हज़रत ख्वाजा शैख़ शहाबुद्दीन आशिक अल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह

हज़रत ख्वाजा शैख़ शहाबुद्दीन आशिक अल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ज़िन्दगी

बैअतो खिलाफत

हज़रत ख्वाजा शैख़ शहाबुद्दीन आशिक अल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह! आप हज़रत ख्वाजा इमामुद्दीन अहमद अब्दाल रहमतुल्लाह अलैह के “शहज़ादे” हैं, और इन्ही के मुरीदो खलीफा हैं, और हज़रत ख्वाजा इमामुद्दीन अहमद अब्दाल रहमतुल्लाह अलैह! मुरीद और खलीफा हैं, हज़रत ख्वाजा बदरुद्दीन ग़ज़नवी चिश्ती दिल्ली रहमतुल्लाह अलैह के, और आप मुरीद और खलीफा हैं, क़ुत्बुल अक्ताब हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के, और हज़रत ख्वाजा शैख़ शहाबुद्दीन आशिक अल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह! पीरो मुर्शिद हैं, हज़रत शैख़ शरफुद्दीन बू अली शाह कलंदर पानीपती रहमतुल्लाह अलैह के। (सीयरुल अक्ताब)

हज़रत ख्वाजा शैख़ शहाबुद्दीन आशिक अल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह! अपने वक़्त के शैख़े नामदार और यगानए रोज़गार थे, इश्के हकीकी के आखरी दर्जे को पहुंचे हुए थे, अज़ीम शानो अज़मत के मालिक, आप ने हज़रत ख्वाजा बदरुद्दीन ग़ज़नवी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह से भी फ़ैज़ो बरकात हासिल कीं, जिस की वजह से आप ने आला मक़ाम हासिल किया था।

करामात

एक दफा हज़रत ख्वाजा शैख़ शहाबुद्दीन आशिक अल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह! ने अपने वालिद माजिद के उर्स मुबारक के मोके पर रोटी और गोश्त तय्यार कराया, इत्तिफाक की बात उस वक़्त लोगों की तादाद ज़ियादा हो गई, खादिम ने आप की खिदमत में अर्ज़ किया हज़रत! खाना खाने वाले ज़ियादा हैं और खान कम है, हज़रत ख्वाजा शैख़ शहाबुद्दीन आशिक अल्लाह देहलवी रहमतुल्लाह अलैह! ने इरशाद फ़रमाया के रोटियों और सालन को ढांक दो, और बिस्मिल्लाह पढ़ कर लोगों को खिलाना शुरू करो, अल्लाह पाक बरकत अता फरमाएगा और खाना सब को मिल जाएगा खादिम ने ऐसा ही किया, खाने को छुपा दिया कपड़े से, और अल्लाह पाक का नाम ले कर खिलाना शुरू किया, आप की दुआ से खाना सब के लिए काफी हो गया।

वफ़ात

आप ने कुतबुद्दीन मुबारक शाह, के या सुल्तान मुबारक खिलजी के दौरे हुकूमत में 11/ रमज़ानुल मुबारक 717/ हिजरी मुताबिक 1317/ ईसवी में वफ़ात पाई।

आप के खलीफा

आप के मश्हूरो मारूफ खलीफा हज़रत शैख़ शरफुद्दीन बू अली शाह कलंदर पानीपती रहमतुल्लाह अलैह! हैं।

मज़ार शरीफ

आप का मज़ार शरीफ दिल्ली में महरोली की शम्शी ईद गह के आधा किलो मीटर दूर शुमाल में गिरीन एरिया में मौजूद है ईदगाह से शुमाल की जानिब एक कच्चा रास्ता दरगाह के लिए जाता है उत्तर पूरब की जानिब एक पहाड़ी पर मरजए खलाइक है, आप का मज़ार मुकद्द्स आशिक अल्लाह के नाम से बहुत मशहूर है।

मरजए खलाइक है

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली
औलियाए दिल्ली की दरगाहें
दिल्ली के 32/ ख्वाजा

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