नाइबुन नबी फिल हिन्द सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की हिंदुस्तान में तशरीफ़ आवरी से पहले बहुत औलियाए किराम हिंदुस्तान के मुख्तलिफ इलाकों में तशरीफ़ ला कर गैर मुस्लिम हिन्दुओं को दअवते हक दे चुके थे, उन की तब्लीग का ये असर हुआ था, के हिंदुस्तान के मुख्तलिफ इलाकों में बहुत से लोग मुस्लमान हो चुके थे, लेकिन हिंदुस्तान में इस्लाम अभी एक हमागीर ताकतो कुव्वत की हैसियत से नहीं उभरा था, आप रदियल्लाहु अन्हु! की तशरीफ़ लाने से हिंदुस्तान में एक ज़बरदस्त रूहानी और समाजी इन्किलाब साबित हुआ, और दीने हक ने इस सरज़मीन में एक हमागीर हैसियत इख्तियार करली, आप रदियल्लाहु अन्हु! की तशरीफ़ लाने से क़ब्ल हिंदुस्तान की सियासी ताकत ऊंची ज़ात के हिन्दू राजाओं के हाथ में थी, जो परले दर्जे के शिर्क सरकश और मुताकब्बिर थे, आम लोगों की मज़हबी, तमद्दुनी और अख़लाक़ी हालत इंतिहाई पस्त हो चुकी थी, जाहिलाना ज़ईफ़ुल ऐतिकादि कुफरो शिर्क, ओहामपरस्ती, ज़ात पात का इम्तियाज़ छूत छात, इन का ओढ़ना बिछोना था, पथर, दरख्त, सांप, चौपाए, गए, गोबर, उनके मअबूद थे, ऐसे हालात की इस्लाह के लिए सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! को तबलीग़े इस्लाम की खातिर हिंदुस्तान की तरफ बा हुक्म हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम आना पड़ा।
लाहौर में हज़रत दाता गंज बख्श अली के मज़ार पर हाज़री
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! जब हिंदुस्तान के सफर के लिए रवाना हुए तो आप के साथ हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत शैख़ मुहम्मद यादगार सब्ज़वारी रहमतुल्लाह अलैह, हज़रत ख्वाजा फखरुद्दीन गुरदेज़ी और दीगर साथी भी थे, तवील सफर करने के बाद सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! लाहौर में आए यहाँ क़याम के दौरान आप आप रदियल्लाहु अन्हु! हज़रत दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार मुबारक पर हाज़िर हुए, और मज़ार शरीफ के करीब पाएंती कदमो की जानिब आप रदियल्लाहु अन्हु! ने चिल्ला किया, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! का चिल्ला गाह आज भी हज़रत दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार मुबारक के ऐन सामने एक हुजरे की शक्ल में मौजूद है, बररे सगीर हिन्दो पाक में हज़रत दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह को औलियाए किराम में एक बुलंदो वाला रुतबा हासिल है, और चिल्ला ख़त्म होने के बाद, रूहानी फ़ैज़ो कमालात से मुतअस्सिर हो कर आप की शाने अक़दस में ये शेर कहा जो आलमगीर शुहरत का हामिल है, और आज तक हज़रत दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार मुबारक पर लिखा हुआ है: वो शेर ये है:
गंज बख्श फैज़े आलम मज़हरे नूरे खुदा
नाक़िसा रा पीरे कामिल कामिला रा रहनुमा
शेर का तर्जुमा ये है के: हज़रत दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह ख़ज़ाने लुटाने वाले, आलम को फैज़ पहुंचाने वाले, और अल्लाह पाक के नूर के मज़हर हैं, और आप रहमतुल्लाह अलैह नकिसों के लिए पीरे कामिल, और कामिलो के लिए रहनुमा है, ऐ ईमान वालों, आज कुछ बद अक़ीदह और मुनाफिक लोग मज़ाराते औलिया पर हाज़री देने और अल्लाह पाक के वालियों की कबरों से फ़ैज़ो बरकत हासिल करने को शिरको बिदअत कहते हैं, वो लोग अपने होश को संभालें और बद अकीदगी मुनाफिकत से तौबा करें, अगर औलियाए किराम के मज़ारों कबरों पर हाज़री और उन से फ़ैज़ो बरकात हासिल करना कुफ्रो शिर्क होता, तो हादीए हिंदुस्तान सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! हज़रत दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार मुबारक पर हरगिज़ हाज़री नहीं देते, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के इस अमल से साफ़ तौर पर साबित हो गया, के अल्लाह पाक के महबूब बंदों औलियाए किराम के मज़ाराते मुक़द्दसा और कबरों पर हाज़री देना अल्लाह के नेक बंदों और हमारे प्यारे सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की आदतो सुन्नत है,
