हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह

हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह

विलादत शरीफ

हज़रत ख्वाजा अबू मुहम्मद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह की विलादत 26/ मुहर्रमुल हराम 299/ हिजरी बरोज़ चहार शम्बा यानि बुध असर के वक़्त मुल्के अफगानिस्तान के सूबा हिरात, के मशहूर क़स्बा चिश्त! में हुई।

इस्म मुबारक

इमामुल आशिक़ीन, सुल्तानुल आरफीन, बुरहानुल वासलीन, क़ुत्बुल अक्ताब, उलमा के ताज, औलिया के सरदार, सूफियों के पेशवा मज़हबो मिल्लत के मुआविनो मददगार, हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! आप का लक़ब नासिरुद्दीन! था,

वालिद माजिद

आप रहमतुल्लाह अलैह के वालिद माजिद का नाम मुबारक, मुहम्मद समआन अलैहिर रहमा था।

सखावत

आप रहमतुल्लाह अलैह की सुहबत में जो भी बैठता वली हो जाता था, दौलत मंद लोग आप की मजलिस में अगर आ जाते तो उन के चेहरे का रंग तब्दील हो जाता, और उन पर गिरया तारी हो जाता था, आप फुकरा की सुहबत को पसंद फरमाते, और उन की तअज़ीमों तौकीर करते थे, हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का कौल था के फुकरा अल्लाहो रसूल के दोस्त हैं, फिर इन के साथ दोस्ती को कौन पसंद नहीं करेगा, आप दुनियादार लोगों से बहुत कम मिलते थे, फिर भी आप के अकीदतमंदों और मुरीदीन मोतक़िदीन मुहिब्बीन की बहुत बड़ी तादाद थी, अगर मोतक़िदीन में से कोई आप के पास नज़र पेश करता तो आप उसे फ़ौरन फुकरा और हाजतमन्दों में तकसीम कर देते, अगर खादिम की गलती से कभी कोई चीज़ रह जाती तो आप के हुज़ूरे कलबी में खलल पड़ जाता और आप समझ जाते के खुद्दाम से कोई चीज़ तकसीम कर ने से छूट गई है, फ़ौरन दरयाफ्त करते और छूटी हुई चीज़ को फुकरा में तकसीम कर देते।

लड़की खत्म हो गई

मन्क़ूल: है के बीस साल की उमर में एक दिन हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! का गुज़र एक अमीर घर के करीब से हुआ, उस घर का दरवाज़ा खुला था अंदर उस की साहिबे जमाल लड़की बैठी थी, और खिदमत गार नौकर खड़े थे, आप रहमतुल्लाह अलैह! को वो लड़की बहुत पसंद आई, आप रहमतुल्लाह अलैह! ने नौकर से कहा के लड़की के वालिद से जा कर कहो के अपनी लड़की की शादी मेरे साथ कर दो, नौकर ने फ़ौरन घर जाकर पैगाम दिया, अमीर ने कहा ये तो सआदत की बात है, मेरी बेटी को हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! अपनी खिदमत में कबूल फ़रमालें, लेकिन पहले में एक ख़ादिमा को आप रहमतुल्लाह अलैह! की खिदमत में भेजूंगा, आप रहमतुल्लाह अलैह! खुत्बा पढ़ कर सुनाएँ, इस के बाद लड़की दूंगा, जब नौकर ने बाहर आ कर आप को ये पैगाम दिया, तो आप रहमतुल्लाह अलैह! समझ गए, मेरी खातिर अमीर चालाकी कर रहा है आप ने फ़रमाया में इस अमीर का इम्तिहान ले रहा था, के मेरे साथ इसे कितनी अक़ीदतो मुहब्बत है वरना मुझे शादी की बिल कुल हाजत नहीं है, ये कह कर आप रहमतुल्लाह अलैह! घर चले गए, अभी आप घर नहीं पहुंचे थे के लड़की के पेट में शदीद दर्द होने लगा अमीर ने खुद्दाम को आप रहमतुल्लाह अलैह! की खिदमत में भेज कर मुआफी तलब की, लेकिन आप रहमतुल्लाह अलैह! ने कबूल नहीं किया अभी रात ना होने पाई थी के लड़की का इन्तिकाल हो गया।

खिलाफ़तो इजाज़त

हज़रत ख्वाजा शैख़ मुहम्मद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह ने, हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! को चौदह साल की मशक्कतों मेहनत इबादतों रियाज़त कर ने के बाद 27/ मुहर्रमुल हराम 359/ हिजरी बरोज़ बुद्ध बा वक़्ते असर मरकज़ी जामा मस्जिद चिश्त शरीफ (चिश्त, मुल्के अफगानिस्तान के सूबा हिरात, का मशहूर क़स्बा है) में आप रहमतुल्लाह अलैह! को खिरकए खिलाफ़तो इजाज़त बैअत अता फ़रमाई, और फ़रमाया के ऐ नासिरुद्दीन! तुमने पीराने चिश्त का खिरका पहना है, तुम पर लाज़िम है के अपने पीराने इज़ाम मशाइख़ीन की पैरवी कर के अपने आप को सब से कम और सब को अपने आप से आला समझना, हमेशा फ़क्ऱो फाका और फुकरा गुरबा मसाकीन को अज़ीज़ जानना क्यों के फुकरा से मुहब्बत करना, दरअसल अक़ाए दो जहाँ हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम से मुहब्बत करना है, आप रहमतुल्लाह अलैह! ने पीरो मुर्शिद की नसीहत को कबूल किया, और गोशा नशीनी खल्वत और फ़क्ऱो फाका को इख़्तियार किया, आप रहमतुल्लाह अलैह! के घर में चार चार और पांच पांच वक़्त का फाका भी होता था।

