हज़रत शैख़ अमजद चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह
आप सुल्तान बहलूल के दौरे हुकूमत के बुज़रुग हैं, क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से रूहानी फैज़ हासिल करते थे, एक बार किसी ज़रूरी काम के लिए अपने वतन से रवाना हुए, रास्ते में दरिया पड़ा जब आप इस की गहराई में पहुंचे तो डूबने के करीब हो गए, उसी वक़्त दरिया में से एक आदमी ज़ाहिर हुआ जिस ने आप को डूबने से बचा लिया, वहां से घर वापस आए फिर कभी घर से बाहर कदम नहीं निकाला, आप ने बिला वास्ता क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से फैज़ लेने की निस्बत कायम करली थी, और दूसरे लोगों को मुरीद करते थे।
मज़ार शरीफ
आप का मज़ार मुबारक शम्शी तालाब के पास था, मगर अब निशान भी नहीं है।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