हज़रत दाता गंज बख्श अली हजवेरी रहमतुल्लाह अलैह के मज़ार मुबारक पर हाज़री की सआदत हासिल करने के बद सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! अपनी मंज़िल की तरफ रवाना हो गए।
सफरे पटियाला
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की तशरीफ़ आवरी से 12/ साल क़ब्ल राजा पिरथवी राज की वालिदा ने अपने आप को आगाह कर दिया था, के आज से 12/ साल बाद अजमेर में एक दुर्वेश इस शक्लो सूरत इस वज़ाह कतआ का चालीस हमराहियों के साथ आएगा उस दुर्वेश के हाथों तेरी सल्तनत का खात्मा होगा, पिरथवी राज की माँ इल्मे नुजूम की माहिर थी, पिरथवी राज ने उसी दौर से अपनी तमाम कलमरू में हुक्म नाफ़िज़ कर दिया के आज की तारीख से, अगर कोई मुस्लमान फ़कीर इस सूरतो शक्ल का चालीस हमराहियों के साथ हमारी हुदूदे सल्तनत में दाखिल हो तो उस को फ़ौरन क़त्ल कर दिया जाए,
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! लाहौर से रवाना हो कर पटियाला पहुंचे तो पिरथवी राज के सिपाहियों ने आप को शनाख्त कर लिया, हाकिम को इत्तिलाआ दी गई, हाकिम के हुक्म से सिपाहियों ने अज़राहे फरेब हज़रत! से अर्ज़ किया के अगर इरशाद हो आप के क़याम के लिए जगह तजवीज़ करदीं, हाकिमे पटियाला ने भी इज़हारे अकीदत के तौर पर आप की खिदमत में दावत नामा भेजा, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने मुराकिबा फ़रमाया, हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम ने फ़रमाया ये लोग मक्कारो दग़ा बाज़ हैं, इनकी बातों में न आना, दरबारे रिसालत से हिदायत हासिल होते ही सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने दावत रद्द करदी और फ़रमाया: “हम लोग फ़कीर हैं एक जगह क़याम नहीं करते” चुनांचे आप उनको इंकार करते हुए आगे की तरफ रवाना हो गए, सिपाहियों को ये जुरअत ही ना हो सकी के आप को रोकने की कोशिश करते,
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! पटियाला से रवाना हो कर दिल्ली पहुंचे उन दिनों हिंदुस्तान की सियासी सूरते हाल कुछ इस तरह की थी के हिंदुस्तान में चूंके गैर मुस्लिम अक्सरियत से थे, और मुसलमानो की तादाद बहुत कम थी सुल्तान महमूद ग़ज़नवी के हमलों की वजह से हिंदुस्तान में मुसलमानो के खिलाफ निहायत गमो गुस्सा की लहर पाई जाती थी, और फिर जब सुल्तान शहाबुद्दीन गौरी पिरथवी राज की फौज से शिकस्त खा कर वापस चला गया तो इस वाकिए ने जलती पर तेल का काम किया, और हिन्दुओं के हौसले इस क़द्र बढ़ गए थे, के नफरत और तअस्सुब के बाइस अगर कहीं कोई मुस्लमान उनके हथ्थे चढ़ जाता तो उस को मौत के घाट उतार देते थे, चुनांचे ऐसी ही नफरत और तअस्सुब की फ़ज़ा में सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! अपने साथियों के हमराह दिल्ली पहुंचे और राज मंदिर और राज महल के दरमियान में पड़ाऊ डाल दिया, आप और आप के साथियों की आमद सुनकर शहर दबदबा के बाइस किसी किस्म का नुकसान पहुंचाने की जुर्रत ना कर सके और हैबत ज़दा हो कर वापसी की राह ली,
शहर के हिन्दुओं का एक वफ्द दिल्ली के एक हाकिम खांडे राओ के पास गया, और उससे फरयाद की के माहा राज! हमारे देवता इन मुस्लमान फकीरों से नाराज़ हो रहे हैं, अगर इन लोगों को फ़ौरन शहर से बाहर नहीं निकाला गया, तो देवताओं का क़हर नाज़िल हो जाएगा, और सल्तनत तबाह हो जाएगी, खानडेराओ ने इस बात में ज़रा सी भी देर नहीं लगाईं और हुक्म दिया के इन मुस्लमान फकीरों को शहर से बाहर निकल दिया जाए, खांडेराव के हुक्म पर एक पुलिस अफसर अपने मातहत सिपाहियों के हमराह सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के पास आया और आप से गुफ्तुगू का आगाज़ किया, आप ने आने की ग़र्ज़ो गायत बयान की, और ये भी कहा के हाकिम ने हुक्म दिया है के अगर ये लोग आराम से नहीं जाएं तो इन को ज़बरदस्ती शहर से निकाल दिया जाए, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने पुलिस वालों से इस कद्र हुसने अख़लाक़ से गुफ्तुगू फ़रमाई के आप की बातें उन के दिलों में घर कर गईं, और वो आप से बहुत मुतअस्सिर हुए ये भी आप की करामात का फैज़ था के आप को ज़बरदस्ती शहर बदर कर ने के लिए आने वाले इस्लाम की अब्दी रौशनी से अपने सीनो को मुनव्वर कर बैठे और आप के दस्ते हक परस्त पर इस्लाम कबूल कर के मुस्लमान हो गए,
