विलादत बसआदत
आप की विलादत मुल्के ईरान के शहर दिनोर! में हुई, अफ़सोस की आप की तारीखे विलादत हमें ना मिल सकी, मुक़्तदए तरीकत, आरिफ़े हकीकत, शैख़े वक़्त, शम्सुल फुकरा, हुज्जतुल आबिदीन, हाफिज़े कुरआन शरीफ, हज़रत ख्वाजा शैख़ मुम्शाद उलू दिनोरी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! आप रहमतुल्लाह अलैह को खिरकए इरादत, हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू हुबैरा बसरी रहमतुल्लाह अलैह से मिला था, और आप रहमतुल्लाह अलैह! अकसर पीरे अकमल हज़रत शैख़ माअरूफ़ करख़ी रहमतुल्लाह अलैह की खिदमत में भी हाज़िर रहते थे, और आप से फियूज़ो बरकात हासिल करते थे, बाज़ हज़रात कहते हैं के हज़रत ख्वाजा शैख़ मुम्शाद उलू दिनोरी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह! ने हज़रत शैख़ माअरूफ़ करख़ी रहमतुल्लाह अलैह से खिलाफ़तो इजाज़त हासिल की थी, वल्लाहु आलम।
सात रोज़ में खात्मे कुरआन
हज़रत ख्वाजा शैख़ मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! अक्सर बुज़ुर्गाने दीन की सुहबत में रहते थे, और हर एक से कुछ ना कुछ सीखते थे, मुरीद होने से पहले आप तीस साल तक रियाज़तो मुजाहिदा में मशगूल रहते थे, आप रहमतुल्लाह अलैह सात रोज़ के बाद इफ्तार करते, और मुंह की खुश्की दूर करने के लिए दो घूँट पानी के लिए और एक खजूर पर क़नाअत करते थे।
आप का दुनिया तर्क करना
हज़रत ख्वाजा शैख़ मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! अवाइल (शुरू) ज़िन्दगी से ही दौलत मंद थे, जब अल्लाह पाक की मुहब्बत में आप रहमतुल्लाह अलैह ने दुरवेशी फकीरी इख़्तियार की, अल्लाह पाकी जानिब लौ लगाई, तो अपना सारा मालो मतआ अल्लाह की राह में गुरबा मसाकीन को तकसीम कर दिया, यहाँ तक के अपने लिए रोज़ा इफ्तार का सामान भी नहीं रखा, फिर क़िबला रू होकर फ़रमाया के इलाही सिवाए तेरी रज़ा के मुझे और कुछ नहीं चाहिए, मेरे अहलो अयाल का तू मुहाफ़िज़ है, और ये कह कर मक्का शरीफ के लिए रवाना हो गए, और वहीँ इबादतों रियाज़त में मशगूल हो गए,
एक दिन हज़रत ख्वाजा शैख़ मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! अपने हुजरे में बैठे हुए थे, एक शख्स सर पर खाने का सामान लिए आ रहा है, उस ने आ कर सलाम किया और एक तरफ खड़ा हो गया, आप रहमतुल्लाह अलैह ने पूछा तुम कौन हो, और ये सामान किस ने भेजा है, आने वाले ने जवाब दिया के में मर्दाने गैब से हूँ अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने हुक्म दिया है, के इस खाने को में आप के घर पंहुचा दूँ, और आप को भी अल्लाह पाक ने ये हुक्म दिया है, के आप अपने काम में कोई कोताही ना करें, आप रहमतुल्लाह अलैह ने सज्दए शुक्र अदा किया, और अल्लाह पाक की इबादत में लग गए, आप रहमतुल्लाह अलैह बराबर फ़क्ऱो फाका की ज़िन्दगी गुज़ारते और पेबंद लगा हुआ कपड़ा पहिनते और ख़ौफ़े खुदा से बाज़ औकात इतना रोते के बेहोश हो जाते।
हज़रत खिज़र अलैहिस्सलाम से मुलाकात
हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! से हज़रत खिज़र अलैहिस्सलाम अक्सर मुलाकात के लिए आते थे, एक दिन हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! ने हज़रत खिज़र अलैहिस्सलाम से पूछा के इबादतों रियाज़त मुजाहिदा में बराबर कर रहा हूँ, और खुदा की मुहब्बत में मगन हूँ, लेकिन मालूम नहीं मेरा अंजाम क्या होने वाला है, हज़रत खिज़र अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया के ऐ उलू! अल्लाह पाक जिस को अपना दोस्त बनाता है, उस के दिल में अपना खौफ डाल देता है, और उसको अपना असीरे मुहब्बत बना लेता है, और तुम में खशीयते इलाही और हुब्बे इलाही, दोनों ही मौजूद हैं, लेकिन तुम को किसी कामिल दुर्वेश की बहुत ज़रूरत है,
हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! आप ही कुछ पता बता दीजिये, फिर हज़रत खिज़र अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया के हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू हुबैरा बसरी रहमतुल्लाह अलैह इस दौर में बहुत अज़ीम बुज़रुग हैं, जिस पर इनकी नज़र पड़ जाती है, वो शैख़े कामिल हो जाता है, तुम उन से ही मुरीद हो जाओ, हज़रत खिज़र अलैहिस्सलाम के हुक्म पर हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू हुबैरा बसरी रहमतुल्लाह अलैह की खिदमत में हाज़िर हुए, हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू हुबैरा बसरी रहमतुल्लाह अलैह ने आप को देख कर फ़रमाया: ऐ उलू! तुम्हारा काम हमेशा बुलंद रहेगा, में अल्लाह पाक से दुआ करता था, के वो तुम को मेरा जानशीन बना दे, फिर आप को अपने साथ खल्वत में बिठा कर औरादो वज़ाइफ़ में लगा दिया, यहाँ तक के सारे हिजाब परदे उठ गए, और अर्श से तह्तुस सरा तक आप पर सब रोशन हो गया, फिर मुर्शिद ने फ़रमाया के ऐ उलू! अभी बुलंदी तक पहुंचने में देर है, ये दर्जा तो मुब्तदीयों का है अगर मुनतहि लोग लौहे महफूज़ देख लें, तो इन्हें पता चले के कुछ देखा।
बैअतो खिलाफत
हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! जब कुछ अरसे तक अपने मुर्शिद की खिदमत में रह कर इबादतों रियाज़त मुजाहिदा कर चुके, तो एक दिन मुर्शिद ने फ़रमाया: ऐ उलू! तुम्हारा काम मुकम्मल हो गया, जाओ वुज़ू बना कर आओ, आप ने वुज़ू बनाया, फिर मुर्शिदे करीम हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू हुबैरा बसरी रहमतुल्लाह अलैह ने इन का हाथ पकड़ा और फ़रमाया के ऐ अल्लाह पाक “उलू” को दुरवेशी के आला मकाम पर पंहुचा दे, इस जुमले के कहते ही हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! बेहोश हो गए थोड़ी देर के बाद होश आया फिर बेहोश हो गए, इस तरह चालीस मरतबा होश में आ कर बेहोश होते रहे, आखिर में आप के पीर रोशन ज़मीर हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू हुबैरा बसरी रहमतुल्लाह अलैह ने आप के दहिन मुबारक में अपना लुआबे दहिन डाल दिया, इस मर्तबा जब आप होश में आए तो हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू हुबैरा बसरी रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया के तुमने अपने मतलूब और मक़सूद को देख लिया है, आप ने सरे नियाज़ झुका कर अर्ज़ किया, के तीस 30/ साल की रियाज़त में जिस गंजे सआदत को में नहीं पा सका, आप के तुफैल से चश्मे ज़दन में पा लिया, फिर हज़रत ख्वाजा शैख़ अबू हुबैरा बसरी रहमतुल्लाह अलैह ने अपना कम्बल खिरकए खिलाफत जो इन्हें बुज़ुर्गों से मिला था, वो हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! को आता फ़रमाया और अपनी मसनदे सज्जादगी पर आप को बिठाया,।
अगर बशारत मिलती तो मुरीद करते
हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! जब किसी को मुरीद करना चाहते तो पहले मुराकिबा करते, अगर आप को बशारत होती तो मुरीद करते वरना नहीं, आप से जो मुरीद होता वो पहले ही रोज़ अर्श से फर्श को देख लेता था, आप थोड़ी देर कैलूला के अलावा कभी नहीं सोते, चारपाई पर बिलकुल नहीं लेटते थे, और हमेशा औरादो वज़ाइफ़ ज़िक्रे खुदा और कुरआन शरीफ की तिलावत में मशगूल रहते थे।
कुफ्फार का इस्लाम कबूल करना
