तालीमों तरबियत
आप हज़रत मौलाना मीर मुहम्मद ज़करिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के वालिद मुकर्रम का नाम “मौलाना मीर मुहम्मद” है, जो के मकाम चार के रहने वाले थे, आप का सिलसिलए नसब इमामुल औलिया शैख़ अब्दुल कादिर जिलानी गौसे आज़म बगदादी रहमतुल्लाह अलैह तक पहुँचता है, आप के वालिद मुहतरम बादशाह औरंगज़ेब आलमगीर रहमतुल्लाह अलैह के खास मनसब दार थे, आप रहमतुल्लाह अलैह के वालिद माजिद को ईद के दिन शाही महल में शहीद कर दिया गया, उस वक़्त आप की उम्र कम थी, आप रहमतुल्लाह अलैह के वालिद साहब के मुलाज़मीन में आप को लाहौर ले आए, नवाब अब्दुस समद खान ने आप की परवरिश अपनेव बेटों की तरह की, लाहौर के मशहूर उल्माए किराम से आप ने इल्म हासिल किया, इल्म से फारिग होने के बाद आप को वालिद मुकर्रम की जगह मुकर्रा कर दिया गया, दुनियावी शानो शौकत के बावजूद आप का कोई फेल शरीअते मुतह्हरा के खिलाफ नहीं होता था, ज़ुहदो वरा, तकवाओ तदय्युन मुत्तकियो परहेज़गार, और इत्तिबाए शरीअत से आरास्ता थे।
खिलाफ़तो इजाज़त
हज़रत मौलाना मीर मुहम्मद ज़करिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के यहाँ एक शख्स फर्श वगेरा बिछाने पर मामूर था, उस दौरान वो बड़ा शराबी और फासिको फ़ाजिर था, मगर अब उस के चेहरा से बुज़ुर्गी के आसार दिखाई दे रहे हैं, आप ने उससे इस की तबदीली के बारे में पूछा तो उस ने कहा ये सब मेरे पीरो मुर्शिद का करम है, आप शैख़े कामिल की तलाश में ही थे, फ़रमाया चलो मुलाकात कराओ, चुनांचे आप हज़रत मौलाना शैख़ मुहम्मद सिंधी रहमतुल्लाह अलैह की बारगाह में हाज़िर हुए, और मुरीद हो गए, आप ने अप ने पीरो मुर्शिद की बारगाह में अर्ज़ किया के मेरी ख्वाइश ये है के सारे साज़ो सामान और जाहो हशम को छोड़ कर आप के कदमो में रहूँ, और आने वालों की खिदमत और खानकाह शरीफ की सफाई सुथराई करूँ, आप के पीरो मुर्शिद ने फ़रमाया के ज़ाहिरी असबाब खुदा शनासी को नहीं रोकते, अल्लाह पाक ने अपने उन बन्दों की तारीफ फ़रमाई है, जो तिजारत और कारोबार करते हुए भी ज़िक्रे खुदा में मशगूल रहते हैं, और कोई धंधा उन को अल्लाह पाक के ज़िक्र से नहीं रोकता, चुनांचे आप ने तिजारत का काम शुरू कर दिया, और नवाब साहब के इन्तिकाल के बाद सूबेदारी के मनसब को तर्क कर दिया,
दिल्ली में आमद
हज़रत मौलाना मीर मुहम्मद ज़करिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने एक रात ख्वाब में हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम की ज़ियारत से फ़ैज़याब हुए, और आप अलैहिस्सलाम ने हुक्म दिया के दिल्ली जा कर रुश्दो हिदायत दीनो तब्लीग का काम करो और भटके गुह्मराह को राहे रास्त पर लाओ, चुनांचे आप हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम के हुक्म से अपने बेटे मीर ईसा के साथ दिल्ली तशरीफ़ लाए, और जामा मस्जिद के करीब मकान किराए पर लेकर रुश्दो हिदायत दीनो तब्लीग का काम शुरू कर दिया, कसीर लोगों ने हज़रत मौलाना मीर मुहम्मद ज़करिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से फीयूज़ो बरकात हासिल किए, और मरतबाए कमाल को पहुंचे।
करामत
एक मर्तबा हज़रत मौलाना मीर मुहम्मद ज़करिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह का माल बा ज़रिये कश्ती आ रहा था, दरिया में तुग़यानी आई, और कश्ती डूब गई, मुरीदीन रोते हुए आप की बारगाह में हाज़िर हुए, आप ने मुराकिबा किया, फिर सर उठा कर अल्हम्दुल्ला कहा और फ़रमाया फ़िक्र ना करो, तुग़यानी ख़त्म होने के बाद देखा जाएगा, क्या तअज्जुब है के दरिया हमारे सामान को बा तौर अमानत रखे हो, तुग़यानी खत्म होने पर आप गोता खोरों के साथ दरिया पर तशरीफ़ ले गए, और दरिया से फ़रमाया के हमारा माल हलाल है ना के हराम, माल हमारा खुदा के लिए है ना के दरिया के लिए, इस के बाद बिस्मिल्लाह पढ़कर गोता खुरों को गोता लगाने का हुक्म दिया, थोड़ी देर के बाद कश्ती मआ साज़ो सामान के निकल आई और सारा सिर्फ माल सहिओ सलामत बरआमद हुआ, सिर्फ ऊपर नीचे की दो चादरें खराब हुईं,
सय्यद की पहचान
हज़रत मौलाना मीर मुहम्मद ज़करिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के एक मुरीद थे जिन का नाम मियां खुदा बख्श था, और इन को हज़रत मौलाना मीर मुहम्मद ज़करिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के सय्यद होने में शक हुआ, उसी रात में खातून जन्नत हज़रते फातिमा ज़हरा रदियल्लाहु अन्हा के दीदार से मुशर्रफ हुए और हज़रते फातिमा ज़हरा रदियल्लाहु अन्हा ने इरशाद फ़रमाया के तुझ को मेरे अज़ीज़ मुहम्मद ज़करिया! के सय्यद! होने में शक है, देख उस का पैर मेरे पैर के मुशाबेह है, जागने के बाद उन्होंने तौबा की और हज़रत! की शान में ऐसा कुछ भी नहीं बोला।
वफ़ात
आप रहमतुल्लाह अलैह ने शाह आलम सानी के दौरे हुकूमत में 9/ ज़ीकाइदा 1188/ हिजरी में वफ़ात पाई,
मज़ार
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, दरगाह हज़रत ख्वाजा बाकी बिल्लाह नक्शबंदी रहमतुल्लाह अलैह में बानी हमदर्द की कब्र के पीछे था मगर हम को नहीं मिला।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