उन लोगों के इस्लाम कबूल करने और आप के हल्काए इरादत मुरीदी में शामिल होने से दूसरे लोग भी बहुत मुतअस्सिर हुए, और इस तरह थोड़े ही दिनों में काफी राजपूत दाईराए इस्लाम में दाखिल हो गए, आप की इस करामात की धूम मच गई, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने अपने मुरीदे ख़ास और ख़लीफ़ए आज़म हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी देहलवी रहमतुल्लाह अलैह को इस्लाम की तब्लीग के लिए दिल्ली में छोड़ कर अजमेर शरीफ की तरफ रवानगी इख़्तियार की।
अजमेर शरीफ की तारीखी अहमियत
अजमेर! हिंदुस्तान का एक निहायत कदीम और तारीखी शहर है, यूं तो इसे तारीख के हर दौर में कुछ न कुछ अहमियत हासिल रही है, लेकिन सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! का आस्ताना! होने की वजह से उसे जो शुहरत और नामवरी हासिल हुई है वो बे मिसाल और लाज़वाल है, ये शहर हिंदुस्तान के शुमाल मगरिब में कोहे अरावली के दामन में वाके है, इर्दगिर्द कई छोटी छोटी बड़ी बड़ी पहाड़ियां हैं, अजमेर! की बुनियाद दूसरी सदी ईसवी में राजा वासदीयो! ने डाली थी, कदीम शहर मौजूदा शहर के जुनूब मगरिब में था, आज भी उस के खंडरात देखे जा सकते हैं, मुख्तलिफ अदवार में इसे मुख्तलिफ नामो से पुकारा गया, मसलन जैद रुक, जैमेर, अदमेर, जिया नगर, जलूपुर, वगेरा वगेरा, मशहूर बुद्ध राजा कंशिक! () के बाद इस के बेटे हवेशक! ने 140/ ईसवी तक बड़ी आन बान से हुकूमत की, हवेशक! के बाद राजा वासदीयो गद्दी नशीन हुआ, लेकिन वो अपने बाप और दादा की तरह एक मज़बूत हाकिम साबित ना हुआ, और जगह जगह बगावत की आग भड़क उठी, बागियों में रियासते अनहल पुर का राजा अजयपाल भी था, इस का पायाए तख़्त गुजरात था, वो कंशिक खानदान का बाजगुज़ार था, उसने राजा वासदीयो! की फोजों को शिकस्त दे कर राजपूताना की काफी इलाके पर कब्ज़ा कर लिया, उन में अजमेर का इलाका भी शामिल था, राजा अजयपाल ने अजमेर को अपना पायाए तख़्त करार दे कर एक जुदागाना सल्तनत काइम करली, कहा जाता है के अजमेर की बुनियाद राजा वासदीयो!ने पहले ही डालदी थी अलबत्ता उस को रौनक और वुसअत राजा अजयपाल ने दी,
अजमेर! पर मुद्दतों राजा अजयपाल के खानदान की हुकूमत रही 330/ हिजरी में गपत खानदान के बुलंद हिम्मत राजा समंदर गपत ने तमाम शुलामी हिन्द, पर राजपूताना पर कब्ज़ा कर लिया, इसी तरह अजमेर पर पांचवी सदी ईसवी तक गपत खानदान की हुकूमत रही, कुमार गपत के अहिद में वस्त एशिया के वहशी कबाइल ने हिंदुस्तान पर हमला किया और एक वसी इलाके को तख्तो तराज कर डाला, गपत खानदान की हुकूमत भी इन की वहशत व बर्बरियत के तूफ़ान में बह गई और अजमेर के राजा ने भी इस नई ताकत का जूआ अपनी गर्दन में डाल दिया, तकरीबन डेढ़ सौ साल राजपूताना में तवाईफुल मलूकी का दौर दौराः रहा, बिला आखिर अजमेर पर चौहान! राजाओं की हुकूमत कायम हो गई, और उन्होंने उसे एक मुस्तकिल रियासत की हैसियत दे कर बड़ी तरक्की दी, दसवीं सदी ईसवी के आखिर में हाकिमे गज़नी नासिरुद्दीन सुबुक्तिगीन ने हिंदुस्तान पर हमला किया, काबुल और पंजाब के राजा जयपाल ने इस का मुकाबला किया, मुगान, और गज़नी के दरमियान एक मकाम पर 979/ ईसवी में राजा जयपाल और इस्लामी फोजों के दरमियान एक ख़ूंरेज़ी जंग हुई, जिस में राजा जयपाल ने शिकस्त खाई और उसने खिराज देने के वादे पर बादशाह सुबुक्तिगीन से सुलाह करली,
लाहौर पहुंच कर राजा अजयपाल अपना वादा भूल गया, और बादशाह सुबुक्तिगीन के खिलाफ फिर जंगी तैयारियों में मशगूल हो गया, वतन, कौम, और मज़हब के नाम पर उस ने अजमेर, कालंजर, दिल्ली, और कन्नौज, के ताकतवर राजाओं से मदद मांगी, इन राजाओं ने फ़ौरन अपनी अफ़वाज अजयपाल की मदद के लिए भेज दीं, गर्ज़ थोड़े ही दिनों में एक लश्करे जर्रार जयपाल के झंडे के नीचे जमा हो गया, बादशाह सुबुक्तिगीन ने ये हालात सुने लेकिन वो हिंदुस्तानी फौजों की कसरत से हिरासां नहीं हुआ, और अल्लाह पाक के भरोसे से तमाम हिंदुस्तान की मुत्तहिदा फौजी ताकत से लड़ गया, बादशाह सुबुक्तिगीन के मुजाहिदों ने हिंदुस्तानी लश्कर के परखचे उड़ा दिए, और काबुल, और पिशावर का तमाम इलाका सलतनाते गज़नी के ज़ेरे इक्तिदार आ गया, राजा अजयपाल ने शर्म के मारे खुद कुशी करली, इस के बाद इस का बेटा आनंद पाल गद्दी नशीन हुआ तख्तपर बैठा, इधर बादशाह सुबुक्तिगीन ने 997/ ईसवी में वफ़ात पाई, और इन का ऊलुल अज़्म बेटे महमूद ग़ज़नवी तख़्त नशीन हुआ,