आप का अक़्द मसनून

हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! हिरात! तशरीफ़ ले गए, रास्ते में एक गाऊं आया, जिस का नाम कनक! था, वहां एक ऐसे दुर्वेश रहते थे जो निहायत ही मुत्तक़ी थे, उन की एक साहबज़ादी थी जो बड़ी नेक पारसा और हसीनो जमील थी, रात के वक़्त उस लड़की ने ख्वाब में देखा के चौदवी का चाँद आसमान से उतर कर मेरे पास आ गया है, और वो चाँद मुझ से कहने लगा, के तुम मेरी बीवी हो, में ने तुम्हे अल्लाह पाक से माँगा है, सुबह हुई तो लड़की ने अपने वालिद से इस ख्वाब की ताबीर पूछी, उस के वालिद हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! की खिदमत में गए ताके ख्वाब की ताबीर दरयाफ्त करें अभी इन्होने कुछ नहीं पूछा था, तो हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! ने लड़की के ख्वाब की पूरी दास्तान बता दी, और दुर्वेश को तसल्ली दी के चौदवी का चाँद में ही हूँ और में ने तुम्हारी बेटी को अल्लाह पाक से माँगा है, दुर्वेश उठे और अपनी बेटी का निकाह आप रहमतुल्लाह अलैह! से कर दिया, आप रहमतुल्लाह अलैह! अपनी ज़ौजाह (बीवी) को लेकर अपने क़स्बा चिश्त! आ गए, इसी पारसा बीवी के बतन से हज़रत ख्वाजा मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, और हज़रत ख्वाजा ताजुद्दीन अबुल फतह अलैहिर रहमा की विलादत हुई।

पानी का चश्मा जारी हो गया

एक दिन गर्मियों के मौसम में हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! अपने दोस्तों के साथ घर से निकले एक ऐसे जंगल में पहुंचे जहाँ दूर दूर तक पानी नहीं था, तमाम दोस्तों को शदीद प्यास लगने लगी, सब दोस्त अहबाब ने आप से पानी की इल्तिजा की, आप रहमतुल्लाह अलैह! ने अपना असा एक पत्थर पर मारा जिससे पानी का चश्मा जारी हो गया, आप रहमतुल्लाह अलैह! और तमाम अहबाब ने सेराब हो कर पानी पिया, ये चश्मा अब तक जारी है, उस की खासियत ये है के सर्दियों में उस का पानी गर्म होता है, और गर्मियों में ठंडा अगर कोई बुखार में मुब्तला शख्स इस पानी को पीले तो उसी वक़्त सेहतयाब हो जाता है,

पत्थर की फरमा बरदारी

हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! के घर में एक बहुत बड़ा पत्थर था आप रहमतुल्लाह अलैह! अक्सर औकात उस पर नमाज़ पढ़ा करते थे, एक दिन आप रहमतुल्लाह अलैह! नमाज़ पढ़ने के बाद अपने घर से निकले आप रहमतुल्लाह अलैह! ने देखा के वो पत्थर भी आप रहमतुल्लाह अलैह! के पीछे चला आ रहा है, गाँव के सारे लोग पत्थर को चलता देख कर जमा हो गए और ये तमाशा देखने लगे, आप रहमतुल्लाह अलैह! ने लोगों को शोर मचाते और तालियां बजाते देखा तो पत्थर को देख कर फ़रमाया यहाँ रुक जाओ, उस दिन के बाद कई औलियाए किराम ने देखा के हज़रत खिज़र अलैहिस्सलाम उस पत्थर पर बैठे नज़र आते हैं, अँधेरी रातों में उस पत्थर से नूर की शुआएँ किरने निकलती हैं, जिससे तमाम गाऊं रोशन हो जाता है,

पूरा कुरआन याद हो गया

हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! को कुरआन शरीफ का पहला हिस्सा याद था, और आप दिल में सोचते के अगर मुझे पूरा कुरआन शरीफ याद होता तो पूरा सवाब मिलता, रात को ख्वाब में हज़रत ख्वाजा अबू अहमद अब्दाल चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह तशरीफ़ लाए, फ़रमाया अबू युसूफ! सौ बार सूरह फातिहा पढ़ो, तुम्हे कुरआन याद हो जाएगा, आप ने ऐसा ही किया पूरा कुरआन पाक याद हो गया आप रहमतुल्लाह अलैह रोज़ाना पांच कुरआन शरीफ ख़त्म करते थे।

