पर चंद हुरूफ़ लिख कर आप को दिए, जब हज़रत शैख़ शरफुद्दीन याहया मनीरी रहमतुल्लाह ने उस पर्चे को अपने सर पर रखा तो जो कुछ ज़मीन में है सब दिखाई देने लगा, हज़रत शैख़ शरफुद्दीन याहया मनीरी रहमतुल्लाह ने उस पर्चे को बोसा दिया, और हज़रत ख्वाजा शैख़ नजीबुद्दीन फिरदौसी रहमतुल्लाह अलैह! के सामने रख दिया और अर्ज़ किया के सब परागन्दगी के सामने हैं, ये उस को दीजिए, जो इस का ख्वाइश मंद हो,
हज़रत ख्वाजा शैख़ नजीबुद्दीन फिरदौसी रहमतुल्लाह अलैह अपने मुरीद की ये बात सुन कर और इन की हिम्मत को देख कर बहुत खुश हुए और हज़रत शैख़ शरफुद्दीन याहया मनीरी रहमतुल्लाह को दुआएं दीं।

वफ़ात

हज़रत ख्वाजा शैख़ नजीबुद्दीन फिरदौसी रहमतुल्लाह अलैह! ने फ़िरोज़ शाह के दौरे हुकूमत में 13/ मुहर्रमुल हराम 761/ हिजरी को वफ़ात पाई।

मज़ार शरीफ

आप का मज़ार मुबारक महरोली शरीफ दिल्ली तीस 30/ में औलिया मस्जिद के सामने पंखे वाली मस्जिद के पीछे से जो रास्ता ऊपर को जा रहा है, इसी मस्जिद के अंदर ही मरजए खलाइक है।

मरजए खलाइक है।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

  1. रहनुमाए माज़राते दिल्ली
  2. औलियाए दिल्ली की दरगाहें
  3. दिल्ली के 32/ ख्वाजा
  4. मनाक़िबुल असफिया

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