आंनद पाल ने अपने बाप का इंतिकाम लेने के लिए, सुल्तान महमूद ग़ज़नवी से छेड़ छाड़ शुरू करदी, पहले तो वो शिकस्त खा कर कश्मीर भाग गया लेकिन, दूसरे साल 1006/ ईसवी में उस ने एक ज़बरदस्त लश्कर जमा कर लिया जिस में ग्वालियर, उज्जैन, अजमेर, दिल्ली, कन्नौज, वगेरा के राजाओं की फौजें भी शामिल थीं, इस लश्करे जर्रार ने पिशावर के करीब सुल्तान महमूद ग़ज़नवी का का मुकाबला किया, निहायत खौफनाक लड़ाई के बाद सुल्तान महमूद ग़ज़नवी ने आंनदपाल की फोजों को शिक्सते फाश दी और कांगड़ा तक चढ़ आया, इस के बाद इस ने हिंदुस्तान पर कई हमले किए और मथरा, कन्नौज सोमनात वगेरा से बहुत सा माले गनीमत ले कर वापस हुआ, 1024/ ईसवी में सुल्तान महमूद ग़ज़नवी ने अजमेर पर हमला किया, अजमेर के राजा बेसल देओ ने शिकस्त खाई और इस्लाम कबूल कर के तख़्त से दस्तबरदार हो गया, सुल्तान महमूद ग़ज़नवी ने सालार साहू को अजमेर का हाकिम मुकर्रर किया और खुद वापस गज़नी चला गया, जहाँ सुल्तान महमूद ग़ज़नवी 1030/ ईसवी में वफ़ात पाई, ईसवी में राजपूतों ने अजमेर के मुसलमानो और मुस्लमान हाकिम को क़त्ल कर के सारंग देओ को अजमेर की गद्दी पर बिठा दिया, सारंग देओ कुछ दिनों बाद मर गया और अजमेर की हुकूमत राजा अन्ना देओ के हाथ आई, इस ने अजमेर में एक बड़ा तालाब बनवाया था, जो आज भी आना सागर के नाम से मौजूद है, राजा अन्ना देओ के बाद राजा पिरथवी राज, या राय पिथोरा की हुकमत काइम हुई, इस राजा के दौरे हुकूमत में अजमेर को बड़ा उरूज हासिल हुआ, और इसी के अहिद में सुल्तानुल हिन्द, ख्वाजाए, ख्वाजगान, हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज़ मुईनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह, का हिंदुस्तान में तशरीफ़ लाए, राजा पिरथवी राज ने तारागढ़ का किला संगे सुर्ख से तामीर कराया, ये इतना मज़बूत और खूब सूरत किला था के दूसरी राजपूत रियासतें इस पर रश्क करती थीं, 1191/ ईसवी में
सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी ने हिंदुस्तान पर हमला किया पिरथवी राज और दूसरे हिन्दू राजाओं ने मुत्तहिद हो कर तिरावड़ी के मैदाइन में इस का मुकाबिला किया, सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी लड़ाई में ज़ख़्मी हुआ, और इस की फौज ने शिकस्ता दिल हो कर हज़ीमत उठाई, सुल्तान शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरीको इस शकिस्त का बहुत कलक (गम) था, चुनांचे 1193/ ईसवी में इस ने फिर हिंदुस्तान पर चढ़ाई की, राजा पिरथवी राज और दूसरे हिन्दू राजा (जिन की तादाद एक सो पचास थी) पूरे साज़ो सामान के साथ फिर तिरावड़ी या तराइन, के मैदान में मुकाबले के लिए तय्यार हो कर आ गए, निहायत ख़ूंरेज़ी के बाद हिंदुस्तानी फोजों को शिकस्ते फाश हुई, पिथवी राज और बीसीयों दूसरे राजा लड़ाई में काम आए, इस फ़तेह अज़ीम के बाद सुल्तान महमूद ग़ज़नवी ने दिल्ली और अजमेर पर कब्ज़ा कर लिया और हिंदुस्तान में इस्लामी हुकूमत की बुनियाद रखी,
1380/ ईसवी में सुल्तान फ़िरोज़ शाह तुगलक की वफ़ात के बाद दिल्ली की मरकज़ी हुकूमत कमज़ोर हो गई, और तख़्त के मुख्तलिफ दावेदारों में खाना जंगी बरपा हो गई, राजपूतो ने इस मोके से फायदा उठाया और 1400/ ईसवी में अजमेर पर कब्ज़ा कर लिया, चुनांचे 55/ साल तक मेवाड़ के राजगान अजमेर पर काबिज़ रहे, 1445/ ईसवी में मांड़ू, के बादशाह ने अजमेर फ़तेह कर लिया, 1505/ ईसवी में राजगाने मेवाड़ ने फिर अजमेर पर हमला किया और उस पर कब्ज़ा कर लिया, 28/ साल के बाद 1533/ ईसवी में गुजरात के बादशाह ने एक ख़ूंरेज़ जंग के बाद अजमेर राजगाने मेवाड़ से छीन लिया अगले ही साल मारवाड़ के राठौर खानदान ने गुजरात के बादशाह की फोजों को अजमेर से निकल दिया, और 1556/ ईसवी तक अजमेर पर हुकूमत करता रहा, 1556/ ईसवी में बादशाह जलालुद्दीन अकबर ने अजमेर फ़तेह कर लिया और इस तरह सौलवी सदी के वस्त में अजमेर ताकतवर मुग़ल सल्तनत का एक हिस्सा बन गया,