क़यामत और फुकरा

हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! से किसी ने पूछा के हज़रत! क़यामत के रोज़ हर एक को उस के गुनाह की वजह से अज़ाब होगा, वहां पर फासिक फुकरा का क्या हाल होगा, आप रहमतुल्लाह अलैह! ने फ़रमाया के हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम ने फ़रमाया के फुकरा गुनाह के मुताबिक दोज़ख में जायेंगे मगर दोज़ख की आग उन्हें तकलीफ ना देगी, क्यों के फुकरा अल्लाह पाक की हिफ्ज़ो अमान में होंगे वो अम्ल के मुताबिक बहिश्त में जाएगें, मगर उस वक़्त जब के दुश्मन उन से राज़ी होंगे तो दुर्वेश भी बहिश्त में ना जायेगा, आप रहमतुल्लाह अलैह! ने फ़रमाया जब दुश्मन फुकरा पर अल्लाह पाक की महिरबानियाँ देखेंगे तो खुद बा खुद राज़ी हो जायेंगें फिर अल्लाह पाक फरमाएगा, ऐ मेरे दोस्त के दुश्मन तू मेरे दोस्त पर राज़ी हुआ है, इस लिए उस के हमराह तू भी बहिश्त में आ जा,

आप रहमतुल्लाह अलैह! अपने पीराने तरीकत मशाइख़ीन की अरवाह के लिए खाना तय्यार करते और फकीरों को बिठा कर उनके आगे लज़ीज़ खाने रखते और फकीरों के दरमियान कोई अहले दुनिया आ कर बैठता तो आप रहमतुल्लाह अलैह! ना खुश होते और उस को उठा कर खाना वापस कर देते कहते हैं के जो फ़कीर और गरीब आप के घर आता तो खुश हो कर जाता आप हरगिज़ दुनियादार और बादशाहों को जगह नहीं देते और किसी बादशाह को फ़कीर से ऊंचा नहीं बिठाते थे।

महफिले सिमआ से निकाल देते

हज़रत ख्वाजा नासिरुद्दीन अबू युसूफ रहमतुल्लाह अलैह! जब महफिले सिमआ सुनते थे तो आप रहमतुल्लाह अलैह! की मजलिस में उल्माए किराम फुकरा और दीगर मशाइख़ीन हज़रात के अलावा कोई दुनियादार मजलिस में मौजूद नहीं होता अगर कोई शख्स ऐसा भी आ जाता तो आप को सिमआ का ज़ोक हासिल नहीं होता, जल्द ही आप ऐसे दुनियादार लोगों को महफ़िल से निकाल देते थे, चंद एक दुर्वेश को रोक कर सिमआ सुनते थे और फरमाते थे के असरारे इलाही नालायकों, पर ज़ाहिर नहीं करना चाहिए, हमारे मशाइख़ीन पीराने तरीकत ने ऐसा नहीं किया है, वो सब अहले दुनिया से परहेज़ करते हैं और कभी सिमआ के वक़्त अहले दुनिया दुनियादार को दाखिल नहीं होने देते थे, अगर कोई शख्स अहले दुनिया आप रहमतुल्लाह अलैह! की महफिले सिमआ में आ भी जाता तो फ़ौरन मजज़ूब हो जाता और दुनिया की मुहब्बत इस के दिल से निकल जाती और उसी वक़्त खिरका पोश दुर्वेश बन जाता और खल्वत इख़्तियार कर के दिन रात औरादो वज़ाइफ़ ज़िक्रे खुदा, इबादतों रियाज़त में मशगूल हो जाता, महफिले सिमआ के दौरान आप रहमतुल्लाह अलैह! की आँखों से आंसू जारी हो जाते, और खुद वुजूद में गुम हो जाते, और रोने लगते थे, ऐसा मालूम होता था के मारे दर्द के आप का सीना फट जाएगा, आप की महफ़िल में बैठने वाला दुनिया से किनारा कश और खुदा का तालिब बन जाता साहिबे नेमतों करामत बन जाता।

विसाल

जब आप रहमतुल्लाह अलैह! के विसाल का वक़्त करीब आया तो आप ने अपने बड़े साहबज़ादे हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन मौदूद चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह को अपना काइम मकाम और जानशीन मुकर्रर किया, आप रहमतुल्लाह अलैह का विसाले बा कमाल 3/ रजाबुल मुरज्जब र 459/ हिजरी को हुआ, उस वक़्त खलीफा अबू जाफ़र अब्दुल्लाह लक़ब काइम बिन कादिर का दौरे हुकूमत था,

मज़ार

आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक: मुल्के अफगानिस्तान के सूबा हिरात, के क़स्बा चिश्त में मरजए खलाइक है,

“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”

रेफरेन्स हवाला

मिरातुल असरार
सीयरुल अक्ताब
ख़ज़ीनतुल असफिया
सवानेह शैखुल आलम
सफ़िनतुल औलिया,
सीयरुल औलिया

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