हज़रत शैख़ अब्दुल्लाह अब्दाल देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ज़िन्दगी

हज़रत शैख़ अब्दुल्लाह अब्दाल देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की ज़िन्दगी

बैअतो खिलाफत

आप हज़रत शैख़ अब्दुल्लाह अब्दाल देहलवी रहमतुल्लाह अलैह मुजद्दिदे वक़्त हज़रत शैख़ अब्दुल हक मुहद्दिसे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के दादा मुहतरम हज़रत शैख़ सअदुल्लाह रहमतुल्लाह अलैह के भांजे थे, हज़रत शैख़ अब्दुल्लाह अब्दाल देहलवी रहमतुल्लाह अलैह मशहूर साहिबे हाल मजज़ूब बुज़रुग थे, बाज़ारों में घूमते रहते थे, और अपने हाल के मुताबिक हिंदी में अशआर पढ़ा करते थे, एक मर्तबा आप रहमतुल्लाह अलैह सख्त बीमार हो गए, घर वालों ने आप की बगल में हाथ डाल कर उठाया और घर की दहलीज़ पर बिठा दिया, थोड़ी देर के बाद जब घर वालों ने बाहर जा कर देखा तो आप गाइब थे, मुजद्दिदे वक़्त हज़रत शैख़ अब्दुल हक मुहद्दिसे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के चचा का बयान है के जब में गुजरात गया तो वहां के लोगों से हज़रत शैख़ अब्दुल्लाह अब्दाल देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के हिंदी बहुत से अशआर सुने, इस पर में ने कहा के वो यहाँ किस वक़्त आए वो तो दिल्ली में थे, लोगों ने जवाब दिया के वो तो ज़्यादातर गुजरात में रहते थे वो दिल्ली कब गए।

मज़ार

आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, के बारे मालूम ना हो सका।

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

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