मुग़ल बादशाहों ने अजमेर शरीफ को बहुत तरक्की दी, यहाँ इन्होने बड़ी बड़ी आलिशान और मज़बूत इमारतें बन वाइं, और खुद बा नफ़्से नफीस वक्तन फवक्तन आस्तानाए ख्वाजा गरीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह पर हाज़री देते रहे, 1556/ ईसवी से 1747/ ईसवी तक का ज़माना अजमेर की तारिख का निहायत शानदार दौर था, हज़रत औरंगज़ेब आलमगीर रहमतुल्लाह अलैह की वफ़ात के बाद मुग़ल हुकूमत का शीराज़ा बिखरना शुरू हो गया, तख़्त के मुख्तलिफ दावेदारों की बाहमी लड़ाई झगडे ने सल्तनत की जड़ें खोखली कर दीं, मुस्लमान बादशाह और उमरा रऊसा तीरो सनान के बजाए चंगो रिबाब ढोल बाजे से दिल बहलाने लगे, 1739/ ईसवी में नादिर शाह के हमले ने रही सही कसर भी निकाल दी, और मुगलिया सल्तनत का ज़वाल अपनी इंतिहा को पहुंच गया, बीसीयों राजाओ, और नवाबों और खुदमुख्तार बन बैठे और मुल्क टुकड़े टुकड़े हो गया, अब्तरी के उस दौर में 1743/ ईसवी में अजमेर शरीफ पर जोधपुर के राठौर राजाओं ने कब्ज़ा कर लिया, 1756/ ईसवी में गवालियर का राजा संधिया ने अजमेर शरीफ! पर कब्ज़ा कर लिया, 1787/ ईसवी तक अजमेर शरीफ मरहटों के कब्ज़े में रहा, 1787/ ईसवी में राठौरों ने मरहटों, को अजमेर शरीफ! से निकाल दिया और चार साल तक अजमेर शरीफ पर काबिज़ रहे 1797/ ईसवी में मरहटों ने फिर अजमेर शरीफ! पर कब्ज़ा कर लिया, 1818/ ईसवी में बाबू राओ संधिया, और ईस्टइंडिया कंपनी के दरमियान एक मुआहिदा की रू से अजमेर शरीफ ईस्टइंडिया कंपनी के कब्ज़े में चली गई, 1947/ ईसवी तक ईस्टइंडिया कंपनी पर अंग्रेज़ों की हुकूमत रही, 1947/ ईसवी में हिंदुस्तान आज़ाद हो गया, और अजमेर शरीफ आज हमारे हिंदुस्तान का अहम तरीनशहर है।
अजमेर शरीफ में क़याम
हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम के बातनी फरमान के मुताबिक सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! सरज़मीने अजमेर शरीफ! में 587/ हिजरी मुताबिक 1192/ ईसवी में दीने इस्लाम की तब्लीग की खातिर पहुंच गए, उस वक़्त अजमेर शरीफ! में चौहान खानदान का मशहूर राजा राए पिथोरा या पिरथवी राज हुकूमत कर रहा था, उस की हुकूमत एक वसी इलाके में फैली हुई थी, और दिल्ली का अहम शहर भी इसी के कब्ज़े में था, पिरथवी राज अपने हम अस्र तमाम हिन्दू राजाओं से ज़ियादा ताकतवर और दिलेर था, उस वक़्त हिंदुस्तान में एक मरकज़ी ताकत की हैसियत रखता था, हिन्दू कोम आज तक पिरथवी राज को अपना हीरो मानती है, और उस के शुजाअत के गीत गाती है, पिरथवी राज का पायाए तख़्त होने की वजह से अजमेर शरीफ! भी हिंदुस्तान भर में सियासी लिहाज़ से मरकज़ी अहमियत का हामिल था।
राजा के ऊँट बैठे रह गए
अजमेर शरीफ! पहुंचने ने के बाद सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! और आप के साथियों ने शहर के बाहर एक मैदान में एक दरख्त (पेड़) के नीचे क़याम फ़रमाया, मैदान में पिरथवी राज के ऊँट बैठा करते थे, राजा के मुलाज़िमों को इन दुरवेशों का इस मैदान में बैठना बहुत ना पसंद गुज़रा, और उन्होंने अल्लाह के इन नेक मुक़द्दस बंदों को ये मैदान छोड़ देने के लिए कहा, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने फ़रमाया: भाई ये मैदान काफी बड़ा है, राजा के ऊँट भी यहीं बैठ जाएंगें,
राजा के मुलाज़िमों ने एक ना सुनी और बदज़बानी पर उतर आए सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! अपने साथियों को ले कर उठ खड़े हुए और फ़रमाया: अच्छा भाई ये जगह ना सही और दूसरी सही, “यहाँ राजा के ऊँट बैठे रहेंगे” कहा जाता है के इहाता दरगाह में एक जगह पर एक चबूतरा है यही वो जगह है जहाँ सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने पहली मर्तबा अजमेर शरीफ में डेरा लगाया था, आखिर सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने अपने साथियों समीत अनासागर नामी जगह पर जाकर क़याम किया, इधर माहा राजा पिरथवी राज के ऊँट मैदान में ऐसे बैठे के उठना ही भूल गए, लोगों के हाथ एक अजीब तमाशा लग गया, शहर भर के लोग मैदान में इकठ्ठे हो गए और शाही सारबानो (ऊँट को चलाने वाला) की इन मुज़हिका ख़ेज़ कोशिशों को देखने लगे जो वो ऊंटों को उठाने के लिए कर रहे थे, राजा को भी खबर हो चुकी थी, वो भी मोके पर पहुंच गया, जब किसी तौर पर भी ऊँट अपनी जगह से ना हिले तो बिला आखिर सारबानो को सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के अल्फ़ाज़ याद आ गए, जो उन्होंने मैदान से उठते हुए कहे थे, उन्होंने डरते डरते राजा से इस बात का ज़िक्र किया,
