खिलाफ़तो इजाज़त
हज़रत लाल शाह बाज़ कलंदर देहलवी रहमतुल्लाह अलैह, का इस्मे गिरमि “शाह अमान दुर्वेश देहलवी” है, आप हज़रत सय्यद शाह अब्दुल गफूर उर्फ़ बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह के खलीफा हैं, आप रहमतुल्लाह अलैह को लाल शाहबाज़! का ख़िताब आप के पीरो मुर्शिद ने आप को अता फ़रमाया था, चुनांचे आप खुद फरमाते हैं, के जिस तरह अक्सीर डालने से तांबा सोना हो जाता है, और सूरज के असर से पथ्थर लाल बे बाहा हो जाता है, इसी तरह शैख़ से वो मुरीद जो मंज़ूरे नज़र हो गया हो लाल शाहबाज़! हो जाता है, हाँ नज़र चाहिए, वो जमादात का हुस्न है, जो पस्ती में रहता है और ये फरिश्तों का हुस्न है जो तौहीद के जंगल में बुलंदी पर परवाज़ करता है, मुरीद को जो तरक्की होती है वो पीर के फैज़ान से होती है, मेरी जान शैख़ पर कुर्बान के ऐसा ख़िताब था के इन की अक्सीरे नज़र ने अमानुल्लाह के वुजूद के तांबा को सोना कर दिया और इन की आफताब की तरह की नज़र ने मेरे वुजूद के पथ्थर को लाल बे बाहा कर दिया, हज़रत लाल शाह बाज़ कलंदर देहलवी रहमतुल्लाह अलैह सिलसिलाये कलंदरिया के बुज़रुग थे और जिन्होंने आप से फैज़ पाया इस जमात को लाल शहबाज़ी कहते हैं,
वफ़ात
अफ़सोस की आप की तारीखे विसाल मालूम न हो सकी।
मज़ार
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, नबी करीम, दिल्ली 5/ में उस रास्ते पर था जो रास्ता कदम शरीफ से दिल्ली शाह जहानाबाद को जा रहा है, मगर हम को नहीं मिला।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

