हज़रत ख्वाजा मुअईदुद्दीन चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह
तारिकुद दुनिया, तालिबे उक़्बा, ज़ाहिरो बातिन में साफ़, निहायत मुत्तकियो परहेज़गार, हज़रत ख्वाजा मुअईदुद्दीन कड़वी चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के ज़माने में उस के साथी और शहर कड़ा! के हाकिम थे, उस दौर में आप ने मुल्की ऐतिबार से बहुत अच्छे काम अंजाम दिये, दरबार शाही से आप रहमतुल्लाह अलैह को “मलिक ज़ादा” के ख़िताब से मुअज़्ज़ किया गया, हज़रत ख्वाजा मुविदुद्दीन चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह का कद दराज़ था, और रंग सफ़ेद खूबसूरत था, आप की सूरतो सीरत पाकीज़ह थी,
खिलाफ़तो इजाज़त
आखिर में चूंके सआदत अब्दी मुकद्दर में थी, सुल्तानुल मशाइख सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से मुरीद हो गए, और दुनिया के इख़्तियारात से हाथ उठा लिया, जब सुल्तान अलाउद्दीन ने सुना, के हज़रत ख्वाजा मुविदुद्दीन चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने दुनिया को तर्क कर दिया है और सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह के मुरीदों में शामिल हो गए हैं, तो उसने सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की बारगाह में अपने हाजिब (वकील, कासिद, वज़ीर) भेजा, और ये कहिलवाया के मखदूम! मुझ पर करम कीजिये और हज़रत ख्वाजा मुअईदुद्दीन चिश्ती देहलवी रहमतुल्लाह अलैह को इजाज़त दीजिये ताके वो हमारे काम में शामिल हों, सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने सुल्तानं अलाउद्दीन खिलजी को कहिलवाया के उस को दूसरे काम दरपेश हैं और वो उस काम में मशगूल हैं, हाजिब को ये जवाब नागवार गुज़रा और उसने सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह से कहा, आप सब को अपने ही जैसा बना लेना चाहते हैं, सरकार महबूबे इलाही निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया अपने जैसा नहीं बल्कि अपने से बेहतर बनाना चाहता हूँ,
वफ़ात
आप रहमतुल्लाह अलैह की वफ़ात बादशाह मुहम्मद तुगलक के दौरे हुकूमत में 726/ हिजरी मुताबिक 1325/ ईसवी में वफ़ात पाई।
मज़ार
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक, सरकार निज़ामुद्दीन औलिया देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह में था।
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
रहनुमाए मज़ाराते दिल्ली