पिरथवी राज ये सुनकर हैरान भी हुआ और परेशान भी उस के पाऊँ तले से ज़मीन निकल गई, वो सारी बात समझ गया अपनी माँ की पेशन गोई की वजह से वो पहले ही ख़ौफ़ज़दा था, अजमेर शरीफ में एक मुस्लमान की आमद से उसे मुकम्मल यकीन हो गया के माँ की पेशन गोई, वाकई दुरुस्त थी, और अब किसी भी तरह मुमकिन नहीं है के इस मुस्लमान फ़कीर से मुकाबला किया, उसने अपने दिल में ये बात रासिख़ करली के इस फ़कीर का मुकाबला करना मेरे बस में नहीं है, इस कदर ज़बरदस्त इंतिज़ाम और सख्त हुक्म नाफ़िज़ करने के बावजूद मुसलमान फ़कीर का अजमेर पहुंच जाना मेरी मोत और सल्तनत के खात्मे का यकीनी पैगाम है, मगर चूंके वो हिंदुस्तान का सब से ताकतवर और दौलत मंद राजा था इस लिए ये बात उस की शान के खिलाफ थी के वो सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के सामने अपनी बेबसी का इज़हार कर देता,
सारबान की बात सुनकर सोच में पड़ गया सोचने ले बाद कहने लगा, अब मस्लिहत इसी में है के तुम लोग इस दुर्वेश की खिदमत में हाज़िर हो कर उनके कदमो में गिरकर मुआफी मांगो अपनी आजिज़ी ज़ाहिर करो, चुनांचे सारबान ने हुक्म की तामील की, और सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की खिदमत में हाज़िर हुए और आप के कदमो में गिरकर मुआफी मांगी, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने उन की तरफ देखा और इरशाद फ़रमाया, जाओ तुम्हारे ऊँट खड़े हो गए, ये सुनते ही सारबान ने वापस मैदान में आ कर देखा के राजा के ऊँट खड़े हैं, इस वाकिए से सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! की शोहरत इलाके भर में फ़ैल गई।
एक छोटी से बछिया के दूध देने का वाक़िआ
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने अनासागर के किनारे एक सायादार पेड़ के नीचे क़याम फ़रमाया और वहां एक गोवाला (मवेशियों को पलने वाला दूध दूने वाला) राजा की गाएं चरा रहा था, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने गोवाला से फ़रमाया “हमे दूध पिलाओ” गोवाला ने अर्ज़ किया महाराज ये राजा के गायों की बछिया है, इन में से कोई भी दूध नहीं देती, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने एक बछिया की तरफ इशारा करते हुए फ़रमाया, जा इस बछिया का दूध दूला, गोवाला बछिया के पास गया, बछिया के थानों पर हाथ फेरा, थन दूध से भर गया, आप रदियल्लाहु अन्हु! की बरकत से उस बछिया ने बहुत ज़ियादा दूध दिया, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने और आप के साथियों ने सेर होकर दूध पिया इस करामात को देख कर उस गोवाला ने उसी वक़्त इस्लाम कबूल कर लिया।
शादी देओ ने इस्लाम
हिन्दू बिरहमो और पिरथवी राज को जब मालूम हो गया के सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! और उन के साथियों को ताकत से नहीं निकाला जा सकता तो उसने सोचा के इन का मुकाबला किसी बड़े महान से करवाया जाए, जो आप को इल्म के ज़रिए पस्पा कर दे इस मकसद की गर्ज़ से उस ने उस दौर के मशहूर महनत रामदेव से राब्ता किया, और उससे इस काम को करने के लिए कहा, राम्देओ, जो एक हिन्दुओं का बहुत बड़ा महंत! था, और जादूगर के असरारो रुमूज़ भी जानता था, उसने राजा को ये जवाब देते हुए इस काम के करने से मअज़ूरी का इज़हार किया के जिस फ़कीर की आप बात कर रहे हैं, वो बड़ा साहिबे कमाल फ़कीर है, उस का मुकाबला में नहीं कर सकता, राजा राम्देओ को आमादा करने की कोशिश की, रामदेओ ने कहा, अलबत्ता ये बात हो सकती है के में इस फ़कीर से जादूगरी के साथ मुकाबला करूँ, राजा इस बात पर राज़ी हो गया, चुनांचे रामदेव ने अपने तमाम साथी पुजारियों को जादू के कुछ मंतर बताए और उन से कहा के जब हम इस फ़कीर के सामने जाएंगे तो मेरे साथ तुम भी इन मंतरों को पढ़ना इस तरह इस फ़कीर के सामने जाएंगे तो मेरे साथ तुम भी इन मंतरों को पढ़ना इस तरह उस फ़कीर का मुकाबला कर सकते हैं,
