बैअतो खिलाफत
हज़रत मौलाना ख्वाजा अबू बक्र मंदा चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के साथियों से थे, और आप के सब से पहले मुरीद हैं, निहायत आबिदो ज़ाहिद ज़ुहदो वरा, तकवाओ तदय्युन मुत्तकियो परहेज़गार, आलिमे दीन, और सूरतो सीरत में बुज़ुर्गों के नक़्शे कदम पर थे, जब सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के मुरीद नहीं हुए, तो हज़रत मौलाना ख्वाजा अबू बक्र मंदा चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! ने आप से कहा था के जब शैखुल इस्लाम हज़रत बाबा फरीदुद्दीन मसऊद गंजे शकर रहमतुल्लाह अलैह के मुरीद हो जाओगे तो में आप का मुरीद बनूगा, जब सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह शैखुल इस्लाम हज़रत बाबा फरीदुद्दीन मसऊद गंजे शकर रहमतुल्लाह अलैह से मुरीद हो कर दिल्ली तशरीफ़ लाए तो हर आदमी आप से मुरीद होने की ख्वाइश करने लगा, लेकिन सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह, हर एक से इंकार कर देते थे, आप का मकसद ये था के सब से पहले किसी नेक और मुत्तक़ी आदमी को मुरीद करूँताके इस दीनी काम में बरकत हो,
कुछ दिन के बाद हज़रत ख्वाजा सय्यद मुहम्मद किरमानी रहमतुल्लाह अलैह ने हज़रत मौलाना ख्वाजा अबू बक्र मंदा चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! से कहा के तुम ने तो सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से मुरीद होने का वादा किया था, आप ने जवाब दिया बेशक मेने वादा किया था, लेकिन जो नेमतें आप ने शैखुल इस्लाम हज़रत बाबा फरीदुद्दीन मसऊद गंजे शकर रहमतुल्लाह अलैह से हासिल की हैं, अगर में इन नेमतों का खुद भी मुशाहिदा कर लूँ, तो में सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ये बात सुनकर खामोश रहे और कुछ नहीं कहा,
इस वाकिए के कुछ दिनों बाद सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह एक दिन क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की बारगाह से हाज़री दे कर वापस आ रहे थे, जब आप शहर दिल्ली के बड़े दरवाज़े के पास पहुंचे तो हज़रत मौलाना ख्वाजा अबू बक्र मंदा चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! सामने से आ रहे थे, उन्होंने देखा के सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की पेशानी से एक नूर ज़ाहिर हुआ, जिस की रौशनी आसमान तक पहुंच रही थी, जैसे ही सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से अर्ज़ किया ऐ मखदूम अच्छे मुरीद करने के लिए हाथ बढ़ाओ, सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया के तुम तो मुझ से मुरीद होने के लिए किसी दलील के मुन्तज़िर थे, उन्होंने अर्ज़ किया बेशक लेकिन आज में ने उस को आप की पेशानी में देख लिया, सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने तबस्सुम फ़रमाया और रास्ता ही में इन को मुरीद फरमा लिया और अपनी टोपी उन के सर पर रखी।
मज़ार
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, दरगाह हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया में था।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