एक मर्तबा काफिरों की बहुत बड़ी जमात पूजा पाठ के लिए कहीं जा रही थी, हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! की नज़र इन लोगों पर पड़ी तो आप रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया ऐ लोगों अल्लाह पाक के अलावा किसी और की पूजा करने में तुम्हे शर्म नहीं आती, बस इतना फरमाना था के इन सब लोगों के दिल पर से जिहालत की तारीकी दूर हो गई, और वो सब के सब आप के हाथ पर ईमान ले आए, फिर आप ने इन सभी के लिए दुआ फ़रमाई, के इलाही! ये भटके हुए बन्दे तेरे दरबार में हाज़िर हो गए हैं, इन पर महरबानी और लुत्फ़ो करम फरमा, आवाज़ आई के ऐ उलू! इन लोगों के लिए तो जो दुआ मांगेगा, में कबूल करूंगा, आप ने इन लोगों के लिए दुआ फ़रमाई, और उसी वक़्त इन सभी पर सारे हक़ाइक़ रोशन हो गए, और वो सब इबादत और ज़िक्रे खुदा में मसरूफ हो गए, और थोड़े ही अरसे में मतलूबे हकीकी तक पहुंच गए,
वो पानी पर चल रहा है
एक शख्स हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! की खिदमत में हाज़िर हुआ, और आप से दुआ के लिए कहा के हज़रत! मेरे हक में दुआ करें, तो आप रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया के खुदा! से कहो ताके तुम्हे मुम्शाद उलू, की दुआ की हाजत ना रहे, उस ने पूछा बताइए के अल्लाह पाक कहाँ मिलेगा, आप रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया जहाँ तुम नहीं होगे, ये सुनकर वो आदमी चला गया, और उस आदमी ने गोशा नशनी इख़्तियार करली, और ऐसे बुलंद मक़ाम पर पहुंच गया, के एक मर्तबा ईरान के शहर दिनोर! में अज़ीम सैलाब आया, और लोग मुतावाहिश हो कर इधर उधर भागने लगे, तो देखा के वो शख्स सामने अपनी जानमाज़ पर बैठा आ रहा है, और वो जानमाज़ कश्ती की तरह पानी पर चल रही है, हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! ने ये देख कर उससे पूछा के ये सब क्या है? उसने जवाब दिया के ये सब आप की दुआओं की बरकत से है, आप तो जानते ही हैं, में क्या अर्ज़ करूँ।
आप के मलफ़ूज़ात शरीफ
हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! फरमाते थे, के अल्लाह पाक ने आरिफ के सर में एक आइना लगा दिया है, के वो जब इस तरफ देखता है, उस को अल्लाह पाक का जलवा नज़र आता है, एक मोके पर आप रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया के जो शख्श अल्लाह के दोस्तों के साथ दोस्ती करने से इंकार करता है, उस की मामूली सज़ा ये है के जिस चीज़ की इस को ज़रुरत होती है उसे नहीं मिलती, फिर फ़रमाया के दुनिया वाले जिन चीज़ों को पसंद करते हैं, उन से अपने को अलग रखना ही दिल की सफाई है, एक बार फ़रमाया के दिल और नफ़्स की ख्वाहिशात को दबाने का नाम ही तवक्कुल है, और मखलूके खुदा को वहदानियत पर इकठ्ठा करने को इज्तिमा और शरीअत में तफरका डालने को इंतिशार कहते हैं, आप रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं के हुक्म को अक्लो हिकमत की दौलत ख़ामोशी और तफ़क्कुर से मिलती है नीज़ तसव्वुफ़ से मुराद सफाई असरार और अल्लाह पाक की रज़ा पर अमल करना, और बेकार चीज़ों से दूर हटना।
आप के खुलफाए किराम
हज़रत ख्वाजा मुम्शाद उलू दिनोरी रहमतुल्लाह अलैह! के तीन जय्यद खुलफ़ा हुए हैं, हज़रत ख्वाजा अबू इसहाक शमी चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत शैख़ अबू आमिर रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत शैख़ अहमद अस्वद दिनोरि रहमतुल्लाह अलैह।
वफ़ात
आप रहमतुल्लाह अलैह का विसाल 14/ मुहर्रमुल हराम, 299/ हिजरी में हुआ।
मज़ार
आप रहमतुल्लाह अलैह का मज़ार मुबारक: मुल्के ईरान के शहर दिनोर में मरजए खलाइक है,
“अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की उन पर बेशुमार रहमत हो और उन के सदके में हमारी मगफिरत हो”
रेफरेन्स हवाला
- मिरातुल असरार
- हयाते शैखुल आलम
- ख़ज़ीनतुल असफिया
- सीयरुल अक्ताब