सहरो साहिरी की तालीम के बाद रामदेओ महनत अपने तमाम शागिर्दों को हमराह लेकर आनासागर के किनारे आया, रामदेओ महनत सब से आगे था, और उस के पीछे तमाम पुजारी शागिर्द थे जिस वक़्त रामदेओ महनत और उस के शागिर्दों ने अफ़्सूं मंतर पढ़ना शुरू किया किसी खादिम ने सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! से पूरी सूरते हाल बता दी, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने फ़रमाया, इन का सेहर कारगर ना होगा, ये देओ रास्त पर आजायेगा, ये फरमा कर सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! नमाज़ में मशगूल हो गए,
थोड़ी सी देर में रामदेओ और उस के साथी सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के बिलकुल करीब आ गए, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! सलाम फेर चुके थे, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने नमाज़ से फारिग होकर जूंही उस मजमे पर नज़र डाली वो अपनी जगह पर रुक गया और उन की ज़बानो पर ताले पड़ गए क़ुव्वते रफ़्तारो गुफ़्तार सल्ब हो गई,
रामदेओ सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! को देख कर थरथर कांपने लगा, वो अपनी ज़बान से रामराम कहना चाहता था, मगर उसकी ज़बान से रहीम रहीम निकलता था, ये हाल देखर पुजारियों ने रामदेओ को नसीहत करनी शुरू की मगर उस की ये हालत हो गई, के लकड़ी डंडा पत्थर जो हाथ में लेकर मरता पचासियों के सर फाड़ दिए, हाथ पैर तोड़ दिए, और पुजारी भाग गए,
सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने जब राम देओ की ये हालत देखि तो उस पर रहम आ गया, और आप ने अपने हाथ से एक प्याले में पानी डाला और अल्लाह पाक के नाम से उसे रामदेओ के पास भेज दिया, रामदेओ को अल्लाह के वली के भेजे हुए पानी में बड़ी दिल कशी महसूस हुई तो वो फ़ौरन पानी का प्याला पी गया जूंही पानी उस के अंदर गया उस का ज़मीर बेदार हो गया और उस की तकदीर बदल गई, आखिर वो सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के कदमो पर आ गिरा और सच्चे दिल से कुफ्र से तौबा कर के आप के दस्ते अक़दस पर ईमान ला कर मुस्लमान हो गया, आप रदियल्लाहु अन्हु! ने इस का नाम तब्दील कर के शादी देओ रख दिया, आनासागर के किनारे आप रदियल्लाहु अन्हु! का क़याम था, यहीं बहुत से मंदिर थे, जिन में तकरीबन एक हज़ार बुत और 300/ पुजारी रहा करते थे, इन मंदिरों में रौशनी का इंतिज़ाम राजा की तरफ से था, साड़े तीन मन तेल रोज़ाना जला करता था, इन्ही मंदिरों में एक ख़ास मंदिर राजा का था, जिस के इख़राजात के लिए राजा की तरफ से कई गाऊं वक्फ थे, इस राज मंदिर में राजा, उमरा और अशराफ हुनुद के अलावा अवाम को दाखिला की इजाज़त न थी, इन मंदिरों के करीब ही आप रदियल्लाहु अन्हु! और उन के हमराही तालाब पर वुज़ू कर के नमाज़ पढ़ा करते थे, अजमेर के हुनुद ख़ुसूसन बिरहमो को ये बातें सख्त नागवार गुज़रीं, इन का अक़ीदह था, के मुसलमानो के हाथ लगाने से तालाब का पानी नापाक हो जाता है, चुनांचे उन्होंने इस बात की शिकायत की के एक मुस्लमान फ़कीर और उस के साथी आनासागर के किनारे पढ़ाओ डाले हुए हैं, उनकी मौजूदगी से हमारा धरम भरष्ट हो जाता है, इस पर पिरथवी राज ने अपने मातहतों को हुक्म दिया के लोगों को वहां से हटा दिया जाए, इस बात की खबर किसी ने सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! को दे दी, तो आप ने बड़े इत्मीनान से फ़रमाया के “हक आ गया और बातिल मिट गया बेशक बातिल को मिटना ही था”
बिरहमो के सरकरदा अफ़राद पर पिरथवी राज के भेजे हुए सिपाहियों के हमराह वहां पर आए उन का मकसद ये था के वो सख्ती से काम ले कर आप और आप के साथियों को वहां से उठा दें चुनांचे पुलिस और बिरहमन सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! के पास आए और आप को फौरी तौर पर शहर से निकल जाने का हुक्म दिया और कहा के अगर आप खुद नहीं जाएंगे, तो हम आप को ज़बरदस्ती निकाल देंगें, आप ने इन की बात सुनी अनसुनी कर दी और कोई तवज्जुह न दी ये देख कर पुलिस और बिरहमन आप पर हमला करने की ग़र्ज़ से आगे बढे, “सीयरुल अक्ताब” में है के सरकारी आदमी और बिरहमन हथियार, लाठी, तलवार वगेरा ले कर रवाना हो गए और सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! का मुहासिरा कर लिया,
इस इबारत का मफ़हूम ये है के अजमेर शरीफ के कुफ्फार का इरादा सिर्फ सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! का शहर से इख़राज ही न था, बल्कि वो चाहते थे, के सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! को और उन के तमाम साथियों को जान से ख़त्म कर दिया जाए, चुनांचे उन के गलत रवय्ये को देख कर सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ने एक मुठ्ठी भर खाक उठाई और उस पर आयतुलकुर्सी पढ़कर फूक दी, और उन लोगों की तरफ फेंक दी उस ख़ाक के ज़र्रे जिस जिस पर पड़े वो या तो दीवाना हो गया या उस का जिस्म खुश्क हो गया, ये देख कर तमाम हिन्दू ख़ौफ़ज़दा हो गए और उन में भगदड़ मच गई जिस का जिधर मुँह उठा भाग निकला चंद लोग राजा के दरबार में पहुंचे और उसे हक़ीकते हाल से जगह किया,
दूसरी मर्तबा सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! मक्का मुकर्रमा ज़ादा हल्लाहु शरफऊं व तअज़ीमा हाज़िर हुए और काबा शरीफ की ज़ियारत से मुशर्रफ हुए, काबे शरीफ का तवाफ़ और इबादतों रियाज़त में मशगूल रहते, एक दिन आप रदियल्लाहु अन्हु! ने काबा मुअज़्ज़मा में गैब से ये आवाज़ सुनी, ऐ मोईनुद्दीन! हम तुझ से खुश हैं, तुझे बख्श दिया, जो कुछ चाहे मांग, ताके आता करूँ, सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! ये सुनकर बहुत खुश हुए, और सज्दाए शुक्र अदा किया, और अल्लाह पाक की बारगाह में अर्ज़ किया, या इलाही! तेरे बंदे मोईनुद्दीन के लिए इससे बड़ी और क्या सआदत हो सकती है, तूने मुझे अपनी बारगाह का मकबूल बना लिया, इसे के बाद अगर कोई आरज़ू है, तो सिर्फ ये है के तू अपने फ़ज़्लो करम से मेरे सिलसिले के मुरीदों को बख्श दे, आवाज़ आई! के ऐ मोईनुद्दीन तू हमारा ख़ास बंदा है, तेरी आरज़ू मुबारक हो, जो तेरे मुरीद और तेरे सिलसिले में क़यामत तक मुरीद होंगे उन सब को बख्श दूंगा,
तुम को हिंदुस्तान की विलायत अता की
हिन्द के राजा हमारे सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! हमा वक़्त अपने प्यारे नाना जान हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम के मज़ार मुक़द्दस, पर हाज़िर रहते, एक दिन मज़ार शरीफ पर हाज़िर थे, के आप रदियल्लाहु अन्हु! पर गुनूदगी (ओंग, नीँद) आ गई, ख्वाब में आकाए दो जहाँ हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम की ज़ियारत नसीब हुई, और हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम ने सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! को बशारत अता की, ऐ मोईनुद्दीन! तुम मेरे दींन के मोईन हो, में ने तुमको हिंदुस्तान की विलायत अता की, हिंदुस्तान से कुफ्रो शिर्क की तारीकी ज़ुल्मत फैली हुई है, तुम अजमेर जाओ! तुम्हारे वुजूदे मसऊद की बरकत से कुफ्रो शिर्क गुमराहीयो बातिल का अँधेरा ख़त्म होगा और इस्लाम की रौशनी का उजाला फ़ैल जाएगा, इस शानदार पुरबहार! बशारत से सरकार ख्वाजा गरीब नवाज़ रदियल्लाहु अन्हु! बहुत खुश और मसरूर हुए, मगर हैरान थे के अजमेर कहाँ है? अजमेर का रास्ता किधर है? इसी सोचो फ़िक्र में थे के दोबारा आँख लग गई, और हादियो रहबर हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम आप के ख्वाब में तशरीफ़ ला कर थोड़ी ही देर में मदीना शरीफ से हिंदुस्तान के तमाम रास्ते और अजमेर का तमाम शहर और किला, और पहाड़िया आप रदियल्लाहु अन्हु! को दिखला दिया, फिर एक जन्नती अनार! आप रदियल्लाहु अन्हु! को देख हुज़ूर नबी करीम सलल्लाहु अलैही वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया ऐ मोईनुद्दीन! हम तुम को अल्लाह पाक के सुपुर्द करते हैं, और आप को रुखसत फ़रमाया हिंदुस्तान के लिए।
रेफरेन्स हवाला
मिरातुल असरार
सीयरुल अक्ताब
ख़ज़ीनतुल असफिया
सवानेह शैखुल आलम
सफ़िनतुल औलिया,
सीयरुल औलिया
साबरी इंसाइकिलोपीडिया
ख्वाजगाने चिश्त
हिन्द के मुर्शिदे आज़म
हिन्द के राजा सवानेह ख्वाजा
बज़्मे सूफ़िया
तज़किरा ख्वाजाए अजमेर
ख्वाजा गरीब नवाज़ के 100/ वाक़िआत
सूफ़ियाए किराम और दावते दीन
सीरते ख्वाजा गरीब नवाज़
अख़बारूल अखियार
तारीखे फरिश्ता
मुन्तखाबुत तवारीख
मसालिकुस सालिकीन
मोनिसुल अरवाह
अनीसुल अरवाह
तुज़के जहाँगीरी

